लखनऊ : आर्ट एंड क्राफ्ट कॉलेज लखनऊ के टेक्सटाइल डिज़ाइन विभाग के विद्यार्थियों ने अपनी सृजनात्मक प्रतिभा का प्रभावशाली प्रदर्शन करते हुए ‘ताना-बाना’ प्रदर्शनी के माध्यम से परिधान और कपड़ा कला की विविध शैलियों को सामने रखा।
अलीगंज स्थित कला स्त्रोत गैलरी में आयोजित इस प्रदर्शनी में छात्रों की कलाकृतियों को कला प्रेमियों और विशेषज्ञों से भरपूर सराहना मिली।
दुनिया भर में अपनी विशिष्ट कलात्मक पहचान बना चुके लखनऊ आर्ट एंड क्राफ्ट कॉलेज के होम आर्ट्स एंड होम क्राफ्ट विभाग के अंतर्गत संचालित टेक्सटाइल डिज़ाइन पाठ्यक्रम के छात्रों ने इस प्रदर्शनी में बाटिक, चिकनकारी, टेपेस्ट्री, टाइ-डाइ, कांथा और पॉप आर्ट जैसी विधाओं में किए गए प्रयोग प्रस्तुत किए।
प्रदर्शनी का उद्घाटन प्रसिद्ध फैशन डिज़ाइनर, परिधान जगत के व्यवसायी तथा कॉलेज के प्राचार्य रतन कुमार और वरिष्ठ प्रोफेसर आलोक कुमार की उपस्थिति में हुआ। उन्होंने विद्यार्थियों के प्रयासों की सराहना करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
1892 में स्थापित इस प्रतिष्ठित महाविद्यालय के अंतिम वर्ष के छात्र गगनदीप शर्मा, मेहक गुप्ता, इशिता सोनकर, ऋचा सिंह और राधा त्रिपाठी की कलाकृतियाँ प्रदर्शनी का मुख्य आकर्षण रहीं।
गगनदीप शर्मा की ‘वीवेन स्टोरीज़’ और ‘अभिमन्यु’ शीर्षक कृतियाँ बाटिक शैली में कपड़े पर रची गई हैं। ‘वीवेन स्टोरीज़’ में गाय के ऊपर लेटी स्त्री मातृत्व के नैसर्गिक भाव को उभारती है, वहीं ‘अभिमन्यु’ युद्ध, गति और पीड़ा के भावों को सशक्त रूप में अभिव्यक्त करता है। लिनियर टेक्सचर के कारण ये कृतियाँ कैनवास ड्राइंग का आभास देती हैं।
इशिता सोनकर की ‘मदर एंड चाइल्ड’ कृति मैरून धरातल पर क्रीम रंग में बनाई गई है, जिसमें वह स्वयं भी चित्र का हिस्सा हैं। छाया-प्रकाश और चटख रंगों का संतुलन इसे प्रभावशाली बनाता है।
साथ ही उनके द्वारा डिज़ाइन की गई बाटिक ड्रेस रंग संयोजन और टेक्सचर के कारण विशेष रूप से सराही गई। इशिता भविष्य में बाटिक को ही अपना मुख्य करियर क्षेत्र मानती हैं।
ऋचा सिंह ने समुद्र की लहरों और बादलों के भावनात्मक आवेग को ‘सी-स्केप’ के रूप में प्रस्तुत किया है, जिसमें कल्पना और संवेदना का सुंदर मेल दिखाई देता है। मेहक गुप्ता ने पॉप सिंगर्स के लिए बाटिक माध्यम में पोस्टर डिज़ाइन किए, जबकि उनका ‘ब्लाइंड’ शीर्षक चित्र भी दर्शकों का ध्यान खींचता है।
राधा त्रिपाठी ने 36×18 इंच के बड़े कैनवास पर त्रिदेव को अंकित किया है। डार्क बैकग्राउंड पर नारंगी और पीत रंगों में ब्रह्मा, विष्णु और महेश का संयोजन आध्यात्मिक प्रभाव उत्पन्न करता है।
तृतीय वर्ष की छात्राओं शेफाली चन्द्रा, खुशी वर्मा, सौम्या रावत, तफशीना परवीन, आशिता वर्मा और अलंकृता शुक्ला ने भी अपनी रचनात्मक प्रस्तुतियों से प्रदर्शनी को समृद्ध किया।
खुशी वर्मा की जॉर्जेट क्लॉथ पर ग्रीन चिकनकारी सूट, राधा-कृष्ण कांथा चित्र और ‘शाम-ए-अवध’ शीर्षक टेपेस्ट्री विशेष सराही गई।
अलंकृता शुक्ला ने मिंट ग्रीन कॉटन में फाइन चिकनकारी कुर्ता, हाथी आकृति वाले कुशन कवर और विराट कोहली का बाटिक पोर्ट्रेट प्रस्तुत किया।
आशिता वर्मा ने लखनऊ विषयक टेपेस्ट्री और जापानी शैली से प्रेरित मलमल की टाइ-डाइ साड़ी बनाई। शेफाली चन्द्रा की कांथा शैली में हिरन के सिर की आकृति और बाटिक ड्रेस डिज़ाइन लोक-मानस से जुड़ी संवेदनाओं को प्रदर्शित है।
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