सीमांत प्रौद्योगिकियों में निपुणता हासिल करना समय की मांग : राजनाथ सिंह

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नई दिल्ली। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मध्य प्रदेश के महू में आर्मी वॉर कॉलेज (एडब्ल्यूसी) में अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा – “आज के लगातार विकसित होते समय में सीमांत प्रौद्योगिकियों में महारत हासिल करना समय की मांग है और सैन्य प्रशिक्षण केंद्र हमारे सैनिकों को भविष्य की चुनौतियों का मुकाबला करने को महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।”

युद्ध के तरीकों में देखे जा रहे आमूल-चूल परिवर्तनों पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि सूचना युद्ध, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित युद्ध, छद्म युद्ध, विद्युत-चुंबकीय युद्ध, अंतरिक्ष युद्ध और साइबर हमले जैसे गैर-परंपरागत तरीके आज के समय में बड़ी चुनौती पेश कर रहे हैं।

रक्षा मंत्री ने जोर दिया कि सेना को ऐसी चुनौतियों का मुकाबला करने को बेहतर तरीके से प्रशिक्षित और सुसज्जित रहना चाहिए।

महू में आर्मी वॉर कॉलेज (एडब्ल्यूसी) पहुंचे केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह

उन्होंने महू में प्रशिक्षण केंद्रों की इन प्रयासों में उनके बहुमूल्य योगदान के लिए सराहना की। उन्होंने बदलते समय के साथ अपने प्रशिक्षण पाठ्यक्रम में लगातार सुधार करने और कर्मियों को हर तरह की चुनौती के लिए तैयार करने के प्रयासों के लिए केंद्रों की सराहना की।

राजनाथ सिंह ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार के 2047 तक देश को विकसित भारत बनाने के विजन पर प्रकाश डाला और वर्तमान समय को संक्रमण काल बताया। केंद्रीय मंत्री ने कहा – “भारत निरंतर विकास के पथ पर अग्रसर है और तेजी से एक विनिर्माण केंद्र के रूप में उभर रहा है।

रक्षा मंत्री ने कहा- सैन्य प्रशिक्षण केंद्र से भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार हो रहे सैनिक 

सैन्य दृष्टि से हम आधुनिक हथियारों से लैस हो रहे हैं। हम दूसरे देशों को मेड-इन-इंडिया उपकरण भी निर्यात कर रहे हैं। हमारा रक्षा निर्यात, जो एक दशक पहले लगभग 2,000 करोड़ रुपये का था, आज 21,000 करोड़ रुपये के रिकॉर्ड आंकड़े को पार कर गया है। हमने 2029 तक 50,000 करोड़ रुपये का निर्यात लक्ष्य रखा है।”

रक्षा मंत्री ने तीनों सेनाओं के बीच एकीकरण और एकजुटता को मजबूत करने के सरकार के संकल्प को दोहराया और विश्वास जताया कि आने वाले समय में सशस्त्र बल बेहतर और अधिक कुशल तरीके से चुनौतियों का सामना करने में सक्षम होंगे।

उन्होंने इस तथ्य की सराहना की कि महू छावनी में सभी विंग के अधिकारियों को उच्चस्तरीय प्रशिक्षण दिया जाता है। उन्होंने अधिकारियों से इन्फैंट्री स्कूल में हथियार प्रशिक्षण; मिलिट्री कॉलेज ऑफ टेलीकम्युनिकेशन इंजीनियरिंग (एमसीटीई) में एआई और संचार प्रौद्योगिकी और एडब्ल्यूसी में जूनियर और सीनियर कमांड में नेतृत्व जैसे क्षेत्रों में प्रशिक्षण के माध्यम से एकीकरण को बढ़ावा देने की संभावना तलाशने का आग्रह किया।

राजनाथ सिंह ने कहा कि भविष्य में कुछ अधिकारी रक्षा अताशे के रूप में काम करेंगे और उन्हें वैश्विक स्तर पर राष्ट्रीय हितों को सुरक्षित करने का प्रयास करना चाहिए।

सिंह ने कहा – “जब आप रक्षा अताशे का पद संभालेंगे, तो आपको सरकार के ‘आत्मनिर्भर भारत’ के दृष्टिकोण को आत्मसात करना चाहिए। आत्मनिर्भरता के माध्यम से ही भारत अपनी रक्षा क्षमताओं को मजबूत कर सकता है और विश्व मंच पर अधिक सम्मान हासिल कर सकता है।”

रक्षा मंत्री ने भारत को दुनिया की सबसे मजबूत आर्थिक और सैन्य शक्तियों में से एक बनाने के लिए सरकार की अटूट प्रतिबद्धता को दोहराया।

उन्होंने कहा – “आर्थिक समृद्धि तभी संभव है जब सुरक्षा पर पूरा ध्यान दिया जाए। सुरक्षा व्यवस्था भी तभी मजबूत होगी जब अर्थव्यवस्था मजबूत होगी। दोनों एक दूसरे के पूरक हैं। हम 2047 तक न केवल एक विकसित राष्ट्र बन जाएंगे, बल्कि हमारी सशस्त्र सेनाएं भी दुनिया की सबसे आधुनिक और सबसे मजबूत सेनाओं में से एक होंगी।”

राजनाथ सिंह ने अधिकारियों से डॉ. बी.आर. अंबेडकर के समर्पण और भावना के मूल्यों को आत्मसात करने का भी आग्रह किया। उन्होंने बाबा साहब को न केवल भारतीय संविधान का निर्माता बताया, बल्कि एक दूरदर्शी मार्गदर्शक भी बताया। उन्होंने खासकर युवाओं को उनके मूल्यों और आदर्शों से परिचित कराने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई।

सीमाओं को सुरक्षित करने और प्राकृतिक आपदाओं के दौरान सबसे पहले अपनी सेवा देने वाले सशस्त्र बलों की सराहना करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा – “राष्ट्र की रक्षा के लिए यह समर्पण और लगातार बदलती दुनिया में खुद को अद्यतन रखने की भावना हमें दूसरों से आगे ले जा सकती है।”

केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को आर्मी वॉर कॉलेज (एडब्ल्यूसी) में कमांडेंट लेफ्टिनेंट जनरल एचएस साही ने संघर्ष के पूरे स्पेक्ट्रम में युद्ध लड़ने के लिए सैन्य नेताओं को प्रशिक्षित करने और सशक्त बनाने की दिशा में संस्थान की भूमिका और महत्व के बारे में जानकारी दी।

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उन्हें बहु-डोमेन संचालन में संयुक्तता, प्रशिक्षण पाठ्यक्रम में प्रौद्योगिकी के समावेश और सीएपीएफ अधिकारियों के प्रशिक्षण के साथ-साथ शिक्षाविदों, विश्वविद्यालयों और उद्योगों के साथ किए जा रहे आदान-प्रदान कार्यक्रमों के माध्यम से प्रशिक्षण पद्धति में महत्वपूर्ण कदमों के बारे में जानकारी दी गई।

उन्हें मित्र देशों के अधिकारियों को प्रशिक्षित करने और सैन्य कूटनीति में महत्वपूर्ण योगदान देने के माध्यम से संस्थान द्वारा हासिल की गई वैश्विक छापों के बारे में भी जानकारी दी गई। इस अवसर पर थल सेनाध्यक्ष जनरल उपेंद्र द्विवेदी और भारतीय सेना के अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।

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इससे पहले रक्षा मंत्री ने इन्फैंट्री मेमोरियल पर शहीदों को पुष्पांजलि अर्पित की। रक्षा मंत्री ने 29 दिसंबर, 2024 को महू में एडब्ल्यूसी, एमसीटीई, इन्फैंट्री स्कूल और आर्मी मार्कस्मैनशिप यूनिट का दौरा किया।

उन्होंने कहा कि ये सभी प्रतिष्ठान मिलकर देश के स्वर्णिम अतीत और मजबूत, समृद्ध और उज्ज्वल भविष्य का संगम बनाते हैं। उन्होंने एमसीटीई में संचालित क्वांटम टेक्नोलॉजी लैब और एआई लैब को युद्ध के उद्देश्य को प्राप्त करने की दिशा में एक सकारात्मक कदम बताया।

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