मोहनलालगंज का कुढ़ा गांव बना राजधानी का पहला “जल अर्पण गांव”

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लखनऊ। राजधानी के मोहनलालगंज की कुढ़ा ग्राम पंचायत प्रदेश का दूसरा ‘जल अर्पण गांव’ बन गया है। बुधवार को जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने ग्रामवासियों को प्रतीक स्वरूप ग्राम प्रधान अमरीश कुमार को जल कलश सौंपकर जल अर्पण कार्यक्रम की शुरूआत की।

पेयजल आपूर्ति का संचालन खुद संभालने वाला प्रदेश का दूसरा गांव होगा कुढ़ा

प्रदेश का दूसरा जल अर्पण गांव बनने के बाद अब इस गांव में पानी आपूर्ति की पूरी व्यवस्था ग्रामीण खुद संभालेंगे। जिसका नेतृत्व ग्राम प्रधान करेंगे। यानि अब गांव के लोग ही पानी के मालिक होंगे। उन्हीं की देख-रेख में योजना को संचालित किया जाएगा।

जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने ग्रामवासियों को जल कलश सौंपकर की शुरूआत

इस मौके पर जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने ग्रामीणों को संबोधित करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पानी की सौगात दी है। उन्होंने ग्रामीणों से जल संरक्षण की अपील करते हुए कहा कि पानी हर जरूरतमंद के पास पहुंचे और पानी को बर्बाद न किया जाए, ये हर ग्रामवासी की जिम्मेदारी होनी चाहिए।

उन्होंने बताया कि गांव में 2 करोड़ 44 लाख रुपये की लागत से परियोजना का निर्माण कर गांव के 550 परिवारों को शुद्ध पेयजल की आपूर्ति की जा रही है। इस मौके पर नमामि गंगे एवं ग्रामीण जलापूर्ति विभाग के अपर मुख्य सचिव अनुराग श्रीवास्तव ने कहा कि जल जीवन मिशन योजना ग्रामीणवासियों को स्वच्छ पेयजल आपूर्ति के लिए है।

इसी के तहत आज योजना के संचालन की जिम्मेदारी ग्रामवासियों को दी जा रही है। इससे पहले गोरखपुर का वनटांगिया गांव जंगल तिनकोनिया-3 प्रदेश का पहला और देश का दूसरा जल अर्पण गांव बना था।

कार्यदायी एजेंसी अगले 10 साल तक करेगी परियोजना का रखरखाव

कार्यक्रम के दौरान जल निगम ग्रामीण के एमडी डॉ राजशेखर, राज्य पेयजल एवं स्वच्छता मिशन के अधिशासी निदेशक प्रभास कुमार समेत कई अधिकारी मौजूद थे।

इस मौके पर जलशक्ति मंत्री स्वंतत्र देव सिंह ने मोहनलालगंज की कुढ़ा ग्राम पंचायत के दिए गए नल कनेक्शन का निरीक्षण किया। इस दौरान जलशक्ति मंत्री व अपर मुख्य सचिव अनुराग श्रीवास्तव समेत सभी विभागीय अधिकारियों ने खुद नल से पानी पीकर पानी की गुणवत्ता जांची।

जलशक्ति मंत्री ने कहा कि ये गांव के इतिहास में नया अध्याय लिखा जा रहा है। पहले माताओं-बहनों को पानी के लिए दूर-दूर तक भटकना पड़ता था।

अब उनके घर में साफ जलापूर्ति हो रही है। उन्होंने कहा कि ये परियोजना गांव के विकास की आधारशिला बनेगी। प्रधानमंत्री ने कहा है हर घर जल केवल योजना नहीं है। ये आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित भविष्य की नींव है।

स्कूली बच्चों प्रभात फेरी निकालकर दिया जल संरक्षण व स्वच्छता का संदेश

कार्यक्रम की शुरूआत से पहले स्थानीय स्कूली बच्चों ने प्रभात फेरी निकालकर पूरे गांव को जल संरक्षण व स्वच्छता का संदेश दिया। इसके बाद बच्चों ने गांवों के नल कनेक्शन को राखी बांधकर जल बंधन कार्यक्रम किया। इसका मकसद जल संरक्षण के महत्व को समझाना था। बच्चों और ग्रामीणों ने जल संरक्षण का संकल्प भी लिया।

प्रदेश के 51,000 गांवों तक पहुंच रहा नल से शुद्ध जल

इस योजना की सबसे बड़ी विशेषता इसका दीर्घकालिक और टिकाऊ मॉडल है। पेयजल आपूर्ति की जिम्मेदारी संभालने वाली कार्यदायी एजेंसी अगले 10 वर्षों तक संचालन, रखरखाव और गुणवत्ता की सतत निगरानी करेगी। इससे ग्रामीणों को बिना रुकावट, मानक के अनुरूप नल से शुद्ध जल उपलब्ध होता रहेगा।

प्रदेश स्तर पर हर घर जल मिशन के तहत 51 हजार गांवों (राजस्व गांव) में 100 प्रतिशत जलापूर्ति सुनिश्चित की गई है। अब तक प्रदेश के 26,531 राजस्व गांव ‘हर घर जल’ से प्रमाणित हो चुके हैं।

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