एक्सपर्ट्स ने अधिकारियों व कर्मचारियों को बताई सोशल मीडिया की बारीकियां

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लखनऊ। जवाहर भवन स्थित ग्राम्य विकास विभाग के कार्यालय सभागार में शुक्रवार को आयोजित विशेष मीडिया कार्यशाला प्रतिभागियों के लिए क्षमता संवर्धन का बड़ा केंद्र बनी।

‘संचार माध्यमों द्वारा जनोपयोगी योजनाओं का प्रभावी प्रचार-प्रसार’ विषयक इस कार्यशाला में प्रदेश के विभिन्न जनपदों से आए अधिकारियों/कर्मचारियों को सोशल मीडिया की बारीकियों और डिजिटल सुरक्षा की आधुनिक जानकारी साझा की गई।

ग्राम्य विकास विभाग में आयोजित की गई सोशल मीडिया की कार्यशाला

आयुक्त ग्राम्य विकास विभाग, उत्तर प्रदेश जीएस प्रियदर्शी की अध्यक्षता में आयोजित कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य जिला स्तर पर तैनात कर्मियों को तकनीकी रूप से इतना सक्षम बनाना था।

जिससे वे जनपदों में हो रहे सफल विकास कार्यों, योजनाओं के लाभार्थियों की प्रेरक कहानियों, सकारात्मक पहलों को सोशल मीडिया के माध्यम से बेहतर रूप से साझा कर सकें।

कार्यशाला में जनता की सहभागिता बढ़ाने और सकारात्मक प्रयासों को मीडिया एवं समाज तक प्रभावी ढंग से पहुँचाये जाने पर जोर दिया गया। प्रतिभागियों ने X (ट्विटर) पर सही अधिकारियों को टैग करना, इंस्टाग्राम की विशेषताओं (लोकेशन, टैगिंग) का प्रयोग और पोस्ट को Pin व Schedule करने की तकनीकी जानकारी प्राप्त की।

आयुक्त महोदय ने अपने संबोधन में कहा कि “विभागीय योजनाओं और उपलब्धियों का व्यापक प्रचार-प्रसार करना आवश्यक है, ताकि सही जानकारी आमजन तक पहुंच सके। यदि कोई नकारात्मक या भ्रामक खबर सामने आए, तो उसका तथ्यात्मक खंडन करना भी उतना ही जरूरी है। इससे विभाग की पारदर्शिता और विश्वसनीयता बनी रहती है तथा समाज में सकारात्मक संदेश फैलता है।”

उन्होंने सभी अधिकारियों/कर्मचारियों को निर्देश दिया कि सोशल मीडिया को केवल सूचना प्रसार का माध्यम न मानें, बल्कि इसे जनसंवाद और विश्वास निर्माण का एक सशक्त मंच समझकर जिम्मेदारीपूर्वक उपयोग करें।

कार्यशाला में सोशल मीडिया एक्सपर्ट्स ने संदेशों को स्पष्ट, आकर्षक और प्रभावी हैशटैग (#) के साथ साझा करने की सलाह दी, ताकि वे लक्षित समूह तक पहुँच सकें।

विभागीय अधिकारियों/कर्मचारियों को सोशल मीडिया के गुर सिखाये गये

प्रतिभागियों के पूछे गए सवालों के जवाब में सोशल मीडिया एक्सपर्ट ने नकारात्मक टिप्पणियों पर संयमित व तथ्यात्मक प्रतिक्रिया देना और पोस्ट की पहुंच व सहभागिता (Engagement) बढ़ाने के लिए रणनीतिक प्रयास करने के गुर बताए।

प्रतिभागियों को फर्जी अकाउंट्स की पहचान करने, सोशल मीडिया सुरक्षा सुनिश्चित करने और ऑनलाइन आने वाली शिकायतों के त्वरित प्रतिक्रिया के तरीके बताए।

आयुक्त महोदय ने आश्वासन दिया कि बेहतरीन कंटेंट और प्रचार सामग्री बनाने के लिए विभाग जनपदों को आधुनिक सॉफ्टवेयर और तकनीकी सहायता उपलब्ध कराएगा। भविष्य में रिस्पांस मैनेजमेंट (ओआरएम) सुविधा से भी प्रतिभागियों के कार्य को सुगम बनाया जाएगा।

वरिष्ठ पत्रकारों ने प्रतिभागियों को बताया कि कैसे वे ग्रामीण क्षेत्रों के लाभार्थियों, अपने क्षेत्र की उपलब्धियों को आकाशवाणी (12 केंद्रों) और दूरदर्शन के माध्यम से कैसे बड़े मंच पर ला सकते हैं।

कार्यशाला में आकाशवाणी के कार्यक्रम अधिशासी सुशील कुमार राय ने आकाशवाणी से प्रसारित होने वाले ग्राम्य विकास के कार्यक्रम व विभिन्न प्रसारणों की जानकारी दी। उन्होंने लाभार्थियों की सफल कहानियों के प्रसारण के लिए आमंत्रण दिया। वरिष्ठ पत्रकार नवलकांत सिन्हा ने मीडिया कर्मियों से संवाद करने की सलाह दी।

उन्होंने बताया कि मीडियाकर्मियों के साथ निरंतर संपर्क और फील्ड से आने वाली सूचनाओं में तेजी लाकर ही योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाया जा सकता है। दूरदर्शन से आए इलेक्ट्रानिक मीडिया विशेषज्ञ ध्रुव कुमार ने प्रतिभागियों के साथ संवाद कर उन्हें दूरदर्शन से ग्रामीण इलाकों के लिए बनाए जा रहे कार्यक्रमों के बारे में बताया।

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