लखनऊ। किसानों को बेहतर सिंचाई सुविधाएं मुहैया कराने और जल संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार पूरे प्रदेश में अभियान चलाएगी।
इसके तहत जल-संकटग्रस्त क्षेत्रों में सिंचाई सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा। मुख्यमंत्री लघु सिंचाई योजना के अंतर्गत गहरे और मध्यम गहरे नलकूपों का निर्माण किया जाएगा। साथ ही पुराने चैकडैमों की मरम्मत और नए चैकडैम का निर्माण किया जाएगा।
जल संकटग्रस्त क्षेत्रों में सिंचाई सुविधाओं का होगा विस्तार
सोमवार को इसके निर्देश जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने लघु सिंचाई और भूगर्भ जल विभाग की बैठक में दिए। जलशक्ति मंत्री ने कहा कि लघु सिंचाई और भूगर्भ जल विभाग की योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन से बुंदेलखंड जैसे सूखाग्रस्त इलाके में भी किसानों की फसल उत्पादकता बढ़ी है। जिससे अन्नदाता किसानों की आय में बढ़ोतरी हुई है।
बेहतर सिंचाई सुविधा के लिए नलकूपों और चेकडैम का होगा निर्माण
जल निगम ग्रामीण मुख्यालय में करीब 6 घंटे तक चली बैठक में जलशक्ति मंत्री ने हर जिले में सिंचाई और भूगर्भ जल संरक्षण के लिए किए जा रहे कार्यों की जानकारी ली।
साथ ही भविष्य में योजनाओं का क्रियान्वयन कैसे बेहतर बनाया जाए। इसके निर्देश भी दिए। बैठक में जलशक्ति मंत्री ने बुंदेलखंड और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिलों में किए जा रहे कार्यों की सराहना की।
लघु सिंचाई व भूगर्भ जल विभाग की समीक्षा बैठक में जलशक्ति मंत्री ने दिए निर्देश
इस मौके पर हर जिले के अधिशासी अभियंता ने जिलों में किए जा रहे कार्यों का प्रस्तुतिकरण भी दिया। बैठक में नमामि गंगे विभाग के अपर मुख्य सचिव अनुराग श्रीवास्तव, जल निगम ग्रामीण के एमडी डॉ राजशेखर, राज्य पेयजल एवं स्वच्छता मिशन के अधिशासी निदेशक प्रभास कुमार समेत प्रदेश भर के अधिकारी मौजूद थे।
बुंदेलखंड की 1.37 लाख हेक्टेयर जमीन पर मुहैया कराई गई सिंचाई सुविधा
जलशक्ति मंत्री ने बताया कि बुंदेलखंड जैसे जल संकटग्रस्त क्षेत्रों में सिंचाई सुविधाएं और भूगर्भ जल संरक्षण के लिए सराहनीय काम किए गए हैं। 2017-18 से अब तक बुंदेलखंड के जल-संकटग्रस्त क्षेत्र में 1.37 लाख हेक्टेयर से अधिक अतिरिक्त सिंचाई क्षमता का सृजन किया गया है।
बुंदेलखंड व पश्चिमी यूपी में लघु सिंचाई व जल संरक्षण के क्षेत्र में हुए कार्यों को सराहा
इसके अलावा मुख्यमंत्री लघु सिंचाई योजना के अंतर्गत 4,678 गहरे और 3,050 मध्यम गहरे नलकूपों का निर्माण किया गया है। जिससे किसानों को पूरे साल सिंचाई की सुविधा मिल रही है। पथरीले और जलविहीन क्षेत्रों में अमृत कूप योजना के तहत 3,758 नए कूपों का निर्माण किया गया। जिससे पहले असिंचित भूमि भी अब खेती योग्य बनी है।
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जलशक्ति मंत्री ने बताया कि बुंदेलखंड जैसे जल संकटग्रस्त क्षेत्र में सिंचाई की सुविधा मुहैया कराने से खाद्यान्न उत्पादन बढ़ा है। जिससे किसानों की आय में बढ़ोतरी हुई है। इसका असर लोगों के जीवन पर भी दिख रहा है। क्षेत्र से पलायन रूका है। किसानों को 132 सोलर पंपसेट उपलब्ध कराया गया है।
868 चेकडैम का किया गया निर्माण व 476 तालाबों का किया गया जीर्णोद्धार
बैठक में अधिकारियों ने बताया कि जल संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए बुंदेलखंड में 724 पुराने चेकडैम की मरम्मत कर पुनर्जीवित किया गया है। साथ ही 868 नए चेकडैम का निर्माण व 476 तालाबों का जीर्णोद्धार किया गया है।
इसके अलावा भूजल रिचार्ज के लिए बुंदेलखंड के 739 शासकीय भवनों पर रूफटॉप रेनवाटर हार्वेस्टिंग स्थापित की गई है। अधिकारियों ने बताया कि जल संरक्षण के लिए उठाए गए कदमों का परिणाम है कि बुंदेलखंड के 47 विकासखंड़ों में से 25 अब सुरक्षित श्रेणी में आ चुके हैं।













