सीमैप में भव्य संगोष्ठी, हिंदी में विज्ञान संवाद को बढ़ावा देने पर जोर

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सीएसआईआर-सीमैप में विश्व हिंदी दिवस समारोह (वैज्ञानिक हिंदी संगोष्ठी-सह-कार्यशाला) का उत्सव सभागार में भव्य रूप से आयोजित किया गया।

इस समारोह में सीमैप सहित लखनऊ की सीएसआईआर-राष्ट्रीय वनस्पति अनुसंधान संस्थान (एनबीआरआई) एवं सीएसआईआर-भारतीय विष विज्ञान अनुसंधान संस्थान के कुल 12 शोधार्थियों ने अपनी वैज्ञानिक प्रस्तुति दी साथ ही सभी संस्थानों से वैज्ञानिकों एवं अधिकरियों के साथ ही इस समारोह में लगभग 300 लोगों ने प्रतिभाग किया।

इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि क रूप में –पद्मश्री डॉ. विद्या विंदु सिंह – साहित्यकार एवं पूर्व संयुक्त निदेशक हिन्दी संस्थान उपस्थित रहीं। विश्व हिंदी दिवस 2026 के कार्यक्रम का आरम्भ करने के लिए संस्थान के हिंदी अधिकारी डॉ अनिल कुमार मौर्य दवारा अतिथियों को दीप प्रज्वलन के लिए आमंत्रित किया गया।

तत्पश्चात संस्थान के निदेशक डॉ. प्रबोध कुमार त्रिवेदी ने संगोष्टी एवं कार्यशाला की परिकल्पना के बारे में संक्षिप्त जानकारी दी डॉ. प्रबोध कुमार त्रिवेदी ने हिंदी विश्व दिवस की ऐतिहासिक पहलुओ पर अपने विचार प्रस्तुत किये। जिसमे डॉ. त्रिवेदी ने कहा की भाषा का संरक्षण और प्रचार भारतीय समाज की प्रगति के लिए महत्वपूर्ण होगा।

 

 

उन्होंने ये भी बताया की भारतीय भाषाओं में विज्ञान संचार को बढ़ावा देने से ज्ञान का लोकतंत्रीकरण होगा और यह समाज के सभी वर्गों तक पहुँचाया जा सकता है, जिससे समाज में वैज्ञानिक दृष्टिकोण और विचारधारा का प्रसार होता रहेगा।

और इस समारोह में उन्होंने अपने भाषण में हिंदी के माध्यम से वैज्ञानिको को अपने विषयों को समाज के बड़े हिस्सों तक पहुँचाने पर जोर दिया। इस कार्यक्रम में उन्होंने, वैज्ञानिको को अपने शोध पत्र को स्थानीय भाषा में प्रस्तुत करने का आग्रह किया ताकि ज़्यादा से ज़्यादा आम लोग भी विज्ञान के बारे में समझ सकें और इसका लाभ उठा सकें।

डॉ. प्रबोध कुमार त्रिवेदी ने अपने विचारो का मुख्य उद्देश्य बताते हुए बोले कि विज्ञान को हर व्यक्ति तक पहुँचाने के लिए उसे उसकी मातृभाषा में उपलब्ध कराना अत्यंत आवश्यक है, और इस दिशा में हिंदी भाषा की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है, हिंदी में विज्ञान संवाद को बढ़ावा देने के लिए सभी वैज्ञानिकों को एकजुट होकर कार्य करना चाहिए, ताकि भारत में वैज्ञानिक सोच और ज्ञान का विस्तार हो सके।

उन्होंने भाषण में हिंदी भाषा के प्रति प्रतिबद्धता और वैज्ञानिक संवाद में इसके उपयोग को बढ़ावा देने पर ध्यान केंद्रित किया। मुख्य अतिथीय भाषण में प्रो पद्मश्री डॉ. विद्या विंदु सिंह ने विश्व हिंदी दिवस के अवसर पर हिंदी भाषा के महत्व पर अपने विचार साझा किए।

पद्मश्री डॉ. विद्या विंदु सिंह, ने बताया की हिंदी भाषा का वैज्ञानिक संचार में एक अहम स्थान है, क्योंकि यह न केवल एक व्यापक जनसमूह तक विज्ञान का प्रचार करने का साधन है, बल्कि यह भारतीय सांस्कृतिक और बौद्धिक धारा को भी मजबूती प्रदान करता है अगर हम कहें तो हिन्दी हमारी माँ है।

उन्होंने हिंदी भाषा के वैज्ञानिक लेखन और संवाद के क्षेत्र में और अधिक प्रगति की आवश्यकता पर बल दिया, उन्हने यह भी बताया कि हिन्दी जानने का मतलब भारत को जानना है। वे यह भी बताती हैं की संस्कारों की भाषा हमारी हिंदी भाषा है।

वैज्ञानिक संगोष्ठी का सञ्चालन डा करुणा शंकर के द्वारा किया गया, इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में सीएसआईआर के चारों संस्थान उपस्थित रहे सीएसआईआर – केंद्रीय औषधीय एवं सगंध पौधा संस्थान, सीएसआईआर-राष्ट्रीय वनस्पति अनुसंधान संस्थान (एनबीआरआई) और सीएसआईआर-भारतीय विष विज्ञान अनुसंधान संस्थान हिन्दी संगोष्ठी में सभी वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और फेलो ने सक्रिय रूप से भाग लिया।

कार्यक्रम का उद्देश्य हिन्दी भाषा में वैज्ञानिक लेखन, शोध और संवाद को बढ़ावा देना था। इस संगोष्ठी के दौरान, हिन्दी में वैज्ञानिक कार्यों की प्रस्तुति और संचार के महत्व पर गहन चर्चा की गई। साथ ही, वैज्ञानिक अनुसंधान में हिन्दी का उपयोग कैसे बढ़ाया जा सकता है, इस पर विचार-विमर्श किया गया।

यह आयोजन विज्ञान के क्षेत्र में हिन्दी के महत्व को पुनः स्थापित करने का एक प्रभावशाली प्रयास रहा। कार्यशाला के दौरान, हिन्दी में वैज्ञानिक लेखन के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई और प्रतिभागियों को इस दिशा में अपने कार्यों को और अधिक प्रभावी बनाने के उपाय बताए गए। इसके साथ ही, एकजुट होकर वैज्ञानिक जगत में हिन्दी के योगदान को और समृद्ध बनाने का संकल्प लिया गया।

कार्यक्रम के समापन पर मुख्य अतिथि के रूप मे डा अनंत हेगड़े, सांसद व पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री कौशल विकास और उद्यमिता की गरिमामयी उपस्थिती रही।

उन्होंने अपने वक्तव्य मे कहा कि देश में हिंदी भाषा में हो रहे कार्यों की जितनी प्रशंसा की जाए वो कम है, हमें हिंदी को निरंतर समृद्ध करते रहना चाहिए एवं हिन्दी एक ऐसी भाषा है जो पूरे देश को जोड़कर रखने मे हमेशा अपना योगदान देती आई है।

वैज्ञानिक शोध पत्रों की प्रस्तुति के पश्चात सभी प्रतिभागियों को प्रशस्ति पत्र एवं संस्थान का प्रतीक चिन्ह देकर मुख्य अतिथि एवं निदेशक सीमैप के द्वारा सम्मानित किया गया।

साथ ही प्रत्येक वर्ष चारों प्रयोगशालों के द्वारा मिलकर हिंदी पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किये जाने पर विचार किया गया तत्पश्चात वैज्ञानिक हिंदी संगोष्ठी सह कार्यशाला का समापन डा अनिल कुमार मौर्य के धन्यवाद ज्ञापन एवं राष्ट्रगान के साथ सम्पन्न हुआ।

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