सूरज राय की रचना, रामायण धर की कविता व गुलफाम के हास्य ने जीता दिल

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गांधीनगर। सुप्रसिद्ध शायर सूरज राय ‘सूरज’ की भावपूर्ण रचनाओं और युवा कवि रामायण धर द्विवेदी की भगवान श्रीराम एवं सद्गुणों पर आधारित ओजपूर्ण कविताओं ने भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) के नेताजी सुभाष पश्चिमी केंद्र, गांधीनगर में आयोजित कवि सम्मेलन में समां बांध दिया।

साई गांधीनगर में ‘हिंदी पखवाड़ा 2026’ के तहत भव्य कवि सम्मेलन का आयोजन

हिंदी पखवाड़ा-2026 के तहत ‘हिंदी का मान; राष्ट्र का सम्मान’ विषय पर आयोजित इस कार्यक्रम में पैरा-पावरलिफ्टिंग खिलाड़ी गुलफाम ने परीक्षा के तनाव पर हास्य कविता सुनाकर श्रोताओं को खूब गुदगुदाया। वहीं, एथलेटिक्स कोच आयुष ने प्रेम और प्रीत पर आधारित कविताओं से अपनी साहित्यिक प्रतिभा का परिचय दिया।

कार्यक्रम में खेल और साहित्य का अनूठा संगम देखने को मिला। इस अवसर पर क्षेत्रीय निदेशक प्रशांत सिंह, उप निदेशक अशोक खत्री, सहायक निदेशक ईशप्रीत, केंद्र के प्रशिक्षक और बड़ी संख्या में खिलाड़ी मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन अशोक खत्री ने किया।

सूरज राय ‘सूरज’ ने अपनी रचनाओं के माध्यम से मानवीय भावनाओं और रिश्तों की गहराई को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। उनकी पंक्तियां, “चेहरे पर मुस्कान दिलों में लेकर खाई बैठे हैं, करके सारे लोग हिसाब-ए-पाई-पाई बैठे हैं…” श्रोताओं को खूब पसंद आईं।

युवा हिंदी कवि एवं गीतकार रामायण धर द्विवेदी ने भगवान श्रीराम, रामायण और जीवन में सद्गुणों के महत्व पर केंद्रित कविताएं सुनाईं। प्रेम, सदाचार और मर्यादा का संदेश देती उनकी पंक्तियां थीं—

“प्रेम का बीज अब जब एक अंकुर बने, मन थरा सी पतित सोच भंगुर बने। सद्गुणों राम बनकर विराजो यहां, अब हृदय हर किसी का अवधपुर बने।।”

रामायण से प्रेरित उनकी एक अन्य रचना ने भी श्रोताओं की सराहना बटोरी—

“नजर थी या की बारिश की झड़ी थी, चुनौती बारहा स्तर पर खड़ी थी। कोई रावण मगर जीता ना मुझसे, वजह ये मैंने रामायण पढ़ी थी।।”

वहीं, पैरा-पावरलिफ्टिंग खिलाड़ी गुलफाम ने परीक्षा के दबाव और परीक्षा कक्ष के अनुभवों को हास्य के अंदाज में पेश किया। उनकी कविता की पंक्तियां थीं—

“ये 100 नंबर का पर्चा था, मुझे दो की भी आस नहीं। अब तो चाहे दुनिया पलटे, हो सकता मैं पास नहीं।”

उनकी प्रस्तुति पर सभागार ठहाकों और तालियों से गूंज उठा। एथलेटिक्स कोच आयुष ने भी प्रेम और प्रीत पर आधारित कविताओं का पाठ किया।

कवि सम्मेलन में आमंत्रित रचनाकारों के साथ प्रशिक्षकों और खिलाड़ियों की साहित्यिक सहभागिता ने आयोजन को विशेष बनाया। कार्यक्रम ने हिंदी भाषा और साहित्य की समृद्धि को रेखांकित करने के साथ खेलों से जुड़े लोगों के सर्वांगीण विकास में साहित्यिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों के महत्व को भी सामने रखा।

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