लखनऊ। राज्य ललित कला अकादमी, कैसरबाग़, लखनऊ में आयोजित पांच दिवसीय चित्रकला प्रदर्शनी “अभिव्यक्ति प्रदर्शिनी” का आज अत्यंत गरिमामय एवं भव्य समापन हुआ। प्रदर्शनी में शहर के लगभग 70 उभरते एवं प्रतिष्ठित कलाकारों की उत्कृष्ट कलाकृतियाँ प्रदर्शित की गईं, जिनमें सामाजिक सरोकार, प्रकृति, संस्कृति, मानवीय संवेदनाएँ एवं समकालीन विषयों को आकर्षक रंगों और सशक्त अभिव्यक्तियों के माध्यम से प्रस्तुत किया गया।
“रंगों में संवेदनाएँ, कला में समाज की आत्मा”
युवा कलाकारों की रचनात्मक अभिव्यक्तियों ने मोहा दर्शकों का मन, अतिथियों ने किया सम्मानित
प्रदर्शनी में विभिन्न विद्यालयों एवं महाविद्यालयों के 60 से अधिक युवा कलाकारों की रचनात्मक पेंटिंग्स एवं कलात्मक प्रस्तुतियों ने कला प्रेमियों, बुद्धिजीवियों और दर्शकों को विशेष रूप से आकर्षित किया। प्रदर्शनी के दौरान कला दीर्घा में उत्साह, सृजनशीलता और सांस्कृतिक चेतना का अद्भुत वातावरण देखने को मिला।

समापन समारोह के मुख्य अतिथि मनोज सिंह, पूर्व राष्ट्रीय हॉकी खिलाड़ी एवं पूर्व कस्टम अधिकारी रहे। विशिष्ट अतिथि के रूप में रोहित राज, सुपरिटेंडेंट (प्रिवेंटिव), सेंट्रल ब्यूरो ऑफ नारकोटिक्स (CBN) तथा डॉ. ए. के. शुक्ला, पूर्व मुख्य चिकित्सा अधिकारी उपस्थित रहे।
मुख्य अतिथि मनोज सिंह ने युवा कलाकारों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा — “जब रंग कैनवास पर उतरते हैं, तब समाज की सोच को नई दिशा मिलती है।”

उन्होंने कहा कि कला केवल चित्रों तक सीमित नहीं होती, बल्कि यह समाज की भावनाओं, संघर्षों और उम्मीदों को जीवंत स्वर प्रदान करती है। युवा कलाकारों की कलाकृतियों में संवेदनशीलता, अनुशासन, कल्पनाशीलता एवं सामाजिक चेतना स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यदि युवा कलाकार इसी समर्पण और रचनात्मक ऊर्जा के साथ आगे बढ़ते रहे, तो वे राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित करेंगे।
विशिष्ट अतिथि रोहित राज ने कलाकारों को प्रेरित करते हुए कहा —
“कला वह शक्ति है, जो मौन भावनाओं को भी जीवंत अभिव्यक्ति दे देती है।”
उन्होंने कहा कि चित्रकला व्यक्ति के भीतर सकारात्मक ऊर्जा, आत्मविश्वास और रचनात्मक दृष्टिकोण का विकास करती है। युवा कलाकारों की प्रतिभा समाज को प्रेरणा देने का कार्य कर सकती है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे अपनी कला के माध्यम से सकारात्मक संदेशों, मानवीय मूल्यों और सामाजिक जागरूकता को निरंतर आगे बढ़ाते रहें।
डॉ. ए. के. शुक्ला ने अपने संबोधन में कहा कि कला मानसिक संतुलन, संवेदनशीलता एवं सृजनात्मकता को विकसित करने का सशक्त माध्यम है। उन्होंने कहा कि कला युवा पीढ़ी को सकारात्मक दिशा प्रदान करने के साथ-साथ समाज में सौहार्द और मानवीय मूल्यों को भी सुदृढ़ करती है।
इस अवसर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले युवा कलाकारों को अतिथियों द्वारा पुरस्कार एवं प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। अतिथियों ने कलाकारों की रचनात्मक प्रतिभा की सराहना करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।













