“ये आदमी ये चूहे” नाटक में दिखा खानाबदोश मजदूरों का दर्द

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लखनऊ। आर्ट्स एंड कल्चरल सोसाइटी की ओर से “ये आदमी ये चूहे” का मंचन बुधवार को राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय की विस्तार योजनाओं से बीते बीस वर्षों से जुड़े वरिष्ठ रंगकर्मी सुदीप चक्रवर्ती के निर्देशन में गोमती नगर में संगीत नाटक अकादमी के वाल्मीकि रंगशाला में सशक्त रूप में किया गया।

वरिष्ठ रंगकर्मी सुदीप चक्रवर्ती के निर्देशन में वाल्मीकि रंगशाला में मंचन

जॉन स्टीनबैक के विश्व प्रसिद्ध उपन्यास “ऑफ माइस एंड मेन” पर आधारित इस नाटक ने खानाबदोश मजदूरों के दर्द को सशक्त रूप में मंच पर पेश किया। “ये आदमी ये चूहे” नाटक के कथानक के अनुसार दो खानाबदोश भूमिहीन मजदूर रोजगार की तलाश में जगह जगह भटकते रहते हैं।

नाटक में बुद्धिमान और चतुर जग्गू, मजबूत और बड़े डील डौलवाले पर मानसिक रूप से अविकसित और असहाय लोरी का हर संकट में मदद करता है। नाटक में बिम्बों का भी बेहतरीन प्रदर्शन किया गया। इसमें इंसान और पशु के बीच लगाव और इंसानियत और पशुता की धुंधली सीमा रेखा को भी नाटकीय प्रसंगों के साथ पेश किया गया।

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इसके माध्यम से लोगों में मानवता और करुणा का भाव जागृत किया गया। इस नाटक में अधिकांश कलाकार पहली बार मंच पर अभिनय किया। मंच पर जग्गू का किरदार दिव्यांशु और लोरी का विक्रम कात्याल ने प्रभावी रूप से पेश कर दर्शकों की तालियां बटोरी।

बॉबी की पत्नी के किरदार में मयूरी द्विवेदी का अभिनय उल्लेखनीय रहा। इस क्रम में खेमू का चरित्र धमेन्द्र कुमार, मालिक का राजनाथ सरोज, बॉबी का बृजेश यादव, सुलेमान का विवेक रंजन सिंह, कैलाश का विकास कुमार, बाबू का अनुज, हीरा का सुब्रत राय ने बखूबी अदा कर नाटक को गति प्रदान की।

इसमें प्रकाश परिकल्पना का दायित्व शुभम गौतम और संगीत संचालन का शशांक मिश्रा ने सराहनीय रूप से निभाया। मंच सामग्री की व्यवस्था विकास, दिव्यांश, धर्मेन्द्र, अनुज, राजनाथ ने की जबकि वेशभूषा और मुख सज्जा मयूरी, कल्पना, निशा तिवारी की रही। मंच प्रबंधन सुब्रत राय, विकास, अनुज धर्मेंद ने किया। अंग्रेजी नॉवेल का हिन्दी रूपांतरण वीरेन्द्र सक्सेना और प्रोफेसर देवेन्द्र राज अंकुर ने किया है।

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