विधानसभा में गूंजा कैफ़ी आज़मी प्रेक्षागृह का मुद्दा, पारदर्शिता पर उठे सवाल

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लखनऊ। लखनऊ पूर्वी विधानसभा क्षेत्र के निशातगंज स्थित पेपर मिल कॉलोनी में निर्मित कैफ़ी आज़मी प्रेक्षागृह से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय विधायक ओपी श्रीवास्तव द्वारा उत्तर प्रदेश विधानसभा में नियम-51 के अंतर्गत पूरे दस्तावेज़ी तथ्यों के साथ प्रमुखता से उठाया गया।

विधायक द्वारा प्रस्तुत जनहित से जुड़े इस गंभीर विषय पर विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने संज्ञान लेते हुए इसे सदन की कार्यवाही में विधिवत शामिल कराया तथा नियम-51 के अंतर्गत संबंधित विभागीय अधिकारियों को आवश्यक निर्देश प्रदान किए।

विधायक ने स्पष्ट किया कि यह विषय केवल एक भवन तक सीमित नहीं है, बल्कि सार्वजनिक संपत्ति के उपयोग, पारदर्शिता, प्रशासनिक जवाबदेही तथा स्थानीय नागरिकों के अधिकार से जुड़ा गंभीर प्रश्न है।

विधानसभा में प्रस्तुत अभिलेखीय तथ्यों के अनुसार वर्ष 2003 से पूर्व उक्त लगभग 4500 वर्गमीटर भूमि पर नगर निगम लखनऊ का प्राथमिक विद्यालय, जिसे स्थानीय स्तर पर “पीला स्कूल” कहा जाता था, संचालित होता था।

दिनांक 28 मई 2004 को नगर निगम की कार्यकारिणी समिति की बैठक (मद संख्या-46) में प्रस्ताव पारित कर उक्त भूमि कैफ़ी आज़मी अकादमी को हस्तांतरित किए जाने की स्वीकृति प्रदान की गई।

वर्ष 2007 में भवन निर्माण पूर्ण हुआ तथा दिनांक 30 मार्च 2007 के अनुबंध के अनुसार परिसर का उपयोग सांस्कृतिक, साहित्यिक एवं शैक्षिक कार्यक्रमों के लिए किया जाना निर्धारित किया गया। तथापि भूमि का मूल स्वामित्व नगर निगम, लखनऊ के पास ही दर्ज है।

विधायक श्रीवास्तव ने सदन में प्रश्न उठाया कि जब भूमि नगर निगम की है तो स्वामित्व एवं प्रशासनिक नियंत्रण की वर्तमान स्थिति क्या है और किन प्रावधानों के अंतर्गत इसका संचालन किया जा रहा है। उन्होंने यह भी पूछा कि स्थानीय नागरिकों एवं सामाजिक संगठनों को समान रूप से उपयोग की सुविधा क्यों उपलब्ध नहीं हो पा रही है।

विधायक ने कहा कि यदि प्राथमिक विद्यालय यथावत संचालित रहता तो जहां क्षेत्रीय बच्चों को शिक्षा सुविधा मिलती, वहीं नगर निगम को राजस्व भी प्राप्त होता,

किंतु वर्तमान में नगर निगम को इस भवन पर व्यय करना पड़ रहा है। उन्होंने संचालन व्यवस्था में जनप्रतिनिधियों की सहभागिता, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित किए जाने की आवश्यकता पर बल दिया।

विधायक ने मांग की कि प्रेक्षागृह की संचालन व्यवस्था को पूर्णतः पारदर्शी एवं जवाबदेह बनाया जाए, स्थानीय पार्षद एवं क्षेत्रीय विधायक को प्रबंधन में सम्मिलित किया जाए

तथा आवश्यकता होने पर प्रेक्षागृह का संचालन नगर निगम को सौंपकर इसे व्यापक जनहित में संचालित किया जाए, ताकि यह सार्वजनिक संपत्ति सभी नागरिकों के लिए समान रूप से उपलब्ध हो सके।

इस विषय को दिनांक 13 फरवरी 2026 को नियम-51 के अंतर्गत स्वीकार किया गया तथा 18 फरवरी 2026 को सदन में वक्तव्य हेतु निर्धारित किया गया।

विधायक ने कहा कि “जनता की संपत्ति पर जनता का अधिकार सर्वोपरि है” तथा सार्वजनिक संसाधनों का उपयोग पूर्ण पारदर्शिता, समान अवसर और जनहित की भावना से सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

लखनऊ पूर्वी की जनता की यह मांग अब विधानसभा के पटल पर विधिवत दर्ज हो चुकी है तथा संबंधित विभागों को आवश्यक कार्रवाई के लिए निर्देशित किया जा चुका है।

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