लोकशैली में सजी ‘धनुष भंग – रामलीला’, दर्शकों ने खूब सराहा मंचन

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लखनऊ। सवेरा फाउंडेशन की ओर से पारम्परिक लोकनाट्य ‘धनुष भंग – रामलीला’ का मंचन 29 दिसम्बर 2025 को अंतरराष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान, गोमतीनगर सभागार में हुआ। प्रभावपूर्ण प्रस्तुति को दर्शकों का भरपूर स्नेह मिला।

यह नाट्य प्रस्तुति रामलीला के प्रसिद्ध प्रसंग धनुष भंग पर आधारित थी। कथा की शुरुआत मारीच के दरबार से हुई, जहाँ से राक्षसों द्वारा विश्वामित्र के आश्रम में उपद्रव का प्रसंग सामने आया। इसके बाद विश्वामित्र का अयोध्या पहुँचना और राजा दशरथ से राम व लक्ष्मण को आश्रम की रक्षा के लिए ले जाना दिखाया गया।

राम-लक्ष्मण द्वारा राक्षसों का वध और आश्रम की रक्षा के बाद कथा मिथिला पहुँचती है, जहाँ सीता स्वयंवर और धनुष भंग का भव्य दृश्य प्रस्तुत किया गया। धनुष भंग के बाद परशुराम का आगमन, लक्ष्मण से संवाद और अंत में श्रीराम द्वारा परशुराम के क्रोध को शांत करने का दृश्य दर्शकों के लिए विशेष आकर्षण रहा।

पूरी प्रस्तुति में संवाद सरल और लोकशैली में रहे, जिससे ग्रामीण रामलीला की परम्परा स्पष्ट रूप से झलकी। हास्य और भावों से भरे छोटे-छोटे दृश्य भी बीच-बीच में जोड़े गए, जिनसे मंचन और रोचक बन गया।

राम की भूमिका में अक्षत ऋषि, लक्ष्मण के रूप में ओमकार पुष्कर और सीता की भूमिका में रिमझिम वर्मा ने सशक्त अभिनय किया। रावण के रूप में संजय शर्मा और परशुराम की भूमिका में संजय त्रिपाठी प्रभावशाली रहे।

विश्वामित्र की भूमिका नीरज शब्द ने निभाई। संगीत पक्ष में हारमोनियम पर अमित कश्यप और ढोलक पर राजेन्द्र गौड़ ने प्रस्तुति को प्रभावी बनाया।

नाट्य मंचन का निर्देशन संजय त्रिपाठी और श्रीपाल गौड़ ने किया। संवाद लेखक श्रद्धेय रामकुमार त्रिपाठी ‘निर्द्वंद’ रहे। दर्शकों ने तालियों के साथ कलाकारों का उत्साह बढ़ाया और इस लोकनाट्य प्रस्तुति की सराहना की।

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