सीमैप किसान मेला बना ‘त्रिवेणी संगम’, 4000 किसानों की भागीदारी

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सीएसआईआर-केन्द्रीय औषधीय एवं सगंध पौधा संस्थान (सीएसआईआर-सीमैप), लखनऊ स्थित कैम्पस में किसान मेले का आयोजन किया गया। किसान मेले के दूसरे दिन  किसान मेले में देश के विभिन्न राज्यों से आये लगभग 4000 किसानों ने भाग लिया। इस किसान मेले के अवसर पर सम्मानित अतिथियों द्वारा वृक्षारोपण किया गया।

किसान मेले के मुख्य समारोह में मुख्य अतिथि, डा. एन. कलैसेल्वी, महानिदेशक, सीएसआईआर एवं सचिव, डीएसआईआर, भारत सरकार ने अपने सम्बोधन मे कहा कि किसान मेला मे पधारे लखनऊ स्थित सीएसआईआर की प्रयोगशालाओं के निदेशक, अतिथियों एवं किसानों का स्वागत करते हुये सीएसआईआर-सीमैप द्वारा किए जा रहे कार्यों की सराहना की।

उन्होंने आगे कहा कि यह किसान मेला त्रिवेणी संगम की भांति लगता है क्योंकि यहाँ पर देश के सभी राज्यों के किसान, उद्योग के प्रतिनिधि एवं वैज्ञानिक एक साथ मिलते हैं और निदेशक, सीएसआईआर-सीमैप से आवाहन किया कि इस किसान मेले का नाम त्रिवेणी संगम कहना सही होगा।

उन्होंने कहा कि सीएसआईआर-सीमैप के वैज्ञानिको व किसानो के साथ मिलकर कार्य करने से एरोमा मिशन सफल हुआ। इस हेतु सीएसआईआर-सीमैप के साथ एरोमा मिशन जुड़ी दूसरी प्रयोगशालाओं को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान “राष्ट्रीय विज्ञान पुरस्कार 2025 (विज्ञान टीम पुरस्कार) प्राप्त हुआ।

महानिदेशक महोदया ने आगे कहा कि “एरोमा मिशन” के वजह से कई परिवार आज खुशहाली भरी जिंदगी जी रहे हैं। उन्होंने सीएसआईआर-सीमैप द्वारा किसानों के लिए किए जा रहे कार्यों की सराहना की। उन्होने यह भी आवाहन सीएसआईआर-सीमैप के नेतृत्व मे एक वेटिवर बोर्ड बनाया जाए जिससे किसानों को इसका लाभ मिल सके।

किसान मेला के अवसर पर विशिष्ठ अतिथि के रूप मे पधारे डा. अजीत कुमार शासनी, निदेशक, राष्ट्रीय वनस्पति अनुसंधान संस्थान (एनबीआरआई), लखनऊ ने अपने सम्बोधन में औषधीय एवं सगंध पौधों के उत्पादन में सीमैप के योगदान की प्रशंसा करते हुए कहाकि संस्थान किसानों की आय बढ़ाते हुए देश को मेन्था के उत्पादन और निर्यात में शीर्ष स्तर पहुंचा कर सराहनीय कार्य किया है।

सीमैप द्वारा विकसित मेन्था की किस्में किसानों में काफी लोकप्रिय हैं और इसकी उपज बढ़ाने में मददगार साबित हो सकी है। वर्षा आधारित क्षेत्रों में खेती की प्रणाली विकसित करने पर बल देते हुए आशा व्यक्त की कि नींबूघास, रोशाघास, पामारोजा, जिरेनियम जैसी सगंधीय फसलें कम पानी वाले अथवा सूखा प्रभावित क्षेत्रों में सफलता पूर्वक उगाई जा सकेंगी।

उन्होनें आगे कहा कि उचित फसल चक्र अपनाकर किसान खाद्यान्न और नकदी फसलें जिसमें औषधीय और सगंध पौधे भी सम्मिलित हैं, की खेती करें जिससे किसानों की आमदनी बढ़ेगी ।

इस अवसर पर विशिष्ठ अतिथि के रूप में पधारे डॉ. धीर सिंह, निदेशक, आईसीएआर-राष्ट्रीय डेरी अनुसंधान संस्थान, करनाल, हरियाणा ने किसान मेला मे पधारे अतिथियों एवं किसानों का स्वागत किया एवं अपने सम्बोधन मे सीएसआईआर-सीमैप की सराहना की।

इसके पूर्व सीमैप के निदेशक डॉ. प्रबोध कुमार त्रिवेदी ने किसान मेला मे पधारे अतिथियों एवं किसानों का स्वागत किया उन्होने स्वागत भाषण में कहा कि किसान मेले का आयोजन इस अवधारणा के साथ प्रारम्भ किया गया है कि सीमैप द्वारा विकसित उन्नत प्रजातियों, उन्नत कृषि एवं प्रसंस्करण तकनीकों को आम जनमानस तक पहुचाने का कार्य किया जा सके।

यह किसान मेला किसानों, वैज्ञानिकों एवं व्यापारियों के संगम की तरह है जहां पर सभी भविष्य की परियोजनाओं पर विचार करते हैं। इसका सीधा लाभ किसानों उद्यमियों को मिलता है।

निदेशक ने कहा कि सीएसआईआर-सीमैप पिछले 60 वर्षो से औषधीय एवं सगंध पौधों मे अनुसंधान एवं विकास कार्य करते हुए लगभग 150 से भी अधिक उन्नत प्रजातियों तथा उनकी कृषि तकनीकी, प्रसंस्करण तथा भंडारण विधियों एवं उन्नत आसवन इकाइयों का विकास किया है।

इन प्रजातियों की उन्नत कृषि तकनीकियों को देश के किसानों तक पहुंचाया जा चुका है। उन्होंने कहा कि इस किसान मेले का आयोजन किसानों एवं व्यापारियों के बीच एक कड़ी स्थापित करने का कार्य होता है, तथा किसानों को उद्योगों के प्रतिनिधियों के साथ संवाद करने का अवसर मिलता है।

डॉ. त्रिवेदी ने बताया कि सीमैप के द्वारा विकसित की गई मेन्था की प्रजातियों को किसानों द्वारा अपनाया गया फलस्वरूप भारत को मेन्था के उत्पादन और निर्यात में विश्व मे शीर्ष स्तर पर पहुँचा दिया है। आज विश्व का 80 प्रतिशत मेन्था का उत्पादन भारत में किया जाता है तथा भारत का 80 प्रतिशत मेन्था का उत्पादन केवल उत्तर प्रदेश में किया जाता है।

इस वर्ष लखनऊ मुख्यालय से लगभग 500 क्विंटल मेन्था की विभिन्न प्रजातियों की पौध सामग्री (शकर्स) अधिक उपज देने वाली किसानों को उपलब्ध कराई जा रही है। अन्त में डॉ. त्रिवेदी ने कहा कि देश को आत्म निर्भर बनाने के लिए सीमैप देश के किसानों के साथ मिलकर निरन्तर प्रयास करता रहेगा।

उन्होने कहा कि सीएसआईआर-सीमैप एवं सहयोगी प्रयोगशालाओं द्वारा एरोमा मिशन चलाया जा रहा है, इसके अंतर्गत 5000 से भी ज्यादा किसान क्लस्टर बनाए जा चुके हैं जिसमे 20 आदिवासी क्लस्टर शामिल हैं।

इस अलावा 400 उन्नत आसवन इकाइयों को किसानों के प्रक्षेत्रों पर उपलब्ध कराया गया है जिससे किसान तेल आसवित करते हैं। एरोमा मिशन के अंतर्गत ही 121 किसान उद्यमी बन चुके हैं। इससे पहले किसान मेला के संयोजक, डॉ. संजय कुमार ने किसान मेला के दौरान होने वाली गतिविधियों के बारे मे बताया एवं कार्यक्रम का संचालन किया।

इस अवसर पर मेले में किसानों के लिए एक परिचर्चा सत्र का भी आयोजन किया गया जिसका संचालन डॉ. संजय कुमार, डॉ. रमेश कुमार श्रीवास्तव, डॉ. राम सुरेश शर्मा, डॉ. ऋषिकेश भिसे और डॉ. अनिल कुमार सिंह ने किया। परिचर्चा मे वैज्ञानिक व उद्योगों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

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किसानों द्वारा पूछे गए प्रश्नों का उत्तर विषय विशेषज्ञों और वैज्ञानिकों द्वारा दिया गया। इस अवसर पर सम्मानित अतिथियों द्वारा औस-ज्ञान्या पुस्तक का विमोचन किया गया।

औस-ज्ञान्या किसानों के लिए एक उपयोगी पुस्तिका है, जिसे किसानों को औषधीय और सुगंधित फसलें अधिक बेहतर और लाभकारी तरीके से उगाने में मदद करने के लिए तैयार किया गया है। इसमें आर्थिक रूप से महत्त्वपूर्ण फसलों की खेती आसान भाषा मे दिया गया है। यह जानकारी सीएसआईआर-सीमैप के वैज्ञानिक अनुभव पर आधारित है।

यह पुस्तिका किसानों को सही खेती विधियों को अपनाकर पैदावार बढ़ाने, जोखिम कम करने और आय बढ़ाने में मदद करेगी।

इसके साथ ही अतिथियों द्वारा कॉफी टेबल बुक का भी विमोचन किया गया इस कॉफी टेबल बुक में एरोमा मिशन के अंतर्गत किसान से उद्यमी बने 121 लोगों की जानकारी दी गई है।

मुख्य अतिथि ने नवीनीकृत ‘सुगंध सन्देश सभागार’, पायलट प्लांट तथा ग्लास हाउस सुविधाओं का उद्घाटन किया, जिससे अनुसंधान, प्रशिक्षण एवं प्रौद्योगिकी प्रदर्शन की क्षमता में वृद्धि होगी।

इस किसान मेला कार्यक्रमों के अतिरिक्त एक विशेष प्रदर्शनी का भी आयोजन किया जा गया, जिसमें सीएसआईआर की प्रयोगशालाओं द्वारा किसानों के लिए उपयोगी प्रौद्योगिकियों तथा योजनाओं का प्रदर्शन किया गया। मेला स्थल पर उद्योगों और स्वयं-सेवी संस्थाओं तथा महिला सशक्तिकरण योजना आदि के स्टॉल भी लगाए गए।

पूजा के फूलों पर आधारित अगरबत्ती व कोन बनाने के प्रशिक्षण व प्रदर्शन में महिलाओं ने काफी उत्साह दिखाया। जिरेनियम की पौध सामग्री के निर्माण के लिए एक विकसित किफ़ायती तकनीक, सीमैप के हर्बल उत्पाद, अगेती मिन्ट टेक्नोलोजी, इत्यादि के बारे में भी चर्चा की गई व प्रदर्शनी लगाई गई।

आगंतुक किसानों और उद्यमियों को इस अवसर पर सीमैप द्वारा प्रकाशित स्मारिका ‘औस-ज्ञान्या’ पुस्तिका भी उपलब्ध कराई गई। किसानों ने मेले में भाग लेकर औषधीय व सगंध पौधों की लाभकारी खेती के बारे में जानकारी ली और अपने अनुभव भी साझा किये।

उधर वैज्ञानिकों की टीम ने किसानों को उन्नत खेती, क़िस्मों तथा प्रसंस्करण व विपणन की विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराई।

कार्यक्रम का संचालन डॉ. ऋषिकेश एन भिसे द्वारा किया गया एवं धन्यवाद ज्ञापन डॉ. रमेश कुमार श्रीवास्तव ने किया।इस अवसर पर सीएसआईआर-सीमैप के वैज्ञानिक, कर्मचारी, शोधार्थी एवं दूसरे विभागों के वैज्ञानिक, उद्योग के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

इसके साथ ही सम्मानित अतिथियों द्वारा निम्नलिखित प्रमुख वैज्ञानिक उपलब्धियों का लोकार्पण किया गया:

• डी-ऑयल्ड सगंध पौध अवशेषों को पशु आहार के रूप में उपयोग विषयक तकनीकी बुलेटिन (सीएसआईआर-सीमैप एवं ICAR–NDRI का संयुक्त प्रकाशन);
• सिट्रोनेला में लीथल येलोइंग रोग प्रबंधन (MLC) विषयक कृषि-प्रौद्योगिकी बुलेटिन;
• सिट्रोनेला की नवीन उन्नत किस्में CIM–हरितिमा एवं अकरकरा की CIM–नित्या प्रजाति का विमोचन किया गया।
• लेमनग्रास जीनोम, पोपी जीनोम तथा ceRNET 1.0 कम्प्यूटेशनल प्लेटफॉर्म का विमोचन।

औद्योगिक सहभागिता एवं प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के अंतर्गत:
• हनुमान गढ़ी, अयोध्या में चढ़ाए गए पुष्पों से अगरबत्ती निर्माण तकनीक का प्रौद्योगिकी हस्तांतरण;
• एरोक्लीन (रूम फ्रेशनर) तकनीक का एम/एस उद्वान, बेंगलुरु को हस्तांतरण;
• जैव-सक्रिय फफूंदनाशी फॉर्मूलेशन का एम/एस ग्रीन पावक बायोटेक प्रा. लि., लखनऊ को हस्तांतरण;
• CSIR-CIMAP ने मेघालय बेसिन विकास प्राधिकरण (MBDA) को प्रौद्योगिकी हस्तांतरित की ताकि राज्य में मिट्टी के स्वास्थ्य को बहाल किया जा सके और सतत खेती के तरीके को सहायता दी जा सके, विशेष रूप से अम्लीय खदान प्रभावित मिट्टी में।
• एम/एस टेरा सोल वेंचर्स प्रा. लि. के साथ सीआरएम (Certified Reference Materials) हेतु नॉन डिस्क्लोजर एग्रीमेंट का एक्सचेंज किया गया।
• इस अवसर पर CIM-बेलपत्र बॉडी लोशन एवं CIM फ्लोरा सोल उत्पादों का शुभारंभ भी किया गया।

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