लखनऊ: उत्तर प्रदेश स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ़ फॉरेंसिक साइंस लखनऊ में दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय कार्यशाला का शुभारम्भ किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि संजय प्रसाद आईएएस अपर मुख्य सचिव मुख्यमंत्री एवं गृह विभाग उत्तर प्रदेश थे। जिन्होंने दीप प्रज्जवलित कर कार्यकम्र का शुभारम्भ किया।
इस अवसर पर संस्थान के संस्थापक निदेशक डॉ.जीके गोस्वामी ने मंचासीन मुख्य अतिथि संजय प्रसाद तथा विशिष्ठ अतिथि डॉ.हरिओम आईएएस, पंधारी यादव आईएएस तथा आईआईएम के निदेशक डॉ.एमपी गुप्ता को अंगवस्त्रम तथा स्मृति चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया।
यूपीएसआईएफएस में अंतर्राष्ट्रीय कार्यशाला का आगाज़, ‘सिनर्जी’ जिम व ‘दक्ष’ सेंटर का उद्घाटन
इस अवसर पर मुख्य अतिथि संजय प्रसाद ने संस्थान में छात्र छात्राओं के शारीरिक स्वास्थ्य के विकास हेतु संस्थान में नव निर्मित जिम ‘‘सिनर्जी’’ तथा छात्र-छात्राओं के व्यवसायिक दक्षता को बढावा प्रदान करने के लिए इनोवेशन एन्ड इनक्यूवेशन सेन्टर ‘‘दक्ष’’ का उद्घाटन किया।
इस अवसर पर मुख्य अतिथि संजय प्रसाद ने कहा कि प्रदेश में फॉरेंसिक जाँच हेतु लैबों की व्यवस्था पहले अच्छी नहीं होने के कारण जटिल मामले में रिपोर्ट तैयार होने में काफी समय लग जाते थे.
तब केवल लखनऊ और आगरा में ही दो प्रयोगशालाएं थीं, आज मुख्यमंत्री के नेतृत्व और भारत सरकार के सहयोग से प्रत्येक मंडल मुख्यालय पर अत्याधुनिक फॉरेंसिक लैब स्थापित की जा चुकी हैं,
जिनमें से अधिकांश पूर्ण रूप से क्रियाशील हैं और डीएनए परीक्षण सहित सभी आवश्यक विभाग एक ही परिसर में उपलब्ध हैं, जिससे सैंपल को कहीं और भेजने की आवश्यकता नहीं रह गई है।
उन्होंने कहा कि “हम न्याय व्यवस्था को डिजिटल और लगभग पेपरलेस बनाने की दिशा में अग्रसर हैं, जहाँ पुलिस स्टेशन, जेल, अस्पताल और फॉरेंसिक लैब आपस में इलेक्ट्रॉनिक रूप से जुड़े हैं और रिपोर्टिंग ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर की जा रही है।
इसके साथ प्रत्येक जिले में साइबर थाना और साइबर हेल्प डेस्क स्थापित कर एआई आधारित अपराधों—जैसे फिशिंग, डीपफेक वीडियो, वॉयस क्लोनिंग और डिजिटल वित्तीय धोखाधड़ी से निपटने के लिए विशेष प्रशिक्षित टीमें गठित की हैं|
मुख्य अतिथि प्रसाद ने यह भी कहा कि “आज की चुनौती एआई बनाम एआई की है, और प्रदेश इस चुनौती का सामना आधुनिक तकनीक, प्रशिक्षित मानव संसाधन और मजबूत कानूनी ढाँचे के साथ कर रहा है|
उन्होंने कहा कि साइबर फ्रॉड के मामलों में सैकड़ों करोड़ रुपये की रिकवरी कर राज्य ने यह सिद्ध कर दिया है कि वैज्ञानिक जांच, डिजिटल एकीकरण और त्वरित कार्रवाई के माध्यम से न्याय व्यवस्था में वास्तविक और संरचनात्मक परिवर्तन संभव है। ।
इस अवसर पर डॉ जीके गोस्वामी ने कहा कि मुख्य अतिथि की उपस्थिति में आयोजित इस कार्यशाला में संस्थान की ढाई वर्ष की उपलब्धियाँ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के “जीरो टॉलरेंस अगेंस्ट क्राइम” विजन का परिणाम हैं।
उन्होंने कहा, “यात्रा लंबी है, पर हमारा संकल्प है कि इस संस्थान को वैश्विक पहचान दिलाएँ। उन्होंने संस्थान में चल रहे कोर्स के बारे में विस्तृत जानकारी भी दी।
इस अवसर पर विशिष्ठ अतिथि डॉ.हरिओम आईएएस ने कहा कि साइबर सिक्योरिटी और फॉरेंसिक जैसे क्षेत्रों में मजबूत वर्कफोर्स तैयार करने के लिए सरकारी संस्थान और उद्योग को साथ आना होगा।
उन्होंने जोर दिया कि तकनीकी कौशल के साथ एथिक्स और उद्यमिता भी जरूरी हैं। अन्त में उन्होंने कहा कि सही स्किलिंग से उत्तर प्रदेश और भारत वैश्विक शक्ति बन सकते हैं।
विशिष्ठ अतिथि पंधारी यादव आईएएस ने कहा कि यूपीएसआईएफएस में 2020 के बाद शुरू हुए विभिन्न कोर्सों में अब 500 से अधिक एडमिशन हो चुके हैं और मेधावी छात्रों को अलग-अलग माध्यमों से अवसर मिल रहे हैं जिसके लिए जीके गोस्वामी और उनकी टीम को बधाई दी गई।
उन्होंने जोर दिया किआई का सही उपयोग कर हम सुरक्षा तंत्र एवं फॉरेंसिक और रिसर्च को मजबूत बनाकर देश की प्रगति को नई दिशा दे सकते हैं।
कार्यक्रम में अतिथि वक्ता “डिजिटल सुरक्षा: प्रमुख बिंदु” पैनल में आईआईएम लखनऊ के निदेशक प्रो.एमपी गुप्ता, आईआईआईटी लखनऊ के निदेशक प्रो. अरुण मोहन शैरी तथा आरएमएलएनएलयू लखनऊ के कुलपति प्रो. (डॉ.) अमर पाल सिंह ने एआई, साइबर सुरक्षा और कानूनी अनुपालन के समन्वय पर जोर दिया
ब्रविटी डिजिटल इंक, यूएसए के संस्थापक एवं सीईओ पवन शर्मा ने एआई, साइबर सुरक्षा और विधिक अनुपालन जैसे समसामयिक विषयों पर अपने विचार रखे।
डॉ.निखिल जोशी (को-फाउंडर एवं निदेशक, लाइफ फाउंडेशन, मुंबई) ने राष्ट्रीय संप्रभुता के पुनर्परिभाषण में एआई की भूमिका पर बल दिया, जबकि प्रो. (डॉ.) अविनाश दाधीच ने विधिक रूप से अनुपालनशील एआई फ्रेमवर्क की आवश्यकता रेखांकित की।
प्रो. अमित कपूर (स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय) ने प्रतिस्पर्धात्मकता पर एआई के प्रभाव को महत्वपूर्ण बताया। नेहा जैन, आईएएस (यूपीडेस्को, लखनऊ) ने एआई और साइबर सुरक्षा में सरकार की पहल पर प्रकाश डाला।
साइबर सुरक्षा एवं विधिक अनुपालन पर आयोजित पैनल में किरण एस, आईपीएस), डॉ. निखिल जोशी और कर्नल (डॉ.) प्रवीण कुमार सिंह ने उभरते खतरों पर चर्चा की।
इसके अतिरिक्त हरीश सती (Zscaler) ने ज़ीरो ट्रस्ट साइबर सिक्योरिटी आर्किटेक्चर तथा मनप्रीत आनंद (कंट्री हेड–इंडिया, EC-Council) ने एआई युग में रोजगार योग्यता बढ़ाने पर जोर दिया। इस अवसर पर अपर निदेशक राजीव मल्होत्रा ने सभागार में उपस्थित समस्त अधिकारियों का अभार प्रकट किया।
इस अवसर पर आईजी राजीव मल्होत्रा डीआईजी हेमराज मीना, उप निदेशक जितेन्द्र श्रीवास्तव, चिरंजीव सिन्हा, अतुल यादव, पीआरओ संतोष तिवारी, डॉ.मनीष राय, गिरिजेश राय,
डॉ पलक, डॉ हबीब-उर- रहमान, डॉ शश्या मिश्र, डॉ मीमांशा जैशल, डॉ आशुतोष पाण्डेय, डॉ प्रीती मालिक, डॉ नेहा सिंह उप निरीक्षक शैलेन्द्र सिंह एवं कार्तिकेय सहित अन्य उपस्थित रहे।
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