लखनऊ. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सिद्धांत सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, सबका प्रयास के अन्तर्गत हेल्प यू एजुकेशनल एंड चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा ‘शब्द, साज और संस्कृति की एक शाम “शायर मनीष शुक्ला के नाम” साहित्यिक कार्यक्रम का आयोजन इंटरनेशनल बौद्ध शोध संस्थान, विपिन खंड, गोमती नगर, लखनऊ में किया गया.
कार्यक्रम का शुभारंभ राष्ट्रगान गाकर हुआ. हेल्प यू एजुकेशनल एंड चैरिटेबल ट्रस्ट के प्रबंध न्यासी हर्ष वर्धन अग्रवाल, मोहतरमा साबिरा हबीब, पवन कुमार, अब्दुल मजीद खान, वयोवृद्ध कवि उदय प्रताप सिंह, शायर मनीष शुक्ला ने दीप प्रज्वलन किया. श्रोताओं में सभी वर्ग और उम्र के लोगों की उपस्थिति रही.
महाकवि पद्मभूषण डॉ गोपाल दास नीरज के साहित्यिक पथ पर बढ़ रहे हैं मनीष शुक्ला
कार्यक्रम में आए सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए हेल्प यू एजुकेशनल एंड चैरिटेबल ट्रस्ट के प्रबंध न्यासी हर्ष वर्धन अग्रवाल ने कहा कि आज का कार्यक्रम प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सिद्धांत ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, सबका प्रयास’ के अन्तर्गत आयोजित किया गया.
हेल्प यू एजुकेशनल एंड चैरिटेबल ट्रस्ट के पूर्व संरक्षक पद्मभूषण डॉ गोपाल दास नीरज शब्दों के जादूगर थे तथा उनका यही जादू उनके गीतों द्वारा संगीत प्रेमियों के सर चढ़कर बोला. उनके शब्दों को साज के साथ पिरोकर संगीतकारों ने कितने ही अनमोल व अद्भुत गीतों की रचना की.
शब्द अमूल्य हैं क्योंकि कोई उनका सही प्रयोग कर महान बन जाता है तो कोई उनका गलत प्रयोग कर फकीर. हमारे पूर्व संरक्षक पद्मश्री अनवर जलालपुरी ने गंगा जमुनी तहजीब और संस्कृति को सम्मान देते हुए धर्म ग्रन्थ श्रीमद्भगवत् गीता का उर्दू अनुवाद किया तथा सभी देशवासियों को एकजुट होकर रहने का संदेश दिया.
नीरज जी कहा करते थे “आत्मा के सौंदर्य का शब्द रूप है काव्य, मानव होना भाग्य है, कवि होना सौभाग्य” इसलिये आज के कार्यक्रम के सरताज श्री मनीष शुक्ला बहुत भाग्यशाली हैं कि उन्होंने अपने शब्दों को गीतों व गजलों में पिरोया है तथा उनके शब्दों की ताकत से प्रभावित होकर उन्हें अनेकों सम्मानों से नवाजा गया है.
मनीष शुक्ला महाकवि पद्मभूषण डॉ गोपाल दास नीरज की साहित्यिक राह पर अग्रसर हैं. हमारी मनीष शुक्ला से अपेक्षा है कि वह भी अपनी लेखनी से हेल्प यू एजुकेशनल एंड चैरिटेबल ट्रस्ट के पूर्व संरक्षक महाकवि पद्मभूषण गोपाल दास नीरज तथा महान शायर पद्मश्री अनवर जलालपुरी की तरह परचम साहित्य जगत में स्थापित करेंगे.
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इस अवसर पर मनीष शुक्ला ने कहा कि मैं हेल्प यू एजुकेशनल एंड चैरिटेबल ट्रस्ट का शुक्रगुजार हूं कि उन्होंने मेरे नाम से कार्यक्रम का आयोजन किया. मैं प्रदीप अली साहब और मृदुला चटर्जी साहिबा का भी बेहद शुक्रगुज़ार हूँ कि उन्होंने अपनी ख़ूबसूरत आवाज़ देकर मेरे साधारण से शब्दों को ज़िन्दगी अता कर दी.
साहित्यिक कार्यक्रम ‘शब्द, साज और संस्कृति की एक शाम “शायर मनीष शुक्ला के नाम” में ग़ज़ल गायक प्रदीप अली, तथा सारेगामापा विजेता मृदुला चटर्जी ने शायर मनीष शुक्ला की रचनाओं की सुमधुर प्रस्तुति कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया.
प्रदीप अली ने नेकी बदी मे पड़के के परेशान हो गया…., किसी के इश्क़ मे बर्बाद होना……, इश्क़ मे इतना ख़सारा क्यों किया था……, चाँद सितारे मुट्ठी मे थे……, मोहे देख पिया……
युगल प्रस्तुति में प्रदीप अली व मृदुला चटर्जी ने आओ हम तुम दोनों मिलकर दुनिया को ठुकराते हैं, बाहर से ज़िंदा रहते हैं अंदर से मर जाते हैं. जाने कब तक सूरत निकले चारागर के आने की, तब तक अपनी साँसों से ही ज़ंजीरें पिघलाते हैं……
मृदुला चटर्जी ने “बड़ी मुश्किल थी दुनिया से हमें दो चार होना था, और उस पर ये मुसीबत साहिब ए किरदार होना था, जहां ख़ामोश रहना था वहां इज़हार कर बैठे, वहां ख़ामोश बैठे हैं जहां इज़हार होना था….” प्रस्तुत किया.गिटार पर रिंकू राज, बेस गिटार पर ललित मैसी, ढोल पर अंशु मिश्रा व तबला पर सुभाष चन्द्र शर्मा लाले ने साथ दिया.