लखनऊ : रंगरेज़ द्वारा आयोजित एक अनूठे सांस्कृतिक आयोजन में लखनऊ ने अपने इतिहास की पहली भजन क्लबिंग एवं जैमिंग नाइट का साक्षी बना।
गोमती नगर स्थित फूड वैली में आयोजित इस कार्यक्रम में महादेव के आत्मा को स्पर्श करने वाले भजनों से लेकर इलेक्ट्रॉनिक भक्तिमय बीट्स की ऊर्जावान प्रस्तुति ने भक्ति और नृत्य का अद्भुत संगम प्रस्तुत किया। यह मात्र एक संगीत संध्या नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक जागरण का अनुभव था।
इस आयोजन की संकल्पना एवं संयोजन रंगरेज़ फेस्टिवल के संस्थापक आशीष खरे द्वारा किया गया। यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा ‘मन की बात’ में “भजन क्लबिंग” की सराहना से प्रेरित थी,
जिसमें उन्होंने युवाओं द्वारा पारंपरिक भजनों को आधुनिक संगीत शैली में प्रस्तुत करने की रचनात्मक पहल की प्रशंसा की थी। इसी दृष्टि को श्री आशीष खरे ने लखनऊ की धरती पर साकार रूप दिया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में सी.एम. पांडेय (राष्ट्रीय अध्यक्ष, सनातन महापरिषद) उपस्थित रहे। उनके साथ उत्तम कुमार शर्मा, जय श्री पांडेय, पवन सिंह चौहान (एमएलसी), राधेश्याम मिश्रा (पूर्व आईएएस एवं प्रधान सचिव, राजस्व) तथा प्रमोद कुमार शर्मा (उपाध्यक्ष, कैंटोनमेंट) सहित अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित थे।
विशेष आकर्षण रहे प्रभु अपरिमय श्याम दास (अध्यक्ष, इस्कॉन लखनऊ)। उनकी जुड़वां बेटियों ने “मुकुंदा रॉक बैंड” के रूप में अपनी स्वरचित भक्ति रचना “ओ मेरे श्याम” प्रस्तुत की, जिसे दर्शकों ने अत्यंत सराहा।
ऊर्जावान एंकरिंग द्वारा अपूर्वा ने पूरे कार्यक्रम में उत्साह बनाए रखा। दर्शक भजनों पर झूमते और गाते नजर आए, जिससे यह आयोजन नई पीढ़ी के लिए एक जीवंत और प्रेरणादायक अनुभव बन गया। अपार सफलता के बाद आयोजकों ने जल्द ही भजन क्लबिंग 2.0 आयोजित करने की घोषणा की है।
रंगरेज़ के बारे में
रंगरेज़ लखनऊ से उभरता एक आधुनिक सांस्कृतिक आंदोलन है, जिसका उद्देश्य आज की पीढ़ी को आत्मिक संगीत, भावनात्मक अभिव्यक्ति और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों से पुनः जोड़ना है। यह एक सुविचारित मंच है जो पीढ़ियों, संस्कृतियों और आंतरिक संवेदनाओं के बीच सार्थक संवाद स्थापित करता है।
रंगरेज़ बैंड इसी सांस्कृतिक मंच के अंतर्गत संकल्पित है, जो आध्यात्मिकता, सूफियाना संगीत और समकालीन युवा अभिव्यक्ति का संगम प्रस्तुत करता है।
प्रत्येक प्रस्तुति परंपरा और आधुनिकता के मेल से एक जीवंत, ऊर्जावान और आध्यात्मिक वातावरण निर्मित करती है।
रंगरेज़ की स्थापना आशीष खरे द्वारा की गई, जो आईआईएम लखनऊ एवं आईआईटी दिल्ली के एग्जीक्यूटिव कोर्स के पूर्व छात्र हैं।
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