लखनऊ: उत्तर प्रदेश स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ़ फॉरेंसिक साइंस लखनऊ में आज क्वांटम टेक्नोलॉजी पर स्टेज प्रेजेंटेशन आयोजित किया गया। जिसमें संस्थान के लॉ एवं बी-टेक एम-टेक के छात्र छात्राओं ने प्रतिभाग किया।
संस्थान क्वांटम कंप्यूटिंग की दिशा में अग्रणी : डॉ0 जी.के. गोस्वामी
इस आयोजन में छात्र छात्राओ के समूह द्वारा डिस्कवरी एवं क्वांटम कंप्यूटिंग के माध्यम से यातायात समस्या का समाधान विषय पर विषय विशेषज्ञों डॉ. पवन शर्मा एवं श्री हेराल्ड डी कोस्टा के समक्ष प्रेजेंटेशन प्रस्तुत किया गया.
इस अवसर पर विषय विशेषज्ञ डॉ पवन शर्मा (IT Expert USA) ने कहा कि संस्थान द्वारा जो बच्चों को तकनीकी माहौल दिया जा रहा है यह काबिले तारीफ है बच्चों ने टेक्नोलॉजी विषय पर अपनी अद्भुत पकड़ बनाई है आज के प्रेजेंटेशन में उनकी दक्षता प्रदर्शित हो रही हैl
इस अवसर पर संस्थापक निदेशक डॉ0 जी.के. गोस्वामी ने कहा कि इस तरह के कार्यक्रम आयोजन किये जाने से संस्थान के बच्चो का ज्ञान वर्धन होता है तथा बच्चे आज दुनिया में होने बाले तकनिकी प्रयोगों (क्वांटम टेक्नोलॉजी लॉ विथ लैब) से रूबरू होते हैं.
उन्होंने विषय विशेषज्ञों के समक्ष प्रथम टीम ने G7 समिट का उदाहरण देकर डी-वेव एनिलेर (D-Wave Annealer), AWS क्लाउड और QUBO मॉडल से स्मार्ट रूट ऑप्टिमाइजेशन का तरीका तथा द्वितीय टीम QuBee ने क्वांटम रैंडम नंबर प्रस्तुत किये जाने कि सराहना की.
उन्होंने कहा कि इन प्रयोगों के माध्यम से क्वांटम चिप्स बनेंगी जो फॉरेंसिक साइंस एंड एप्लीकेशन (क्वांटम क्रिप्टोग्राफ़ी) में प्रभावशाली होगी. डॉ. गोस्वामी ने तकनीक के लाभ और भविष्य के लक्ष्य, “ट्रैफिक कंजेशन” जैसी गंभीर समस्या का समाधान विषय पर भी प्रकाश डालते हुए कहा कि संस्थान क्वांटम कंप्यूटिंग कि दिशा में अग्रणी होकर कार्य कर रहा है.
इस अवसर पर छात्र समूह ने पर्यावरण के दृष्टिगत वाहनों का आइडल टाइम कम करके CO2 उत्सर्जन व ईंधन की खपत घटाना और ग्रीन मोबिलिटी को बढ़ावा दिए जाने, सुरक्षा व रियल-टाइम स्पीड: TLS 1.3 एन्क्रिप्शन और GDPR नियमों के साथ डेटा सुरक्षित रखते हुए सेकंडों में सटीक रूट तय करना तथा फॉरेंसिक व इमरजेंसी लॉजिस्टिक्स: भविष्य में एम्बुलेंस, पुलिस और फॉरेंसिक सेवाओं के लिए प्राथमिकता वाले ट्रैफिक रूट तैयार करना जैसे विषयों पर भी प्रकाश डाला.
इस प्रस्तुति में फोटोनिक आधारित क्वांटम रैंडम नंबर जनरेटर(QRNG) द्वारा qubits (0 एंड 1) जनरेट किया गया जो क्वांटम की डिस्ट्रीब्यूशन (QKD) टेक्नोलॉजी पर आधारित है. QRNG जैसे पावरफुल डिजिटल फॉरेंसिक टूल का उपयोग फॉरेंसिक डाटा एन्क्रिप्शन, डाटा इंटिग्रिटी और एविडेंस प्रिजर्वेशन हेतु किया जाता है.
इस अवसर पर अपर निदेशक संजीव सुमन, उप निदेशक चिरंजीव मुखर्जी, अतुल यादव, डॉ. निमिशा, डॉ. सेंथिल शिवासुब्रमण्यम सहित जन संपर्क अधिकारी संतोष तिवारी सहित अन्य फैकल्टी उपस्थित रहे.












