संगीत के एक स्वर्णिम युग का अंत : सुरों की मल्लिका आशा भोसले का निधन

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साभार : गूगल

रविवार को लोकप्रिय गायिका आशा भोसले का ब्रीच कैंडी अस्पताल में निधन हो गया। उनकी उम्र 92 साल थी और पिछले कुछ दिनों से अस्वस्थता की वजह से उन्हें यहां भर्ती कराया गया था। ब्रीच कैंडी अस्पताल के डॉ. प्रतीत समदानी ने बोला कि कई अंगों के काम करना बंद कर देने की वजह उनका निधन हो गया।

उनके बेटे आनंद भोसले ने उनके निधन की पुष्टि की है उन्होेंने बताया कि भाेसले का पार्थिव शरीर लोगों के दर्शनार्थ कल सुबह 11 बजे उनके आवास पर रखा जायेगा और अपराह्न चार बजे शिवाजी पार्क में उनका अंतिम संस्कार किया जायेगा। भोसले को शनिवार शाम छाती में संक्रमण और कमजोरी की शिकायत के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

उनकी पोती जनाई भोसले ने जानकारी देते हुए बताया था कि, “मेरी दादी, आशा भोसले, बहुत कमजोरी और छाती में संक्रमण के चलते अस्पताल में भर्ती हैं। हम आपसे उनकी निजता का सम्मान बनाए रखने की अपील करते हैं।”

पद्म विभूषण और दादा साहब फाल्के से सम्मानित आशा भोसले 50, 60 और 70 के दशक के बॉलीवुड के संगीत के सुनहरे दौर की आखिरी जीवित हस्ती थीं। इस दौर में लता मंगेशकर, मोहम्मद रफ़ी, किशोर कुमार, मुकेश, मन्ना डे और खुद भोसले जैसी हस्तियां थीं।

वह अपनी सुरीली आवाज़ और बहुमुखी प्रतिभा के लिए मशहूर थीं। उन्होंने फ़िल्मी संगीत, पॉप, ग़ज़ल, भजन, पारंपरिक भारतीय शास्त्रीय संगीत, लोकगीत, क़व्वाली और रवींद्र संगीत जैसे कई अलग-अलग तरह के संगीत में अपनी कला का प्रदर्शन किया। उन्होंने 20 से ज़्यादा भारतीय और विदेशी भाषाओं में गाने गाए हैं।

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