अभिनेत्री रानी मुखर्जी ने हिंदी सिनेमा में अपने तीस साल के सफर का जश्न मनाते हुए एक भावुक और लंबा पोस्ट साझा किया। इस मौके पर उन्होंने अपने तीन दशकों लंबे करियर की यादों और अनुभवों को विस्तार से साझा किया।
रानी ने अपने करियर की शुरुआत ‘राजा की आएगी बारात’ से याद करते हुए बताया कि उन्होंने सिनेमा की दुनिया में कदम किसी मास्टर प्लान के तहत नहीं, बल्कि अनजाने में रखा। उन्होंने लिखा कि यह कोई सपना नहीं था जिसे उन्होंने खोजा, बल्कि कुछ ऐसा था जिसने उन्हें खुद ढूंढ लिया।
Thank you for the love for 30 years ❤️ – Rani Mukerji pic.twitter.com/fz37yV8LmV
— Yash Raj Films (@yrf) January 12, 2026
उन्होंने 90 के दशक की फिल्मों को याद करते हुए कहा कि इस दौर में दर्शकों ने ही उनकी पहचान और दिशा तय की। उनका मानना है कि दर्शक ही कलाकार की नियति निर्धारित करते हैं। इन शुरुआती फिल्मों ने उनके करियर की नींव रखी और उन्हें इंडस्ट्री में एक मजबूत स्थान दिलाया।
2000 के दशक को रानी ने अपनी आवाज़ खोजने का समय बताया। उन्होंने इस दौर में आई फिल्मों जैसे ‘साथिया’, ‘ब्लैक’, ‘हम तुम’ और अपने सहयोगियों संजय लीला भंसाली और अमिताभ बच्चन के साथ काम करने के अनुभव को बेहद खास बताया।
रानी ने यह भी साझा किया कि हमेशा उन्हें मजबूत महिला किरदारों की ओर आकर्षण रहा, जो समाज की रूढ़ियों को चुनौती देते हैं। चाहे वह ‘बंटी और बबली’, ‘नो वन किल्ड जेसिका’ या ‘मर्दानी’ हो, इन भूमिकाओं ने उनके करियर में एक अलग पहचान बनाई।
शादी और मां बनने के बाद भी उनका फोकस कम नहीं हुआ, बल्कि और स्पष्ट हुआ। उन्होंने अपनी संवेदनशीलता और गहराई को ‘हिचकी’ और ‘मिसेज चटर्जी वर्सेस नॉर्वे’ जैसी फिल्मों के माध्यम से दर्शाया।
2025 में ‘मिसेज चटर्जी वर्सेस नॉर्वे’ के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार जीतना उन्होंने अपने जीवन का एक बेहद विनम्र और कृतज्ञ पल बताया। अपने इस लंबी और समृद्ध यात्रा के लिए उन्होंने दर्शकों का दिल से धन्यवाद किया।
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