होली पर आध्यात्मिक संगोष्ठी, दिया ‘ब्रह्म सत्यं जगन्मिथ्या’ का संदेश

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लखनऊ। ईश्वरीय स्वप्नाशीष सेवा समिति की ओर से सनातन ध्वज वाहिका सपना गोयल की अगुआई में शनिवार 28 फरवरी को चिनहट के रजत डिग्री कॉलेज के सामने स्थित भव्य सनातन धाम लॉन परिसर में, होली के पावन अवसर पर मासिक आध्यात्मिक संगोष्ठी का आयोजन किया गया।

इसमें सनातन ध्वजवाहिका सपना गोयल ने संदेश दिया कि ब्रह्म ही एकमात्र परम सत्य है, और यह जगत मिथ्या है। इस अवसर पर गुझियों का भी वितरण किया गया।

फाग माह के अवसर पर आयोजित आध्यात्मिक मासिक संगोष्ठी में बांटी गई गुझिया

 

सपना गोयल के अनुसार होली का त्योहार ईश्वरीय शक्ति का साक्षात उदाहरण है। यह मनुष्य की पूजा का ही फल है कि वह भक्ति में लीन हो जाता है। होली का पर्व हमें बताता है कि भक्त प्रह्लाद ने केवल पांच साल की अल्पायु में ही पूरे समाज को “ब्रह्म सत्यं जगन्मिथ्या” का संदेश दे दिया था।

फाल्गुन का माह हमें यह संदेश भी देता है कि परमशक्ति द्वारा जो पावन आत्माएं भेजी जाती हैं, जरूरी नहीं कि वे देवताओं के घर में ही जन्म लें, वे असुरों के परिवार में भी जन्म लेकर उनका भी उद्धार कर सकती हैं।

इसलिए होली जैसे आध्यात्मिक पर्व का यही संदेश है कि सत्य ही सर्वोच्च शक्ति है। प्रेम से ही सभी तरह के विकास संभव हैं। विश्वास और आस्था में ही ईश्वर है।

कण-कण में विधाता विराजमान हैं। होली का त्योहार, नकारात्मकता, अहंकार के अंत और सच्ची भक्ति का प्रतीक है। सच्चे भक्त के समक्ष चाहे कितनी भी कठिनाइयां आएं पर वह कभी भी सत्य मार्ग से नहीं डिगता है। भक्त प्रहलाद ने कितने ही अत्याचार सहे पर अपनी भक्ति नहीं छोड़ी।

उन्होंने बताया कि प्रकृति में सूर्य, चन्द्रमा, पेड़ और नदी की तरह मानव को भी अपने-अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से पालन करना चाहिए। हमारे पर्व और हमारे त्योहार हमेशा सन्मार्ग की राह दिखाते हैं। भारत वर्ष की भूमि आध्यात्मिक पावन भूमि है।

चित्रकूट में 10 मार्च को मातृशक्तियों द्वारा किया जाएगा सामूहिक सुंदरकांड का पाठ

इसके महत्व को हर आत्मा को समझना चाहिए। उन्होंने यह भी बताया कि सुंदरकांड, मन के विकारों को दूर करता है। मन के विकार जब छटते हैं तभी हम सत्य को समझ पाते हैं और उस पर चलते हुए धार्मिक बन सकते हैं।

सपना गोयल के अनुसार आगामी 10 मार्च 2026 को चित्रकूट पावन तीर्थ परिसर में सैकड़ों मातृशक्तियों द्वारा सामूहिक सुंदरकांड का पाठ किया जाएगा।

यह वहीं पावन तीर्थ भूमि है जहां चौदह वर्ष के वनवास काल में ग्यारह वर्षों तक भगवान राम, उनकी पत्नी देवी सीता और अनुज लक्ष्मण ने निवास किया था। इसके साथ ही यह ऋषि अत्री और सती अनसूया के मिलन की पावन भूमि भी है।

इसे ब्रह्मा, विष्णु और महेश के अवतारों का निवास होने का श्रेय भी दिया जाता है। भगवान श्री राम के चरण स्पर्श से पवित्र चित्रकूट तीर्थ में महाकाव्य श्री रामचरित मानस के रचयिता गोस्वामी तुलसीदास ने अपने जीवन के कई वर्ष व्यतीत किये थे।

इस संगोष्ठी में सपना गोयल के मार्गदर्शन में धर्मार्थ सेवा कार्य कर रहीं किरन सिंह, प्रीति चतुर्वेदी, बीना नौटियाल, ममता तिवारी, लिपिका रानी सिंह, सरिता रावत, मीना भार्गव, सैव्य पांडे, ममता रावत, विमला देवी, संतोष द्वेदी, रत्ना, रूबी सिंह, इंदु सिंह, सरिता बलानी, रीता शुक्ला सहित अन्य उपस्थित रही।

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