संघर्षों को पछाड़ तेजलबेन डामोर ने एशियन पैरा गेम्स में जीता कांस्य, 200 मीटर में बनाया व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ रिकॉर्ड

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गांधीनगर। जिंदगी में मुश्किलें कितनी भी हों, मजबूत इरादे और लगातार मेहनत के दम पर सफलता की नई इबारत लिखी जा सकती है। गुजरात के दाहोद की तेजलबेन अमराजी डामोर ने अपने प्रदर्शन से इसे सच कर दिखाया है।

गुजरात की धाविका ने पदार्पण में हासिल की ऐतिहासिक सफलता, कोच नितिन चौधरी की मेहनत को दिया पदक का श्रेय

व्यक्तिगत संघर्षों और चुनौतियों को पीछे छोड़ते हुए तेजलबेन ने जापान के आइची-नागोया में आयोजित एशियन पैरा गेम्स 2026 की महिला 200 मीटर टी-12 स्पर्धा में कांस्य पदक जीतकर देश का गौरव बढ़ाया।

अब 400 मीटर टी-12 स्पर्धा पर नजर, दृष्टिबाधित बच्चों के लिए दाहोद में रनिंग ट्रैक बनाने का है सपना

भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) के गांधीनगर स्थित नेशनल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (NCoE) में प्रशिक्षण लेने वाली 24 वर्षीय दृष्टिबाधित धाविका ने एशियन पैरा गेम्स में अपने पदार्पण पर ही पदक हासिल किया। इस दौरान उन्होंने अपना व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन भी दर्ज किया।

तेजलबेन की यह उपलब्धि वर्षों की मेहनत, अनुशासित प्रशिक्षण और कभी हार न मानने वाले जज्बे का परिणाम है। उनके लिए यह पदक केवल एक खेल उपलब्धि नहीं, बल्कि उन तमाम संघर्षों का जवाब भी है, जिनका सामना करते हुए उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर तक का सफर तय किया।

हीट में दूसरे स्थान पर रहकर फाइनल में बनाई जगह

तेजलबेन ने महिला 200 मीटर टी-12 स्पर्धा की हीट में 25.25 सेकंड का समय निकालते हुए अपने प्रदर्शन की शानदार शुरुआत की। अपनी हीट में दूसरे स्थान पर रहते हुए उन्होंने फाइनल के लिए क्वालीफाई किया। इसके बाद फाइनल में कांस्य पदक जीतकर उन्होंने अपने अंतरराष्ट्रीय करियर में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि जोड़ दी।

उनका 25.25 सेकंड का समय सितंबर 2026 में दुबई पैरा एथलेटिक्स ग्रां प्री में स्वर्ण पदक जीतते समय दर्ज किए गए 25.47 सेकंड के समय से भी बेहतर रहा। इस तरह एशियन पैरा गेम्स में पदक जीतने के साथ उन्होंने अपने प्रदर्शन में सुधार का भी प्रमाण दिया।

कोच नितिन चौधरी को दिया सफलता का श्रेय

पदक जीतने के बाद तेजलबेन भावुक नजर आईं। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय कोच नितिन चौधरी को देते हुए उनके समर्पण, अनुशासन और लगातार सहयोग की सराहना की।

तेजलबेन ने कहा, “सबसे पहले मैं अपने कोच को धन्यवाद देना चाहती हूं। इस पदक के पीछे बहुत मेहनत और अनुशासन है। रविवार को जब आराम का दिन होना चाहिए था, तब भी मेरे कोच ने प्रशिक्षण में कोई कमी नहीं आने दी। यदि हमारा अभ्यास निर्धारित होता था, तो वह हमेशा मौजूद रहते थे। मैं सबसे पहले उनका आभार व्यक्त करना चाहती हूं।”

उनके इस बयान से स्पष्ट है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिली सफलता के पीछे खिलाड़ी की मेहनत के साथ कोच का निरंतर मार्गदर्शन और समर्पण भी महत्वपूर्ण रहा है। तेजलबेन और उनके कोच ने मिलकर जिस लक्ष्य के लिए तैयारी की, उसका परिणाम एशियन पैरा गेम्स के पदक के रूप में सामने आया।

संघर्षों के बीच कायम रखा पदक जीतने का संकल्प

गुजरात के दाहोद के एक साधारण परिवार से आने वाली तेजलबेन ने अपने सफर में कई चुनौतियों का सामना किया है। सीमित संसाधनों और पारिवारिक परिस्थितियों के बीच उन्होंने खेल में आगे बढ़ने का सपना नहीं छोड़ा।

उनका लक्ष्य अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश के लिए पदक जीतना था और इसी संकल्प के साथ उन्होंने अपनी तैयारी जारी रखी। तेजलबेन ने कहा, “हम यहां बहुत सारी उम्मीदों, कड़ी मेहनत और पदक जीतने के मजबूत इरादे के साथ आए थे। मेरी यात्रा संघर्षों से भरी रही है, लेकिन मैंने ठान लिया था कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, मुझे पदक लेकर ही लौटना है।”

SAI NCoE गांधीनगर में उन्हें प्रशिक्षण के लिए आवश्यक सुविधाएं, व्यवस्थित कोचिंग और खेल संबंधी बुनियादी ढांचे का सहयोग मिल रहा है। इससे उन्हें अपनी तैयारी पर ध्यान केंद्रित करने और प्रतिस्पर्धा के उच्च स्तर के अनुरूप प्रदर्शन सुधारने में मदद मिली है।

2022 में शुरू किया सफर, अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बनाई पहचान

तेजलबेन ने वर्ष 2022 में पैरा एथलेटिक्स का सफर शुरू किया था। इसके बाद उन्होंने लगातार अपने प्रदर्शन में सुधार करते हुए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में उपलब्धियां हासिल कीं।

वर्ष 2025 में विश्व पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में उन्होंने छठा स्थान प्राप्त किया। इसके बाद वर्ष 2026 की राष्ट्रीय चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीता। सितंबर 2026 में दुबई पैरा एथलेटिक्स ग्रां प्री में भी उन्होंने स्वर्ण पदक अपने नाम किया।

कोच नितिन चौधरी के मार्गदर्शन में SAI NCoE गांधीनगर में प्रशिक्षण लेते हुए तेजलबेन ने अपनी तकनीक, गति और प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को निखारा। लगातार मिल रही सफलताएं उनके समर्पण और व्यवस्थित प्रशिक्षण का प्रमाण हैं।

प्रशिक्षण के लिए मिली आर्थिक और संस्थागत सहायता

तेजलबेन की तैयारी को मजबूत बनाने में युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय की सहायता भी महत्वपूर्ण रही है। प्रशिक्षण एवं प्रतियोगिताओं के वार्षिक कैलेंडर (ACTC) के तहत उनकी खेल संबंधी तैयारियों के लिए 2,05,961 रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की गई।

इसके अलावा, SAI NCoE गांधीनगर में उन्हें कोचिंग, प्रशिक्षण सुविधाएं, खेल बुनियादी ढांचा और अन्य आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराया जा रहा है। इस व्यवस्था ने उन्हें नियमित अभ्यास करने, प्रदर्शन में सुधार लाने और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए बेहतर तैयारी करने का अवसर दिया है।

अब 400 मीटर टी-12 स्पर्धा में बेहतर प्रदर्शन पर नजर

200 मीटर में कांस्य पदक जीतने के बाद तेजलबेन का आत्मविश्वास बढ़ा है। अब उनकी नजर महिला 400 मीटर टी-12 स्पर्धा पर है, जिसे वह अपनी मुख्य स्पर्धा मानती हैं। इस स्पर्धा के लिए उन्होंने अपने कोच के साथ विशेष रणनीति तैयार की है।

तेजलबेन ने कहा, “मेरी मुख्य स्पर्धा 400 मीटर है, जो अब होने वाली है। मेरे कोच और मुझे लगता था कि 200 मीटर में पदक जीतने से 400 मीटर के लिए हमारा आत्मविश्वास बढ़ेगा। अब यह पदक जीतने के बाद मैं अपनी मुख्य स्पर्धा में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने को लेकर और अधिक आश्वस्त हूं।”

200 मीटर में मिली सफलता से उन्हें अगली चुनौती के लिए मनोबल मिला है। अब वह इसी लय और आत्मविश्वास को बरकरार रखते हुए 400 मीटर में भी देश के लिए बेहतर प्रदर्शन करना चाहेंगी।

दृष्टिबाधित बच्चों के लिए रनिंग ट्रैक बनाने का सपना

तेजलबेन का सपना केवल अपनी खेल उपलब्धियों तक सीमित नहीं है। वह अपने गृह क्षेत्र गुजरात के दाहोद में दृष्टिबाधित बच्चों के लिए एक समर्पित रनिंग ट्रैक बनाना चाहती हैं, ताकि ऐसे बच्चों को एथलेटिक्स में भाग लेने और अपनी खेल प्रतिभा विकसित करने के बेहतर अवसर मिल सकें।

उनकी यह सोच बताती है कि वह अपनी सफलता के जरिए दूसरे बच्चों के लिए भी रास्ते खोलना चाहती हैं। वह चाहती हैं कि दृष्टिबाधित बच्चों को भी खेलों में आगे बढ़ने के लिए उपयुक्त सुविधाएं और अवसर मिलें, जिससे वे अपनी क्षमता पहचानकर बड़े लक्ष्य हासिल कर सकें।

भारतीय पैरा एथलेटिक्स के लिए गौरवपूर्ण उपलब्धि

एशियन पैरा गेम्स 2026 में तेजलबेन डामोर का कांस्य पदक SAI NCoE गांधीनगर और भारतीय पैरा एथलेटिक्स के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उनका सफर इस बात का उदाहरण है कि दृढ़ संकल्प, निरंतर अभ्यास, समर्पित कोचिंग और सही प्रशिक्षण व्यवस्था के सहारे अंतरराष्ट्रीय मंच पर सफलता हासिल की जा सकती है।

साधारण पारिवारिक पृष्ठभूमि से निकलकर एशिया के प्रमुख बहु-खेल आयोजनों में पदक जीतने तक तेजलबेन ने अपने जज्बे और मेहनत से पहचान बनाई है। अब 400 मीटर टी-12 स्पर्धा में वह इसी आत्मविश्वास के साथ उतरने की तैयारी कर रही हैं। देश को उनसे एक और शानदार प्रदर्शन की उम्मीद होगी।

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