सीएसआईआर–केंद्रीय औषधि अनुसंधान संस्थान, लखनऊ ने आज अपनी प्लेटिनम जुबली के साथ 75वाँ वार्षिक दिवस मनाया

0
8

लखनऊ : सीएसआईआर–केंद्रीय औषधि अनुसंधान संस्थान, लखनऊ ने आज संस्थान परिसर में अपने 75वें वार्षिक दिवस के साथ प्लेटिनम जुबली समारोह मनाया, जो औषधि खोज, जैव-चिकित्सा अनुसंधान और जनस्वास्थ्य के क्षेत्र में पचहत्तर वर्षों की समर्पित सेवा का प्रतीक है।

“अनुसंधान उस समुदाय की जरूरतों को संबोधित करना चाहिए जिसके साथ हम काम करते हैं, न कि केवल उस शोध समुदाय को जिसे हम रिपोर्ट करते हैं!” — पद्मश्री डॉ. अभय बंग

इस कार्यक्रम में वैज्ञानिकों, शोधार्थियों, तकनीकी एवं प्रशासनिक कर्मचारियों, विद्यार्थियों तथा आमंत्रित अतिथियों ने भाग लेकर संस्थान की वैज्ञानिक उपलब्धियों और चल रही पहलों को स्मरण किया।

संस्थान की निदेशक डॉ. राधा रंगराजन ने मुख्य अतिथि डॉ. एन. कलैसेल्वी, महानिदेशक, वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR) तथा सचिव, डीएसआईआर, भारत सरकार; पद्मश्री डॉ. अभय बंग, प्रख्यात जनस्वास्थ्य विशेषज्ञ एवं SEARCH, गढ़चिरोली के सह-संस्थापक; तथा डॉ. सत्य दाश, सीईओ, आईकेपी नॉलेज पार्क, हैदराबाद का हार्दिक स्वागत किया। उनकी उपस्थिति ने इस अवसर के राष्ट्रीय महत्व को रेखांकित किया।

प्लेटिनम जुबली व्याख्यान: “रिसर्च विद द पीपल” — पद्मश्री डॉ. अभय बंग

प्लेटिनम जुबली समारोह के अंतर्गत “रिसर्च विद द पीपल” विषय पर पद्मश्री डॉ. अभय बंग ने विशिष्ट व्याख्यान दिया। अपने प्रभावशाली एवं चिंतनशील संबोधन में डॉ. बंग ने कहा कि अनुसंधान का वास्तविक उद्देश्य उन समुदायों की वास्तविक जरूरतों को पूरा करना होना चाहिए जिनकी सेवा शोधकर्ता करते हैं, न कि केवल अकादमिक या संस्थागत प्राथमिकताओं से संचालित होना।

उन्होंने जोर दिया कि सार्थक वैज्ञानिक अनुसंधान सामाजिक वास्तविकताओं से जुड़ा और स्थानीय चुनौतियों के प्रति संवेदनशील होना चाहिए। जन-प्रथम दृष्टिकोण का समर्थन करते हुए उन्होंने कहा कि अनुसंधान अंततः उस समुदाय की सेवा करे जिसके साथ हम कार्य करते हैं—सिर्फ उस शोध समुदाय की नहीं जिसे हम रिपोर्ट करते हैं।

उन्होंने मातृ एवं नवजात देखभाल, रोग-निवारण तथा प्राथमिक स्वास्थ्य प्रणाली सुदृढ़ीकरण से जुड़े सामुदायिक नवाचारों के उदाहरण भी प्रस्तुत किए।

इन अनुभवों ने दर्शाया कि स्थानीय स्तर पर आधारित साक्ष्य किस प्रकार दीर्घकालिक और व्यापक जनस्वास्थ्य सुधार ला सकते हैं। यह व्याख्यान शोधकर्ताओं, विद्यार्थियों और संकाय सदस्यों को अनुसंधान को एक सहयोगात्मक एवं सामाजिक रूप से उत्तरदायी प्रक्रिया के रूप में देखने के लिए प्रेरित करता रहा।

निदेशक, सीएसआईआर-सीडीआरआई द्वारा वार्षिक प्रतिवेदन प्रस्तुति

प्लेटिनम जुबली व्याख्यान के पश्चात निदेशक डॉ. राधा रंगराजन ने संस्थान का वार्षिक प्रतिवेदन प्रस्तुत किया, जिसमें हाल की वैज्ञानिक उपलब्धियाँ, प्रमुख शोध मील के पत्थर तथा भविष्य की दिशाओं का उल्लेख किया गया। उन्होंने वर्षभर चलने वाले प्लेटिनम जुबली समारोह और वर्ष की प्रमुख उपलब्धियों की भी जानकारी दी।

उन्होंने गर्व के साथ बताया कि संस्थान के वैज्ञानिकों को राष्ट्रीय विज्ञान अकादमियों की फेलोशिप तथा अग्रणी एजेंसियों एवं पेशेवर संस्थाओं से कई प्रतिष्ठित सम्मान प्राप्त हुए।

प्लेटिनम जुबली को ज्ञान और विरासत का महत्वपूर्ण पड़ाव बताते हुए डॉ. रंगराजन ने वैज्ञानिकों के समर्पित योगदान के लिए आभार व्यक्त किया तथा उन्हें संस्थान के मूल्यों को बनाए रखते हुए “थिंकिंग बिग, एमिंग हाई” के मंत्र के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।

उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि संस्थान पर अपनी विशिष्ट वैज्ञानिक उत्कृष्टता की विरासत को बनाए रखने और सुदृढ़ करने की जिम्मेदारी है, साथ ही उभरती वैज्ञानिक एवं सामाजिक चुनौतियों का सामना करने के लिए एक प्रगतिशील, गतिशील और भविष्य-उन्मुख अनुसंधान पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करना आवश्यक है।

अतिथि-विशेष डॉ. सत्य दाश का संबोधन

अपने संबोधन में डॉ. सत्य दाश ने वैज्ञानिक खोजों के सामाजिक प्रभाव को अधिकतम करने में ट्रांसलेशनल रिसर्च और उद्यमिता विकास के महत्व पर बल दिया। उन्होंने कहा कि स्टार्ट-अप्स और युवा उद्यमी प्रयोगशाला अनुसंधान को व्यवहारिक तकनीकों, उत्पादों और स्वास्थ्य समाधान में बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

अमेरिका और ब्रिटेन जैसे विकसित देशों का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि वहाँ विश्वविद्यालय और अनुसंधान संस्थान छात्रों एवं शोधकर्ताओं में उद्यमी सोच को सक्रिय रूप से प्रोत्साहित करते हैं, जिससे मजबूत नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र बनता है।

उन्होंने कहा कि भारत में भी मेंटरशिप, इन्क्यूबेशन सहयोग और उद्योग–शैक्षणिक साझेदारी के माध्यम से ऐसी संस्कृति विकसित करना आवश्यक है, जिससे अनुसंधान का रूपांतरण तेज हो, नवाचार-आधारित विकास को बल मिले और देश की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़े।

मुख्य अतिथि डॉ. एन. कलैसेल्वी का वार्षिक दिवस संबोधन

मुख्य अतिथि डॉ. एन. कलैसेल्वी ने कहा कि आज भारतीय विज्ञान को रचनात्मकता और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न विषयों और संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा, “पहले कभी न जुड़े बिंदुओं को जोड़ना ही सृजनात्मकता की कुंजी है।”

सरकार द्वारा बायोफार्मा क्षेत्र पर बढ़ते जोर का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि अनुसंधान से अनुप्रयोग तक की प्रक्रिया को मजबूत करना, स्टार्ट-अप्स को प्रोत्साहित करना और उद्योग–शैक्षणिक सहयोग बढ़ाना सस्ती स्वास्थ्य सेवाओं और वैश्विक प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण है।

उन्होंने यह भी कहा कि 75 वर्षों की विरासत वाला परिपक्व संस्थान होने के नाते सीडीआरआई पर विकसित भारत की परिकल्पना में स्वास्थ्य एवं बायोफार्मा क्षेत्र में प्रभावी, सहयोगात्मक और टिकाऊ कार्यक्रमों के माध्यम से योगदान देने की विशेष जिम्मेदारी है।

प्लेटिनम जुबली वीडियो एवं वर्चुअल हर्बेरियम का लोकार्पण

कार्यक्रम के दौरान सीएसआईआर-सीडीआरआई का प्लेटिनम जुबली वीडियो जारी किया गया तथा वर्चुअल हर्बेरियम का भी अनावरण किया गया।

वर्तमान में इस हर्बेरियम में लगभग 30,000 नमूने संरक्षित हैं, जो 3,000 से अधिक प्रजातियों, 1,752 वंशों और 176 कुलों के एंजियोस्पर्म्स के साथ चयनित जिम्नोस्पर्म्स और क्रिप्टोगैम्स का प्रतिनिधित्व करते हैं। ये नमूने भारत के लगभग सभी राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों सहित जर्मनी, इटली, जापान, पेरू, पाकिस्तान, भूटान और नेपाल जैसे देशों से संकलित किए गए हैं।

यह हर्बेरियम न्यूयॉर्क बॉटैनिकल गार्डन के इंडेक्स हर्बेरियम में सूचीबद्ध है और देश में औषधीय पौधों की विविधता के सबसे मूल्यवान भंडारों में से एक माना जाता है।

संस्थागत पहलों एवं सहयोग हेतु एमओयू पर हस्ताक्षर

कार्यक्रम के दौरान शैक्षणिक एवं अनुसंधान सहयोग को सुदृढ़ करने हेतु चार एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए:

कल्याण सिंह सुपर स्पेशियलिटी कैंसर संस्थान, लखनऊ — कैंसर उपचार, ट्रांसलेशनल एवं क्लिनिकल अनुसंधान को बढ़ावा देने हेतु।

अगनिथा कॉग्निटिव सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड, हैदराबाद — औषधि खोज एवं विकास की जटिल चुनौतियों के समाधान हेतु एआई और डीप-लर्निंग आधारित उच्च-थ्रूपुट जैविक डेटा विश्लेषण के लिए।

नाइपर-हैदराबाद — फार्मास्युटिकल विज्ञान में बुनियादी एवं ट्रांसलेशनल अनुसंधान को प्रोत्साहन देने हेतु।

ह्यूवेल लाइफसाइंसेज लिमिटेड, हैदराबाद — न्यूक्लिक एसिड आधारित अनुसंधान एवं स्वदेशी स्वास्थ्य तकनीकों के विकास को बढ़ावा देने हेतु।

कार्यक्रम का समापन संस्थान की पचहत्तर वर्षों की वैज्ञानिक उत्कृष्टता और समाज सेवा की यात्रा के एक यादगार पड़ाव के रूप में हुआ। वार्षिक दिवस एवं प्लेटिनम जुबली समारोह के आयोजन सचिव डॉ. आमिर नज़ीर ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here