नई दिल्ली : भारत पहली बार स्पेशल ओलंपिक्स एशिया पैसिफिक बोचे और बॉलिंग प्रतियोगिता की मेजबानी करेगा। इसकी शुरुआत थ्यागराज स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में कल से होगी।
यह अनूठा आयोजन उन 22 वर्ष और उससे अधिक आयु के विशेष एथलीट्स को सशक्त बनाने के उद्देश्य से किया जा रहा है, जिनमें बौद्धिक और विकासात्मक अक्षमताएं (आईडीडी ) हैं।
यह भारत में पहली बार है कि बॉलिंग को प्रतिस्पर्धात्मक खेल के रूप में शामिल किया गया है। यह चार दिवसीय प्रतियोगिता 19 से 22 नवंबर तक चलेगी, जिसमें 12 देशों के विशेष एथलीट्स बोचे और बॉलिंग में शीर्ष स्थान के लिए प्रतिस्पर्धा करेंगे।
भारत के उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ करेंगे उद्घाटन
उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ मुख्य अतिथि के रूप में इस भव्य कार्यक्रम का उद्घाटन करेंगे। उनके साथ विशिष्ट अतिथि, भारत सरकार के युवा मामले और खेल एवं श्रम और रोजगार मंत्रालय के मंत्री, डॉ. मनसुख एल. मांडविया; सांसद नवीन जिंदल और उत्तर प्रदेश सरकार में सामाजिक कल्याण एवं अनुसूचित जाति/जनजाति कल्याण के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), असीम अरुण भी कार्यक्रम में उपस्थित रहेंगे।
उद्घाटन समारोह में भारत की सांस्कृतिक विविधता की झलक दिखाई जाएगी, जिसमें विभिन्न परंपराओं के प्रदर्शन के साथ भाग लेने वाले देशों की औपचारिक मार्च-पास्ट भी शामिल होगी।
प्रतियोगिता में हिस्सा लेने वाले देशों में एसओ ऑस्ट्रेलिया, एसओ बांग्लादेश, एसओ भारत, एसओ हांगकांग, एसओ इंडोनेशिया, एसओ मकाऊ, एसओ मलेशिया, एसओ म्यांमार, एसओ फिलीपींस, एसओ सिंगापुर, एसओ थाईलैंड और एसओ उज्बेकिस्तान शामिल हैं।
कुल 81 विशेष एथलीट इस आयोजन में प्रतिस्पर्धा करेंगे, जिन्हें विभिन्न टीमों के 43 कोचों द्वारा सहायता प्रदान की जाएगी। इनमें 2023 में बर्लिन में आयोजित स्पेशल ओलंपिक्स वर्ल्ड समर गेम्स के कई पदक विजेता भी शामिल हैं।
इस आयोजन से पहले एसओ भारत की अध्यक्ष डॉ. मल्लिका नड्डा ने कहा, “हम पहली बार इस ऐतिहासिक प्रतियोगिता की मेजबानी करके गर्व महसूस कर रहे हैं। यह आयोजन खेलों के माध्यम से बौद्धिक अक्षमताओं वाले व्यक्तियों को सशक्त बनाने के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
यह समावेश, एकता और सच्ची खेल भावना की ताकत का प्रमाण है। जैसे-जैसे हम अपने एथलीट्स की असाधारण प्रतिभाओं का जश्न मनाते हैं, हम कई और लोगों को प्रेरित करने और एक अधिक समावेशी समाज के निर्माण का मार्ग प्रशस्त करने की आशा करते हैं।”
बोचे और बॉलिंग खेल बौद्धिक अक्षमताओं वाले वृद्ध व्यक्तियों (पीडब्ल्यूआईडी) के लिए विशेष रूप से उपयुक्त हैं, विशेषकर उनके लिए जिनकी गतिशीलता सीमित है। ये खेल कम प्रभाव वाले शारीरिक गतिविधि को प्रतिस्पर्धात्मक कौशल और सटीकता के साथ जोड़ते हैं।
ये भी पढ़ें : रन फॉर इन्क्लूजन : भारत एशिया पैसिफिक बॉची और बॉलिंग के लिए तैयार
ये भी पढ़ें : नई दिल्ली में होगी स्पेशल ओलंपिक्स एशिया पैसिफिक बोचे एवं बॉलिंग प्रतियोगिता
स्पेशल ओलंपिक्स की समावेशिता की भावना को ध्यान में रखते हुए, इस प्रतियोगिता में ऐसे नियम और उपकरण शामिल किए गए हैं जो शारीरिक सीमाओं वाले एथलीट्स को ध्यान में रखते हुए संशोधित किए गए हैं, जैसे रैंप का उपयोग। यह व्यवस्था खेलों को अधिक सुलभ बनाती है और व्यापक भागीदारी को बढ़ावा देती है।
प्रतियोगिता के समानांतर, आज स्पेशल ओलंपिक्स एशिया पैसिफिक समावेशी स्वास्थ्य शिखर सम्मेलन का आयोजन किया गया, जिसमें भारत में (पीडब्ल्यूआईडी) के लिए स्वास्थ्य समानता को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया। यह सम्मेलन रोज़मेरी कोलैबरेटरी का हिस्सा है, जो एक स्वास्थ्य वकालत पहल है, जिसका उद्देश्य अनुसंधान, नीति और अभ्यास के माध्यम से स्थायी स्वास्थ्य प्रणाली में बदलाव स्थापित करना है।
प्रतियोगिता के दौरान हेल्दी एथलीट्स प्रोग्राम के तहत स्वास्थ्य जांच की जाएगी, जिसमें स्वास्थ्य समस्याओं का पता लगाने और आवश्यक सेवाएं प्रदान करने पर ध्यान दिया जाएगा। सात स्वास्थ्य विषयों, जैसे फिट फीट, हेल्थ प्रमोशन, स्ट्रॉन्ग माइंड्स, और स्पेशल स्माइल्स के तहत 400से अधिक एथलीट्स की जांच की जाएगी, जिससे उनके समग्र स्वास्थ्य को बढ़ावा मिलेगा।