लखनऊ के अटल बिहारी वाजपेयी इकाना स्टेडियम में हो रहा रणजी ट्रॉफी मैच उत्तर प्रदेश क्रिकेट के लिए सिर्फ एक हार नहीं, बल्कि एक गहरे आत्ममंथन की चेतावनी बनता दिख रहा है।
घरेलू मैदान पर झारखंड के खिलाफ यूपी टीम जिस तरह बिखरी है, उसने न सिर्फ टीम की तकनीकी कमजोरियों को उजागर किया है, बल्कि मानसिक मजबूती और रणनीतिक तैयारी पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
चौथे और अंतिम दिन से पहले हालात पूरी तरह मेजबान टीम के खिलाफ जा चुके हैं। झारखंड को बोनस अंक के साथ जीत के लिए केवल तीन विकेट की जरूरत है, जबकि यूपी को पारी की हार टालने के लिए अब भी 316 रन बनाने होंगे—जो मौजूदा परिस्थितियों में किसी चमत्कार से कम नहीं लगता।

यदि कोई असाधारण घटना या प्राकृतिक आपदा नहीं होती, तो यूपी की घरेलू सरजमीं पर यह हार लगभग तय मानी जा रही है। एलीट ग्रुप-A के इस मुकाबले में सबसे बड़ा अंतर दोनों टीमों की गेंदबाज़ी और बल्लेबाज़ी की गुणवत्ता में नजर आया।
झारखंड के सीम गेंदबाज़ों ने पिच का जिस तरह इस्तेमाल किया, वह रणजी स्तर की अनुशासित तेज़ गेंदबाज़ी का उदाहरण बन गया। मैच में अब तक गिरे 17 में से 16 विकेट तेज़ गेंदबाज़ों के नाम रहे—जो यूपी बल्लेबाज़ों की तकनीकी कमजोरी और आत्मविश्वास की कमी को साफ दर्शाता है।
फॉलोऑन के बाद दूसरी पारी में यूपी की हालत और खराब हो गई। तीसरे दिन स्टंप्स तक टीम 7 विकेट पर महज़ 69 रन ही बना सकी।
हालात ऐसे थे कि मुकाबले का फैसला तीसरे दिन ही हो सकता था, लेकिन माधव कौशिक और विप्रज निगम ने किसी तरह अंतिम साढ़े चार ओवर निकालकर दिन का खेल समाप्त कराया।
इससे पहले यूपी की पहली पारी 176 रन पर सिमट गई थी, जिसके चलते टीम को फॉलोऑन झेलना पड़ा। दूसरी पारी में तो स्थिति और भी चिंताजनक रही।
सलामी जोड़ी 10 गेंदों के भीतर ही 9 रन पर पवेलियन लौट गई। टॉप और मिडिल ऑर्डर पूरी तरह फ्लॉप रहा और महज़ 61 रन पर 7 विकेट गिर गए।
कप्तान आर्यन जुयाल एक बार फिर जिम्मेदारी नहीं निभा सके और 24 रन बनाकर आउट हो गए। शिवम मावी और शिवम शर्मा खाता तक नहीं खोल पाए। झारखंड की ओर से साहिल राज और जतिन पांडे ने दो-दो विकेट चटकाए, जबकि शुभम कुमार सिंह ने एक सफलता हासिल की।
जहां झारखंड के सीमर्स ने विकेट का पूरा फायदा उठाया, वहीं उसी पिच पर यूपी के तेज़ गेंदबाज़ पूरी तरह असरहीन नजर आए।
टॉस जीतकर पहले गेंदबाज़ी करने का फैसला सही था, लेकिन पहले दिन यूपी के सीमर्स दबाव बनाने में नाकाम रहे। शिवम मावी ने घास वाली पिच से मदद लेने की कोशिश जरूर की, पर वे भी कोई खास प्रभाव नहीं छोड़ सके।
झारखंड ने अपनी पहली पारी 561 रन पर 6 विकेट के नुकसान पर घोषित कर यूपी को पूरी तरह बैकफुट पर धकेल दिया। इस विशाल स्कोर ने मुकाबले की दिशा पहले ही तय कर दी थी।
यूपी की ओर से पहली पारी में सलामी बल्लेबाज़ अभिषेक गोस्वामी ही अकेले ऐसे खिलाड़ी रहे जिन्होंने संघर्ष का जज्बा दिखाया। उन्होंने 168 गेंदों में 85 रन की जुझारू पारी खेली, जिसमें एक छक्का और 13 चौके शामिल थे। वे आठवें विकेट के रूप में आउट हुए। उनके अलावा कोई भी बल्लेबाज़ क्रीज पर टिकने का साहस नहीं दिखा सका।
चोटिल प्रशांतवीर की जगह टीम में शामिल किए गए ऑलराउंडर शिवम शर्मा (24) को छोड़ दें, तो सिद्धार्थ यादव (14), प्रियम गर्ग (7), विप्रज निगम (9), शिवम मावी (10) और कार्तिक यादव (4) सभी असफल रहे।
झारखंड के लिए मीडियम पेसर शुभम कुमार सिंह ने 47 रन देकर 4 विकेट और जतिन पांडे ने 32 रन देकर 3 विकेट झटके। साहिल राज और सौरभ शेखर को एक-एक सफलता मिली, जबकि स्पिनर्स में अंकुल रॉय को एकमात्र विकेट मिला।
मैच के साथ-साथ यूपी टीम को भविष्य के लिहाज से भी बड़ा झटका लगा है। चोटिल प्रशांतवीर का विदर्भ के खिलाफ नागपुर में होने वाला अगला मैच खेलना मुश्किल माना जा रहा है। मेडिकल रिपोर्ट के मुताबिक उनकी चोट को ठीक होने में कम से कम तीन हफ्ते लग सकते हैं। दूसरे दिन लंच से पहले फील्डिंग के दौरान शरनदीप सिंह का शॉट रोकते समय उनके कंधे में चोट लगी थी।
नए बीसीसीआई नियम के तहत गंभीर चोट की स्थिति में मैच के दौरान रिप्लेसमेंट की अनुमति है, जिसके चलते शिवम शर्मा को प्लेइंग इलेवन में शामिल किया गया। वे पहले से टीम के 12वें खिलाड़ी थे। अंपायरों ने मेडिकल रिपोर्ट देखने के बाद रिप्लेसमेंट की इजाजत दी।












