पीकेएल 12 : 2017 से अब तक यूपी योद्धाज़, लगातार प्रदर्शन लेकिन खिताब की तलाश

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लखनऊ : प्रो कबड्डी लीग (PKL) का बहुप्रतीक्षित खिताब जीतने के लक्ष्य के साथ यूपी योद्धाज़ सीजन 12 में अपने सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन की तैयारी कर रही है।

2017 में पीकेएल में पदार्पण करने के बाद से, यूपी योद्धाज़ लीग की सबसे लगातार प्रदर्शन करने वाली टीमों में से एक रही है, जिन्होंने हर सीजन में प्लेऑफ के लिए क्वालीफाई किया है, सिवाय सीजन 10 के।

मुख्य कोच जसवीर सिंह के नेतृत्व में, यूपी योद्धाज़ पीकेएल सीजन 11 में शानदार प्रदर्शन करने वाली टीमों में से एक रही। टीम ने लीग चरण में 22 में से 13 मैच जीतकर 79 अंकों के साथ तीसरा स्थान हासिल किया था।

उन्होंने एलिमिनेटर 1 में दो बार की चैंपियन जयपुर पिंक पैंथर्स को 46-18 से हराया, लेकिन सेमीफाइनल में हरियाणा स्टीलर्स से 25-28 से हार गए।

आगामी पीकेएल सीजन 12 में भी जसवीर सिंह ही हेड कोच बने रहेंगे, जो भारतीय सेना में लगभग 25 साल की सेवा के बाद सीजन 6 से यूपी योद्धाज़ के कोचिंग स्टाफ का हिस्सा रहे हैं। डिफेंडर सुमित सांगवान टीम के कप्तान होंगे और आशीष सिंह उप-कप्तान की भूमिका निभाएंगे।

ताकत: मुख्य खिलाड़ी बरकरार

सीजन 11 में शानदार प्रदर्शन करने के बाद, यूपी योद्धाज़ ने अपने अधिकतर मुख्य खिलाड़ियों को सीजन 12 की नीलामी से पहले रिटेन किया।

रेडर्स में भवंनी राजपूत, गगन राजू गौड़ा, सुरेंदर गिल, केशव कुमार, शिवम चौधरी; डिफेंस में राइट कॉर्नर हितेश, लेफ्ट कॉर्नर सुमित सांगवान, राइट कवर आशीष सिंह और राइट कॉर्नर साहुल कुमार जैसे खिलाड़ी फिर से टीम का हिस्सा होंगे।

कोच जसवीर सिंह भी बरकरार हैं, जिन्होंने टीम को छह में से पांच बार प्लेऑफ तक पहुँचाया है। इसके अलावा, टीम ने एफबीएम कार्ड का इस्तेमाल कर महेंदर सिंह (लेफ्ट कवर) को ₹20 लाख में रिटेन किया। साथ ही, ईरानी डिफेंडर मोहम्मदरेजा कबूदरहांगी को भी एफबीएम के जरिए दोबारा साइन किया गया।

गुमान सिंह की टीम में एंट्री

यूपी योद्धाज़ ने अनुभवी रेडर गुमान सिंह को ₹1.073 करोड़ में साइन कर टीम को और मजबूत किया है। सीजन 7 में पीकेएल डेब्यू के बाद से गुमान सिंह ने 81 मैचों में 559 रेड पॉइंट्स, 17 सुपर रेड और 26 सुपर 10 अपने नाम किए हैं। वे इस सीजन में टीम के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

आक्रमण और रक्षा में गहराई

गुमान सिंह, भवंनी राजपूत और गगन राजू गौड़ा जैसे रेडर्स के साथ, और डिफेंस में हितेश, सुमित सांगवान, महेंदर सिंह और आशीष सिंह जैसे खिलाड़ियों के साथ, यूपी योद्धाज़ की टीम संतुलित नजर आ रही है और पहली बार ट्रॉफी जीतने की प्रबल दावेदार बन सकती है।

कमजोरियाँ: ऑलराउंडर्स की कमी

यूपी योद्धाज़ की सबसे बड़ी कमजोरी यह है कि टीम में गुणवत्ता वाले ऑलराउंडर्स की कमी है। आमतौर पर जो टीमें पीकेएल का खिताब जीतती हैं, उनमें कम से कम एक अच्छा ऑलराउंडर जरूर होता है। यह कमी नाजुक मौकों पर टीम को भारी पड़ सकती है।

कवर पोजिशन में अनुभवहीन बैकअप

महेंदर सिंह (लेफ्ट कवर) और आशीष सिंह (राइट कवर) तो अनुभवी हैं, लेकिन इनके बैकअप खिलाड़ियों के पास पीकेएल का अनुभव कम है। यदि इनमें से कोई चोटिल होता है या उपलब्ध नहीं रहता, तो यह टीम के लिए खतरे की घंटी बन सकता है। ऐसे में सचिन मणिपाल, गंगाराम और रोनक को मौकों का लाभ उठाना होगा।

खिताबी सूखे को खत्म करने का सही समय

यूपी योद्धाज़ ने 2017 से अब तक लगातार अच्छा प्रदर्शन किया है, लेकिन अब तक खिताब नहीं जीत पाई है। अगर टीम अपने संतुलित स्क्वाड का पूरा इस्तेमाल करती है, तो पीकेएल सीजन 12 में वे अपनी खिताबी तलाश पूरी कर सकते हैं।

युवा प्रतिभाएँ और कोच का अनुभव

टीम में कई युवा खिलाड़ी हैं जो इस सीजन में खुद को साबित करना चाहेंगे। जयेश विकास महाजन, गंगाराम, सचिन और केशव कुमार जैसे युवा सितारे टीम के भविष्य बन सकते हैं। वहीं हेड कोच जसवीर सिंह भी इस सीजन में यूपी योद्धाज़ को उनकी पहली ट्रॉफी दिलाने का सपना देख रहे हैं।

खतरे: चोटों का जोखिम

यूपी योद्धाज़ के लिए सबसे बड़ा खतरा उनके प्रमुख रेडर्स की चोटों से जुड़ा हुआ है। गुमन सिंह, भवंनी राजपूत और सुरेंदर गिल जैसे खिलाड़ी किसी भी टीम की डिफेंस को तहस-नहस कर सकते हैं, लेकिन अगर इन खिलाड़ियों को चोट लगती है तो टीम का संतुलन बिगड़ सकता है।

सुरेंदर गिल का फॉर्म

हालांकि सुरेंदर गिल अनुभवी खिलाड़ी हैं, लेकिन पिछले कुछ सीजन में उनका प्रदर्शन थोड़ा कमजोर रहा है। यह यूपी योद्धाज़के लिए चिंता का विषय हो सकता है।

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