लखनऊ। कारागार मुख्यालय, लखनऊ में “Best Practices in Prison Administration” विषय पर आयोजित तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का मंगलवार को समापन हुआ। समापन समारोह के मुख्य अतिथि उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के अध्यक्ष एवं पूर्व महानिदेशक कारागार एसएन साबत रहे।
कार्यक्रम में विभिन्न राज्यों के कारागार अधिकारियों ने हिस्सा लिया और कारागार प्रशासन में अपनाई जा रही बेहतर कार्यप्रणालियों एवं नवाचारों पर अनुभव साझा किए।
विभिन्न राज्यों की बेहतर कार्यप्रणालियों पर हुई चर्चा
कार्यक्रम की शुरुआत में महानिदेशक कारागार एवं सुधार सेवाएं, उत्तर प्रदेश पीसी मीना ने मुख्य अतिथि एस.एन. साबत का पुष्पगुच्छ एवं स्मृति चिह्न भेंट कर स्वागत किया। डॉ. सम्पूर्णानंद कारागार प्रशिक्षण संस्थान के निदेशक डॉ. रामधनी ने तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम की जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण में विभिन्न राज्यों के उप कारागार अधीक्षक से लेकर कारागार अधीक्षक स्तर तक के अधिकारियों ने प्रतिभाग किया। इस दौरान कारागार प्रशासन में बेहतर कार्यप्रणालियों, प्रबंधन और नवाचार से जुड़े विभिन्न विषयों पर विशेषज्ञों ने व्याख्यान दिए तथा अपने अनुभव साझा किए।
महिला बंदियों के प्रबंधन पर दिया गया विशेष जोर
प्रशिक्षण के दौरान उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की सदस्य सचिव डॉ. मनु कालिया ने “Best Practices in Managing Women in Prisons” विषय पर व्याख्यान दिया।
इसके अलावा तेलंगाना, पंजाब और मध्य प्रदेश सहित विभिन्न राज्यों में कारागार प्रशासन के क्षेत्र में अपनाई जा रही बेहतर कार्यप्रणालियों की जानकारी भी प्रतिभागियों को दी गई।
प्रशिक्षण में महिला बंदियों और उनके साथ रह रहे बच्चों के लिए उत्तर प्रदेश में किए जा रहे प्रयासों की सराहना की गई। जेलों में संचालित सहकारी समितियों तथा उनके माध्यम से किए जा रहे कार्यों पर भी विस्तार से चर्चा हुई।
सुधार और पुनर्वास को आधुनिक कारागार व्यवस्था का आधार बताया
समापन समारोह में प्रशिक्षण में शामिल अधिकारियों को प्रमाण पत्र प्रदान किए गए। मुख्य अतिथि एसएन साबत ने कहा कि तीन दिवसीय प्रशिक्षण अधिकारियों के व्यावसायिक जीवन में महत्वपूर्ण पड़ाव साबित होगा। उन्होंने अधिकारियों से निरंतर सीखने, अपने ज्ञान एवं बौद्धिक क्षमता को विकसित करने और स्वयं को बेहतर बनाने पर जोर दिया।
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उन्होंने कहा कि आधुनिक कारागार व्यवस्था की सोच अब केवल “अपराध और दंड” तक सीमित नहीं है। इसका उद्देश्य सुधार, पुनर्वास और समाज में पुनर्समावेशन भी है।
विभिन्न राज्यों द्वारा अपनाई जा रही बेहतर कार्यप्रणालियां और नवाचार इस दिशा में कारागार प्रशासन को अधिक प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
समारोह में उपमहानिरीक्षक कारागार प्रदीप गुप्ता, सुभाष चंद्र शाक्य सहित कारागार विभाग के वरिष्ठ अधिकारी और प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रतिभाग करने वाले अधिकारी मौजूद रहे।













