अभिव्यक्ति-5 साहित्य उत्सव: सैन्य विरासत और रचनात्मकता का अद्भुत संगम

0
183

लखनऊ : लखनऊ में मध्य कमान मुख्यालय द्वारा साहित्य उत्सव अभिव्यक्ति-5 का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का उद्घाटन 14 नवंबर को AWWA की अध्यक्ष श्रीमती सुनीता द्विवेदी ने किया।

इस कार्यक्रम में देश भर के लेखक, कवि, कलाकार, विद्वान और पूर्व सैनिक एक साथ आए और कहानी कहने की कला की शक्ति और सैन्य परिवारों के साझा अनुभवों पर प्रकाश डाला। सत्रों में सैन्य आख्यान, कथा साहित्य, महिला सशक्तिकरण, कला और विरासत सहित कई विषयों पर चर्चा की गई।

दो दिवसीय कार्यक्रम में पैनल चर्चाएँ, कविता पाठ, सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ, पुस्तक लोकार्पण और प्रदर्शनियाँ शामिल थीं, जिनमें AWWA सदस्यों की रचनात्मक भावना और लखनऊ की विरासत, दोनों को उजागर किया गया।

पहले दिन के कार्यक्रम में वीर नारी चित्रा देवी का सम्मान, AWWA की वार्षिक पत्रिका नवचेतना का विमोचन, लेखक महमूद आब्दी द्वारा कथावाचन, “वीरता की कहानियों का उत्सव”, कैप्टन और सक्सेना के साथ एक संवाद, पैनल चर्चा, स्टैंडअप कॉमेडी, पुस्तक लोकार्पण, वाचन शामिल थे। दिन का समापन एक भावपूर्ण सूफी संध्या के साथ हुआ।

दूसरे दिन की शुरुआत ला मार्टिनियर कॉलेज में “द सोल ऑफ़ लखनऊ – एक विरासत संरक्षित” विषय पर एक हेरिटेज वॉक के साथ हुई।

“सरहद, सेना, साहित्य” नामक पैनल चर्चा ने सुबह के सत्र की शुरुआत की, जिसके बाद पुस्तक लोकार्पण, पुस्तक वाचन और “बयान-ए-जज़्बात” कविता पाठ हुआ, जिसने कार्यक्रम में भावनात्मक गहराई ला दी।

डॉ. हिमांशु बाजपेयी और डॉ. प्रज्ञा शर्मा द्वारा प्रस्तुत “दास्तान-ए-इश्क” नामक दास्तानगोई प्रस्तुति ने दर्शकों को प्रेम और परंपरा की कहानियों से मंत्रमुग्ध कर दिया। समापन सत्र में चारु प्रज्ञा ने सेवा, उद्देश्य और समुदाय पर अपने विचार व्यक्त किए। उत्सव का समापन औपचारिक धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।

दोनों दिनों में, दर्शकों ने नुक्कड़ नाटक, ओपन माइक सत्र, हुनर ​​हाट, ऑथर्स लाउंज और चुनिंदा पुस्तक स्टॉल सहित विभिन्न गतिविधियों में भाग लिया। इन सत्रों ने एक जीवंत और समावेशी माहौल तैयार किया जिसने सभी आयु वर्गों के लोगों की भागीदारी और रचनात्मक अभिव्यक्ति को प्रेरित किया।

सूर्या कमान की आवा क्षेत्रीय अध्यक्ष श्रीमती रुचिरा सेनगुप्ता के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम में देश भर के लेखक, कवि, कलाकार, विद्वान और पूर्व सैनिक एक साथ आए और कहानी कहने की कला की ताकत और सैन्य परिवारों के साझा अनुभवों पर प्रकाश डाला। सत्रों में सैन्य आख्यान, कथा साहित्य, महिला सशक्तिकरण, कला और विरासत सहित कई विषयों पर चर्चा हुई।

ये भी पढ़ें : “वंदे मातरम” की गूंज से गूंजा सूर्या कमान – भारतीय सेना ने मनाया 150वां वर्ष

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here