जेकेसी फाउंडेशन की ‘ब्रिलियंटली डिस्लेक्सिक’ पहल बदलेगी दुनिया

0
64

हाईलाइट्स

  • डिस्लेक्सिया को कमजोरी नहीं, सीखने के अलग तरीके के रूप में समझने की पहल
  • जेकेसी फाउंडेशन ने शुरू की ‘ब्रिलियंटली डिस्लेक्सिक’ पहल
  • पांच वर्षों में 10 लाख लोगों तक पहुंचने का लक्ष्य

कई बार बच्चे में प्रतिभा की कमी नहीं होती, बल्कि उसकी क्षमताओं को पहचानने और समझने में चूक हो जाती है। कोई बच्चा मशीनों के काम करने का तरीका आसानी से समझ लेता है, कोई कल्पनाशील कहानियां गढ़ता है, तो कोई मुश्किल पहेलियों को चुटकियों में सुलझा देता है।

लेकिन जब बात कक्षा में सबके सामने पढ़ने की आती है, तो वही बच्चा हिचकिचाने लगता है। ऐसे में उसकी परेशानी को समझने के बजाय उसे अधिक मेहनत करने और अभ्यास बढ़ाने की सलाह दी जाती है। धीरे-धीरे यह स्थिति उसके आत्मविश्वास को भी प्रभावित करने लगती है।

डिस्लेक्सिया से प्रभावित बच्चों के सामने आने वाली चुनौतियों को समझने और उनके प्रति समाज की सोच बदलने के उद्देश्य से जेके सीमेंट लिमिटेड की परोपकारी शाखा जेकेसी फाउंडेशन ने ‘ब्रिलियंटली डिस्लेक्सिक’ पहल शुरू की है।

इसका उद्देश्य डिस्लेक्सिया के प्रति जागरूकता बढ़ाने के साथ ऐसा समावेशी वातावरण तैयार करना है, जहां बच्चों और अन्य प्रभावित लोगों की क्षमताओं को पहचानने, उन्हें प्रोत्साहित करने और उनके विकास के लिए उचित सहयोग मिल सके।

समय पर पहचान और सहयोग जरूरी

डिस्लेक्सिया से प्रभावित बच्चों की मुश्किलें केवल पढ़ने-लिखने तक सीमित नहीं रहतीं। समय पर उनकी स्थिति को न समझ पाना और उनकी कठिनाइयों को मेहनत या एकाग्रता की कमी मान लेना उनके आत्मविश्वास पर असर डाल सकता है।

ऐसे में जरूरी है कि उनकी सीखने की जरूरतों को समझा जाए और उन्हें अपनी क्षमताओं को विकसित करने के लिए अनुकूल माहौल दिया जाए। ‘ब्रिलियंटली डिस्लेक्सिक’ इसी सोच को आगे बढ़ाने का प्रयास है।

पहल का उद्देश्य डिस्लेक्सिया को किसी कमी के तौर पर देखने के बजाय सीखने के एक अलग तरीके के रूप में समझने को प्रोत्साहित करना है। इसके जरिए लोगों को यह समझाने का प्रयास किया जाएगा कि सही मार्गदर्शन, सहयोग और प्रोत्साहन से डिस्लेक्सिया से प्रभावित लोग भी अपनी क्षमताओं को बेहतर ढंग से विकसित कर सकते हैं।

पांच वर्षों में 10 लाख लोगों तक पहुंचने का लक्ष्य

डॉ. राघवपत सिंघानिया और सोनम सिंघानिया द्वारा शुरू की गई यह पहल डिस्लेक्सिया से प्रभावित लोगों को विभिन्न चरणों में सहयोग देने वाला तंत्र विकसित करने की दिशा में काम करेगी।

इसके तहत जागरूकता बढ़ाने और लोगों की समझ विकसित करने पर जोर दिया जाएगा, ताकि प्रभावित बच्चों और व्यक्तियों को परिवार, स्कूल और समाज में बेहतर सहयोग मिल सके।

पहल को विकसित करने और व्यापक स्तर पर आगे बढ़ाने के लिए जेकेसी फाउंडेशन ने ऑर्किड्स फाउंडेशन के साथ साझेदारी की है।

इस सहयोग के माध्यम से डिस्लेक्सिया के प्रति जागरूकता और सहायता के प्रयासों को मजबूत बनाने की योजना है। अगले पांच वर्षों में विभिन्न अभियानों और जनसंपर्क कार्यक्रमों के जरिए 10 लाख लोगों तक पहुंचने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

हर बच्चे की सीखने की क्षमता को समझना जरूरी

इस पहल पर जेके सीमेंट लिमिटेड के प्रबंध निदेशक और ‘ब्रिलियंटली डिस्लेक्सिक’ के संस्थापक डॉ. राघवपत सिंघानिया ने कहा कि हर बच्चा अलग तरीके से सीखता है, लेकिन कई बार सीखने के इस अंतर को क्षमता या मेहनत की कमी समझ लिया जाता है।

उन्होंने कहा, “जब किसी बच्चे को शुरुआत में समझा नहीं जाता, तो वह अपनी क्षमताओं को पहचानने से पहले ही खुद पर भरोसा खो सकता है। इसी सोच के साथ हमने यह पहल शुरू की है। हमारा प्रयास रहा है कि लोगों को अपनी क्षमता पहचानने और उसे आगे बढ़ाने के अवसर मिलें। ब्रिलियंटली डिस्लेक्सिक इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।”

इस पहल के जरिए जेकेसी फाउंडेशन का प्रयास डिस्लेक्सिया को लेकर प्रचलित धारणाओं में बदलाव लाने और प्रभावित लोगों के लिए अधिक समझदारीपूर्ण, सहयोगी और समावेशी माहौल तैयार करने का है।

ये भी पढ़ें : अपोलोमेडिक्स : चार माह में 20 किलो वजन घटाकर बेटे ने पिता को दिया लिवर

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here