लखनऊ। प्रदेश के कारागार मंत्री दारा सिंह चौहान ने मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. सम्पूर्णानन्द कारागार प्रशिक्षण संस्थान, लखनऊ में प्रशिक्षु डिप्टी जेलर (121वाँ सत्र) एवं उत्तर प्रदेश तथा उत्तराखण्ड के प्रशिक्षु जेल वार्डर (178वाँ सत्र) की दीक्षांत परेड में प्रतिभाग किया।

इस अवसर पर आयोजित समारोह में कुल 119 प्रशिक्षुओं ने भाग लिया, जिसमें 4 अधिकारी संवर्ग (उत्तर प्रदेश) तथा 115 जेल वार्डर शामिल रहे। इनमें 74 उत्तर प्रदेश एवं 41 उत्तराखण्ड के प्रशिक्षु सम्मिलित थे।
दीक्षांत समारोह में अधिकारी संवर्ग में सर्वश्रेष्ठ प्रशिक्षार्थी का पुरस्कार शशिकांत (डिप्टी जेलर, उत्तर प्रदेश) को प्रदान किया गया, जबकि जेल वार्डर संवर्ग में सर्वश्रेष्ठ प्रशिक्षार्थी का पुरस्कार सुश्री कविता जलाल (टिहरी गढ़वाल, उत्तराखण्ड) को दिया गया।
इस अवसर पर अपने संबोधन में कारागार मंत्री दारा सिंह चौहान ने प्रशिक्षुओं को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि दीक्षांत परेड केवल प्रशिक्षण की समाप्ति नहीं, बल्कि नई जिम्मेदारियों और कर्तव्यों की शुरुआत है।
उन्होंने कहा कि कारागार विभाग केवल सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि सुधार और पुनर्वास की महत्वपूर्ण भूमिका भी निभाता है। इसलिए अधिकारियों एवं कर्मचारियों को अपने दायित्वों का निर्वहन संवेदनशीलता, अनुशासन और मानवीय दृष्टिकोण के साथ करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण के दौरान प्राप्त अनुशासन, कार्यकुशलता, नेतृत्व क्षमता और टीम भावना भविष्य में उनके कार्य निष्पादन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। मंत्री ने महिला प्रशिक्षुओं के उत्कृष्ट प्रदर्शन की सराहना करते हुए कहा कि महिलाएं हर क्षेत्र में अपनी क्षमता का उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रही हैं।
कारागार मंत्री ने महानिदेशक कारागार पी.सी. मीना, प्रशिक्षण संस्थान के निदेशक डॉ. रामधनी एवं समस्त प्रशिक्षकों को धन्यवाद देते हुए कहा कि उनके मार्गदर्शन और परिश्रम से प्रशिक्षु सक्षम एवं योग्य बन पाए हैं।
कार्यक्रम में महानिदेशक कारागार पीसी मीना ने जानकारी दी कि संस्थान की स्थापना 1 अगस्त 1940 में हुई थी और यह एशिया का पहला जेल प्रशिक्षण संस्थान है। अब तक यहां 1736 अधिकारियों एवं 13,391 जेल वार्डरों को प्रशिक्षण प्रदान किया जा चुका है, जबकि 1287 अधिकारियों एवं कार्मिकों को रिफ्रेशर कोर्स के माध्यम से प्रशिक्षित किया गया है।
इस अवसर पर यह भी बताया गया कि राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय के साथ हुए समझौते के तहत उत्तर प्रदेश के प्रशिक्षुओं को करेक्शनल सर्विसेज में स्नातकोत्तर डिप्लोमा एवं प्रमाणपत्र भी प्रदान किए जा रहे हैं, जो विभाग के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
इस अवसर पर अपर महानिरीक्षक कारागार धर्मेंद्र सिंह, पुलिस उपमहानिरीक्षक कारागार एस.सी. शाक्य व प्रदीप गुप्ता, उपमहानिरीक्षक कारागार शैलेन्द्र कुमार मैत्रेय, वरिष्ठ जेल अधीक्षक रंग बहादुर पटेल एवं शशिकांत सिंह, वित्त एवं लेखा अधिकारी शशिकला वर्मा, मंजरी चन्द्रा, निदेशक राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय , लखनऊ उपस्थित रहे।











