लखनऊ: उत्तर प्रदेश स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंस लखनऊ में आज आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), साइबर फॉरेंसिक, क्वांटम डेटा प्रोटेक्शन एवं कानूनी अनुपालन (Legal Compliance) के अभिसरण (Convergence) विषय पर आधारित तीन-दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन ‘टेक संगम 2026’ का शुभारंभ डॉ. जी. के. गोस्वामी , प्रो. तनुजा सिंह, प्रो. ए. एम. शैरी, डा. पवन शर्मा एवं संजीव सुमन सहित अन्य अतिथियों द्वारा मंथन सभागार में दीप प्रज्वलन कर किया गया.
ग्लोबल सहयोग से ही फॉरेंसिक और न्याय की नई क्रांति संभव है: प्रो. तनूजा सिंह
विशिष्ठ अतिथि आईआईएम शिलांग (IIM Shillong) के निदेशक प्रो. ए. एम. शैरी ने कहा कि शैक्षणिक संस्थानों को केवल डिग्री देने के बजाय छात्रों में व्यावहारिक कौशल, मजबूत बुनियादी सिद्धांत (Fundamentals) और नैतिक मूल्य विकसित करने पर ध्यान देना चाहिए।
सिर्फ डिग्री नहीं, टेक-लीगल हुनर से बनेगा फ्यूचर-रेडी करियर: प्रो. ए. एम. शेरी
उन्होंने पायथन प्रोग्रामिंग और क्वांटम मैकेनिक्स का उदाहरण देते हुए मूल सिद्धांतों को समझने पर जोर दिया। उन्होंने उबर (Uber), जोमैटो (Zomato), स्विगी (Swiggy) और अमेज़न (Amazon) का उदाहरण देते हुए उन्होंने समझाया कि वास्तविक दुनिया की समस्याओं की पहचान करना ही नवाचार और उद्यमशीलता का आधार है।

इस अवसर पर विशिष्ठ अतिथि प्रो. तनुजा सिंह, अध्यक्ष यूनिवर्सिटी ऑफ इंडियानापोलिस (USA) ने भारत-अमेरिका सहयोग और वैज्ञानिक नैतिकता पर अपने विचार रखे| उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक ज्ञान संपूर्ण मानवता का है और इसे राष्ट्रीय सीमाओं में नहीं बांधा जा सकता।
तकनीक और कानून का मिलन ही आधुनिक न्याय की कुंजी है: डॉ. जी. के. गोस्वामी
उन्होंने कहा कि ग्लोबल सहयोग से ही फॉरेंसिक और न्याय की नई क्रांति संभव है साथ ही उन्होंने कानूनी शिक्षा को वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक अनुभव से जोड़ने के लिए UPSIFS के प्रयास की सराहना की। उन्होंने अमेरिका में फॉरेंसिक पहचान परियोजना का उदाहरण देते हुए बताया कि फॉरेंसिक साइंस न्याय के साथ-साथ मानवीय संवेदनाओं की सेवा करता है।
उन्होंने कहा कि डीएनए और AI जैसे तकनीकी उपकरणों के प्रसार के साथ-साथ नैतिक विवेक और निष्पक्ष मानवीय निर्णय क्षमता आवश्यक है, क्योंकि न्याय को सॉफ्टवेयर की तरह डाउनलोड नहीं किया जा सकता।
इस अवसर पर अवनीश अवस्थी सलाहकार मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में प्रदेश की सुरक्षा एवं वैज्ञानिक जाँच प्रदेश सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति का उल्लेख किया| उन्होंने 18 फॉरेंसिक प्रयोगशालाओं, डीएनए परीक्षण और गैस क्रोमैटोग्राफी जैसी आधुनिक तकनीकों की भूमिका को सराहा।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी तकनीकी दृष्टिकोण और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की वैज्ञानिक रुचि व अपराध अनुसंधान को सुदृढ़ करने के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि तीन दिन विषय विशेषज्ञों द्वारा जो चिंतन मन निश्चित रूप से प्रदेश में तकनीक को और अधिक बढ़ावा देने में सार्थक सिद्ध होगा|
आईआईटीएम सी-डॉट समज्ञा टेक्नोलॉजीज फाउंडेशन की सीईओ प्रो. नागरत्ना ने डिजिटल युग में कानून, तकनीक और फॉरेंसिक विज्ञान के बीच की दूरी को मिटाने पर विशेष जोर दिया।
उन्होंने कहा कि आज के समय में केवल तकनीकी नवाचार या ISO सर्टिफिकेशन ही काफी नहीं है, बल्कि हर नई तकनीक को शुरुआत से ही ‘लीगल बाय डिजाइन’ (Legal-by-Design) होना पड़ेगा।
अदालत में डिजिटल साक्ष्यों की वैधता सुनिश्चित करने के लिए फॉरेंसिक एल्गोरिदम का मानकीकरण (Standardization) और मेटाडेटा की सुरक्षा अत्यंत आवश्यक है।
उन्होंने ने स्पष्ट किया कि जब तक टेक एक्सपर्ट्स कानूनी बारीकियों को नहीं समझेंगे और कानूनी विशेषज्ञ टेक्नोलॉजी के फॉरेंसिक पहलुओं से वाकिफ नहीं होंगे, तब तक डिजिटल अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण संभव नहीं है।
उन्होंने उच्च शिक्षा में ‘लॉ विथ लैब्स’ (Law with Labs) के समावेश और क्रॉस-डोमेन ट्रेनिंग का आह्वान करते हुए कहा कि न्याय प्रणाली में पारदर्शिता और जन-विश्वास बनाए रखने के लिए तकनीक और कानून का यह तालमेल ही भविष्य का सबसे बड़ा गेम-चेंजर साबित होगा।
संस्थापक निदेशक डॉ. जी. के. गोस्वामी ने सभी अतिथियों, विद्वानों और विद्यार्थियों का स्वागत करते हुए इस सम्मेलन को संस्थान की विकास यात्रा का ऐतिहासिक मील का पत्थर बताया।
उन्होंने यूनिवर्सिटी ऑफ इंडियानापोलिस (USA) की प्रेसिडेंट डॉ. तनुजा सिंह का विशेष स्वागत करते हुए कहा कि आज दोनों संस्थानों के लिए एक महत्वपूर्ण दिन है हमारी साझेदारी द्विपक्षीय संबंधों व रणनीतिक गति को बल देगा| उन्होंने कहा कि तकनीक और कानून का मिलन ही आधुनिक न्याय की कुंजी है यह शिखर सम्मलेन यहाँ कि छात्र छात्रों के लिए अतिमहत्वपूर्ण एवं लाभकारी होगा|
कार्यक्रम में आए विषय विशेषज्ञों और पैनलिस्टों ने तकनीकी, कानूनी, फॉरेंसिक एवं शैक्षणिक क्षेत्र के विविध मुद्दों पर गहन विचार-विमर्श किया।
इस अवसर पर डाटा प्रोटेक्शन और डिजिटल ट्रस्ट, क्वांटम भविष्य व रोजगार के अवसर, लीगल-टेक्नो प्रोफेशन, फॉरेंसिक साइंस में अंतर्राष्ट्रीय सहयोग, रोबोटिक्स, ड्रोन व 3D प्रिंटिंग जैसी उभरती प्रौद्योगिकियां, फॉरेंसिक में AI, युवा पेशेवरों को इंडस्ट्री-रेडी बनाना, साइबर रेजिस्टेंस व बैंकिंग-इंश्योरेंस अनुपालन, AI इन कंस्ट्रक्शन तथा डेटा प्रोटेक्शन फ्रेमवर्क जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई।
सत्रों के दौरान DIG आशीष तिवारी, प्रमुख सचिव पंधारी यादव (IAS), पवन शर्मा (PoP, UPSIFS), अंजलि गुप्ता, पराग शेंडे, पांडुरंग आचार्य, वैभव प्रताप सिंह, अतुल त्रिपाठी, डॉ. विदुर राज, डॉ. शेखर शुक्ला, चंद्रशेखर मिश्रा, रवींद्र बर्लिंगे, डॉ. रंजीत सिंह, दिलीप चौहान, प्रो. अश्वनी कुमार, मिलिंद राज, आदित्य वधोकर, हेवन पांड्या, कौस्तुभ त्रिपाठी, अनुपम सरन, अतुल मिश्रा, उपेंद्र गिरि, मुकेश सिंह
गुंजन मिश्रा, आलोक कुमार, मनोज मधुसूदनन, सुनील चेरियन कोरह, पंकज श्रीवास्तव, डॉ. कुंज टंडन, सत्यम कुशवाहा, डॉ. सुभाष रस्तोगी, मनोरंजन मिश्रा, रश्मिल मोहन तथा TCS, Zscaler और QNu Labs के उद्योग प्रतिनिधियों ने अपने-अपने सत्रों में विचार रखे और मार्गदर्शन प्रदान किया।
इस अवसर पर अपर निदेशक संजीव सुमन, चिरंजीब मुखर्जी, अतुल यादव, फेकल्टी डॉ सेंथिल सुब्रमण्यम,डॉ पोरावी सिंह, तान्या सिंह, डॉ श्रुतिदासगुप्ता, डॉ सपना शर्मा, डॉ प्रीती मालिक, डॉ अशित श्रीवास्तव, जनसंपर्क अधिकारी संतोष तिवारी , सहित अन्य उपस्थित रहे।













