लखनऊ: वैज्ञानिक जिज्ञासा को प्रोत्साहित करने और युवा विद्यार्थियों को शोध वातावरण से प्रत्यक्ष रूप से परिचित कराने के उद्देश्य से, सीएसआईआर-–केंद्रीय औषधीय एवं सगंध पौधा संस्थान (सीएसआईआर-सीमैप), लखनऊ ने सीएसआईआर जिज्ञासा कार्यक्रम – स्टूडेंट–साइंटिस्ट कनेक्ट पहल के अंतर्गत एक शैक्षणिक भ्रमण का आयोजन किया।
जिज्ञासा छात्र-वैज्ञानिक संपर्क पहल के अंतर्गत आयोजित कार्यक्रम
इस भ्रमण में रामचंद्र उच्च शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान, चेन्नई के बी.एससी. (ऑनर्स) और एम.एससी. (ऑनर्स) बायोमेडिकल साइंसेज कार्यक्रम के 75 विद्यार्थियों ने भाग लिया।

इस कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं में औषधीय और सगंध पौधों की भूमिका से अवगत कराना तथा सीएसआईआर-सीमैप में चल रहे अत्याधुनिक अनुसंधान कार्यों से परिचित कराना था।
व्याख्यानों, प्रयोगशाला भ्रमण और वैज्ञानिकों के साथ संवादात्मक सत्रों के माध्यम से विद्यार्थियों को पौधों पर आधारित औषधि खोज (Plant-based Drug Discovery), प्राकृतिक उत्पाद रसायन (Natural Product Chemistry) तथा हर्बल चिकित्सीय उत्पादों के विकास के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त हुई।
डॉ. ज़बीर अहमद, निदेशक सीएसआईआर–आईआईआईएम जम्मू और निदेशक (अतिरिक्त प्रभार) सीएसआईआर–सीआईएमएपी, ने अपने संदेश में बताया कि ऐसी पहलों से युवा मस्तिष्क को प्रेरित करने में मदद मिलती है और छात्रों और वैज्ञानिक समुदाय के बीच संबंध मजबूत होता है।

उन्होंने कहा कि इस तरह की बातचीत छात्रों को यह समझने का अवसर प्रदान करती है कि वैज्ञानिक अनुसंधान संस्थान कैसे काम करते हैं और औषधीय और सुगंधित पौधों में अनुसंधान स्वास्थ्य सेवा, कृषि और जैव-आर्थिक में कैसे योगदान देता है।
उन्होंने जोर देकर कहा कि प्रयोगशालाओं, वैज्ञानिकों और वास्तविक समय अनुसंधान गतिविधियों का अनुभव जिज्ञासा को बढ़ावा देने में मदद करता है और छात्रों को विज्ञान और नवाचार में करियर खोजने के लिए प्रोत्साहित करता है।
कार्यक्रम के दौरान डॉ. राजेश कुमार वर्मा, मुख्य वैज्ञानिक, सीएसआईआर-सीमैप ने एक जानकारीपूर्ण व्याख्यान दिया, जिसमें उन्होंने संस्थान के उद्देश्यों, अनुसंधान पारिस्थितिकी तंत्र तथा भारत में औषधीय और सगंध पौधों के विकास में संस्थान के योगदान पर प्रकाश डाला।
उन्होंने बताया कि सीमैप का अनुसंधान पारंपरिक औषधीय प्रणालियों के वैज्ञानिक सत्यापन को सुदृढ़ करता है और पौधों से प्राप्त औषधियों, आवश्यक तेलों (Essential Oils) तथा न्यूट्रास्यूटिकल्स के विकास को बढ़ावा देता है।
उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि स्वास्थ्य के सतत समाधान विकसित करने के लिए पौध जैव विविधता का संरक्षण अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस अवसर पर डॉ. भास्कर शुक्ला, प्रधान वैज्ञानिक ने सीएसआईआर जिज्ञासा कार्यक्रम के उद्देश्यों और इसके व्यापक प्रभाव के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि यह कार्यक्रम विद्यार्थियों और वैज्ञानिक समुदाय के बीच की दूरी को कम करने के उद्देश्य से बनाया गया है, जिससे युवा विद्यार्थियों को वैज्ञानिकों से संवाद करने, प्रयोगशाला कार्यप्रणाली को समझने और अनुसंधान उन्मुख सोच विकसित करने का अवसर मिलता है।
उन्होंने विद्यार्थियों को सीएसआईआर-सीमैप द्वारा विकसित एक डिजिटल एप्लीकेशन के बारे में भी जानकारी दी, जो सगंध फसलों से संबंधित जानकारी उपलब्ध कराती है। यह एप्लीकेशन किसानों, उद्यमियों और अन्य हितधारकों के लिए एक परामर्श उपकरण (Advisory Tool) के रूप में कार्य करती है, जो सगंध पौधों की खेती और उनसे संबंधित मूल्यवर्धित उत्पादों के विकास में सहायक है।
शैक्षणिक भ्रमण के अंतर्गत विद्यार्थियों को सीएसआईआर-सीमैप की विभिन्न उन्नत शोध सुविधाओं का भी अवलोकन कराया गया, जिनमें जीव विज्ञान केंद्रीय सुविधा (BCF), टिशू कल्चर कोर फैसिलिटी (TCCF) और रासायनिक केंद्रीय सुविधा (CCF) शामिल हैं।
इन प्रयोगशालाओं में विद्यार्थियों को पादप जैव प्रौद्योगिकी, फाइटोकेमिस्ट्री और प्राकृतिक उत्पाद अनुसंधान में उपयोग होने वाले आधुनिक विश्लेषणात्मक उपकरणों और प्रयोगात्मक तकनीकों के बारे में जानकारी दी गई।
विद्यार्थियों को मानव पार्क भी ले जाया गया, जहाँ उन्होंने संस्थान द्वारा अनुसंधान, संरक्षण और शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए संरक्षित विभिन्न औषधीय और सगंध पौधों की प्रजातियों का अवलोकन किया।
कार्यक्रम के अंत में एक संवादात्मक प्रश्न–उत्तर सत्र आयोजित किया गया, जिसमें विद्यार्थियों ने वैज्ञानिकों से सक्रिय रूप से बातचीत की और हर्बल औषधियों, पौधों से प्राप्त जैव सक्रिय यौगिकों (Bioactive Compounds) तथा पादप विज्ञान, जैव प्रौद्योगिकी और औषधीय अनुसंधान में करियर अवसरों से संबंधित प्रश्न पूछे।
इस संवाद ने विद्यार्थियों को यह समझने में सहायता की कि वनस्पति विज्ञान, रसायन विज्ञान और जैव प्रौद्योगिकी जैसे अंतःविषयी क्षेत्रों का समन्वित अनुसंधान किस प्रकार स्वास्थ्य सेवाओं और प्राकृतिक उत्पाद विकास में नवाचार को बढ़ावा देता है।
यह भ्रमण विद्यार्थियों के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर साबित हुआ, जिसके माध्यम से उन्होंने यह देखा कि पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों को आधुनिक वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ किस प्रकार एकीकृत किया जा सकता है, ताकि वर्तमान समय की स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों का समाधान खोजा जा सके।













