भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान में “एससीएसपी प्रशिक्षण एवं बीज वितरण कार्यक्रम” का शुक्रवार को आयोजन किया गया। इस अवसर पर लखनऊ, हरदोई एवं रायबरेली जनपदों से लगभग 250 किसानों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य अनुसूचित जाति उपयोजना (एससीएसपी) के अंतर्गत किसानों को वैज्ञानिक प्रशिक्षण प्रदान करना तथा उन्नत बीज उपलब्ध कराकर उनकी आय एवं उत्पादकता में वृद्धि सुनिश्चित करना था।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए संस्थान के निदेशक डॉ. दिनेश सिंह ने अपने प्रेरक उद्बोधन में किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाकर तथा वैज्ञानिक परामर्श के साथ खेती करने से न केवल लागत में कमी लाई जा सकती है, बल्कि उत्पादन और गुणवत्ता में भी उल्लेखनीय वृद्धि संभव है।
उन्होंने किसानों से आह्वान किया कि वे प्रशिक्षण में प्राप्त ज्ञान को अपने खेतों में लागू कर आत्मनिर्भर एवं लाभकारी खेती की दिशा में आगे बढ़ें। साथ ही उन्होने किसानों से अहवाहन किया की आप यहाँ से जो ज्ञान अर्जित कर के जा रहें हैं अपने आस-पास के किसानों से भी ज्ञान साझा करेंगे।
एससीएसपी के नोडल अधिकारी डॉ. राम रतन वर्मा ने कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए योजना के उद्देश्यों, क्रियान्वयन प्रक्रिया एवं किसानों को प्राप्त होने वाले लाभों की विस्तृत जानकारी दी।
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद से पधारीं डॉ. राजश्री सुनील, निदेशक, फसल विज्ञान प्रभाग ने किसानों को प्रेरित करते हुए कहा कि वे एससीएसपी के माध्यम से उपलब्ध तकनीकी ज्ञान, प्रशिक्षण एवं संसाधनों का अधिकतम लाभ उठाएं तथा वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाकर कृषि को अधिक टिकाऊ एवं समृद्ध बनाएं।
संस्थान के मुख्य प्रशासनिक अधिकारी (वरिष्ठ ग्रेड) अभिषेक श्रीवास्तव ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुए संस्थान की किसान-हितैषी एवं कृषक-कल्याण उन्मुख पहलों पर प्रकाश डाला तथा कहा कि ऐसी योजनाएँ किसानों की आय वृद्धि और आत्मनिर्भर खेती को सशक्त बनाती हैं।
कार्यक्रम का प्रभावी संचालन डॉ. अनीता सावनानी द्वारा किया गया। तकनीकी सत्र के अंतर्गत विभिन्न विशेषज्ञों ने महत्वपूर्ण विषयों पर व्याख्यान एवं प्रदर्शन प्रस्तुत किए।
डॉ. टी. के. श्रीवास्तव, प्रधान वैज्ञानिक (शस्य विज्ञान), फसल उत्पादन विभाग ने खरीफ फसलों की लाभकारी वैज्ञानिक खेती एवं उन्नत कृषि क्रियाओं पर विस्तृत जानकारी दी।
डॉ. एम. के. सिंह, प्रधान वैज्ञानिक एवं विभागाध्यक्ष, कृषि अभियांत्रिकी विभाग ने कृषि यंत्रों के महत्व, उपयोग तथा ड्रोन तकनीक का व्यवहारिक प्रदर्शन कर आधुनिक कृषि उपकरणों की उपयोगिता को रेखांकित किया। वहीं डॉ. ए. पी. द्विवेदी, प्रधान वैज्ञानिक, फसल उत्पादन विभाग ने एकीकृत कृषि प्रणाली (आईएफ़एस) आधारित समन्वित खेती पर अपना व्याख्यान प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम के अंतर्गत खरीफ मौसम में बोई जाने वाली दलहनी, सब्जी एवं चारा फसलों के उन्नत बीजों का वितरण भी किया गया। यह कार्यक्रम किसानों के लिए ज्ञान, तकनीक एवं संसाधनों का एक प्रभावी मंच सिद्ध हुआ।
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