लखनऊ: बीकेटी स्थित एसआर ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशन में अल्बर्ट आइंस्टीन की जयंती पर आज एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया जिसमें एसआर ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशन्स के चेयरमैन एवं उत्तर प्रदेश विधान परिषद सदस्य पवन सिंह चौहान ने प्रांगण में मौजूद सभी सम्मानित वैज्ञानिकों को सम्मानित किया।
इस अवसर पर उन्होंने कहा कि समाज और राष्ट्र की प्रगति में वैज्ञानिकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। वैज्ञानिकों के शोध और विज्ञान को जनसाधारण तक पहुँचाने के प्रयासों से ही वैज्ञानिक सोच को समाज में मजबूती मिलती है।
एसआर इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड टेक्नोलॉजी के निदेशक डॉ.डीपी सिंह ने बताया कि इन पुरस्कारों के लिए चयन विशेषज्ञों की समिति द्वारा शहर के प्रमुख वैज्ञानिक संस्थानों में कार्यरत वैज्ञानिकों और विज्ञान संप्रेषकों में से किया गया।
उन्होंने कहा कि इन सम्मानों का उद्देश्य विज्ञान अनुसंधान, विज्ञान लेखन और विज्ञान के लोकप्रिय प्रसार में उत्कृष्ट योगदान देने वाले व्यक्तित्वों को प्रोत्साहित करना है।
विज्ञान प्रसार गौरव पुरस्कार–2026 के तहत डॉ. प्रदीप श्रीवास्तव (पूर्व वैज्ञानिक, सीएसआईआर–सीडीआरआई) को “Scientoons” के माध्यम से विज्ञान के लोकप्रिय प्रसार के लिए, पंकज प्रसून (सीएसआईआर–सीडीआरआई) को विज्ञान कविता और “Scientainment” के जरिए वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देने के लिए,
डॉ. दीपक कोहली (वरिष्ठ विज्ञान लेखक एवं विशेष सचिव, लोक निर्माण विभाग) को विज्ञान लेखन के माध्यम से वैज्ञानिक ज्ञान के प्रसार के लिए तथा डॉ. निमिष कपूर (वैज्ञानिक-बी, बीरबल साहनी इंस्टीट्यूट ऑफ पेलियोसाइंसेस) को विज्ञान संचार में योगदान के लिए सम्मानित किया गया।
वहीं अनुसंधान गौरव पुरस्कार–2026 के तहत डॉ. रजनीश चतुर्वेदी (सीएसआईआर–आईआईटीआर) को पार्किंसन रोग पर शोध, डॉ. पूनम वर्मा (बिरबल साहनी इंस्टीट्यूट ऑफ पेलियोसाइंसेस) को पेलियोसाइंस में शोध, डॉ. संजीव के. ओझा (सीएसआईआर–एनबीआरआई) को टाइप-2 मधुमेह के उपचार हेतु विकसित औषधि BGR-34 के विकास में योगदान,
डॉ. रितु त्रिवेदी (सीएसआईआर–सीडीआरआई) को ऑस्टियोपोरोसिस एवं ऑस्टियोआर्थराइटिस पर शोध तथा डॉ. संजय कुमार (सीएसआईआर–सीमैप) को “सीएसआईआर अरोमा मिशन” के माध्यम से किसानों और ग्रामीण विकास को बढ़ावा देने के लिए सम्मानित किया गया।
संस्थान के अनुसार, इन पुरस्कारों का उद्देश्य युवाओं और शोधार्थियों को विज्ञान अनुसंधान तथा विज्ञान संप्रेषण के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करना है। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में वैज्ञानिक, शिक्षाविद, शोधार्थी और विद्यार्थी उपस्थित रहे।
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