लखनऊ: सीएसआईआर-केन्द्रीय औषधीय एवं सगंध पौधा संस्थान (सीमैप) ने मध्य प्रदेश के सतना जिले के किसानों के लिए एक दिवसीय जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया, जिसका उद्देश्य एरोमा मिशन फेज 3 तथा फ्लोरीकल्चर मिशन फेज 2 के अंतर्गत वैज्ञानिक खेती और मूल्य संवर्धन में उनकी दक्षता को बढ़ाना था।
यह कार्यक्रम सतना के उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग के सहयोग से आयोजित किया गया, जिसमें जिले के सात विकासखंडों से किसान शामिल हुए।
इस पहल का मुख्य उद्देश्य सतत कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देना, फसलों का विविधीकरण करना तथा उच्च मूल्य वाली औषधीय, सुगंधित एवं पुष्पकृषि फसलों के माध्यम से आय सृजन को प्रोत्साहित करना था।
डॉ. रक्षपाल सिंह, डॉ. अनिल कुमार सिंह, डॉ. राजेन्द्र प्रसाद पटेल तथा स्वप्निल श्रीवास्तव सहित विशेषज्ञों की एक टीम ने तकनीकी सत्रों का संचालन किया। उन्होंने विभिन्न उच्च मांग वाली फसलों की वैज्ञानिक खेती, फसल प्रबंधन तथा उनके बाज़ार संभावनाओं पर विस्तृत मार्गदर्शन प्रदान किया।
किसानों को पुष्पकृषि फसलों जैसे गेंदा, गुलाब, रजनीगंधा तथा चमेली की खेती के साथ-साथ अश्वगंधा, कालमेघ एवं तुलसी जैसी औषधीय फसलों के उत्पादन का प्रशिक्षण दिया गया।
सत्रों में लेमनग्रास, पामारोजा तथा जेरैनियम जैसी सुगंधित फसलों को भी शामिल किया गया, जो अपने आवश्यक तेलों के मूल्य और औद्योगिक उपयोगों के कारण तेजी से महत्व प्राप्त कर रही हैं। खेती की तकनीकों के अतिरिक्त, कार्यक्रम में मूल्य संवर्धन तथा वेस्ट-टू-वेल्थ के दृष्टिकोण पर विशेष जोर दिया गया।
किसानों को आय सृजन हेतु नवीन गतिविधियों जैसे कृषि अवशेषों से जैव-अवक्रमणीय कटलरी निर्माण, वर्मी-कम्पोस्टिंग, मशरूम उत्पादन तथा गुलाब जल और अगरबत्ती जैसे मूल्य संवर्धित उत्पादों की तैयारी के व्यावहारिक प्रदर्शन प्रदान किए गए।
इस प्रशिक्षण का उद्देश्य किसानों को वैज्ञानिक ज्ञान एवं उद्यमशीलता कौशल से सुसज्जित करना था, जिससे वे विविधीकृत कृषि प्रणालियों को अपनाकर सतत पद्धतियों के माध्यम से अपनी आजीविका में सुधार कर सकें।
प्रतिभागी किसानों ने डॉ. ज़बीर अहमद, निदेशक , सीएसआईआर- सीमैप तथा डॉ. राजेश कुमार वर्मा के प्रति इस व्यापक कार्यक्रम के संचालन हेतु अपनी सराहना व्यक्त की।
उन्होंने उल्लेख किया कि उन्नत तकनीकों तथा मूल्य संवर्धन मॉडलों का यह अनुभव उनकी आय और कृषि पद्धतियों में महत्वपूर्ण सुधार लाने में सहायक सिद्ध होगा।
यह पहल ग्रामीण अर्थव्यवस्थाओं को सुदृढ़ करने के प्रति सीमैप की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाती है, जो वैज्ञानिक अनुसंधान और जमीनी स्तर के कृषि समुदायों के बीच की दूरी को कम करने का कार्य कर रही है।
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