भारत में बढ़ रहा लिवर रोगों का खतरा, सीडीआरआई में विशेषज्ञों ने जताई चिंता

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लखनऊ: सीएसआईआर–केंद्रीय औषधि अनुसंधान संस्थान (सीडीआरआई), लखनऊ में 84वें सीएसआईआर स्थापना दिवस के अवसर पर “मेटाबॉलिक डिस्फंक्शन-एसोसिएटेड स्टियाटोटिक लिवर डिजीज (एम.ए.एस.एल.डी.): द साइलेंट किलर” विषय पर व्याख्यान का आयोजन किया गया।

यह व्याख्यान ऑल इंडिया इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज़ (एआईआईएमएस), नई दिल्ली के प्रो. शालीमार ने दिया और कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. राधा रंगराजन, निदेशक, सीएसआईआर-सीडीआरआई ने की।

प्रो. शालीमार ने बताया कि लिवर से जुड़ी बीमारियाँ तेजी से बढ़ रही हैं और भारत में हर तीसरा व्यक्ति किसी न किसी रूप में लिवर संबंधी परेशानी से जूझ रहा है। मोटापा, मधुमेह और निष्क्रिय जीवनशैली इसके प्रमुख कारण हैं।

उन्होंने ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज (जी.बी.डी.) 2021 के आँकड़े साझा किए, जिनमें बताया गया है कि आने वाले वर्षों में भारत और दक्षिण एशिया में मोटापे और अधिक वजन की समस्या बहुत बढ़ेगी। यह स्थिति लिवर संबंधी बीमारियों जैसे एम.ए.एस.एल.डी. के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकती है।

व्याख्यान में प्रो. शालीमार ने समय रहते बीमारी की पहचान, जीवनशैली में सुधार और रोकथाम पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि अनुसंधान और जन-जागरूकता से ही इन बीमारियों को नियंत्रित किया जा सकता है।

इस कार्यक्रम में महार्षि यूनिवर्सिटी ऑफ इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी, लखनऊ और श्री शारदा ग्रुप ऑफ इंस्टिट्यूशंस के 150 से अधिक छात्र, सीडीआरआई के वैज्ञानिकों और शोधार्थियों के साथ उपस्थित रहे। छात्रों ने व्याख्यान के बाद प्रो. शालीमार से चर्चा की और लिवर रोगों से जुड़ी नई जानकारियाँ प्राप्त कीं।

कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन और चर्चा के साथ हुआ। यह व्याख्यान सीएसआईआर-सीडीआरआई के उन प्रयासों का हिस्सा है जिनका उद्देश्य समाज में स्वास्थ्य जागरूकता और वैज्ञानिक संवाद को बढ़ावा देना है।

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