लखनऊ : गणतंत्र दिवस के पावन अवसर पर लखनऊ पूर्वी विधानसभा के विधायक ओपी श्रीवास्तव ने अपने आवास से तिरंगा झंडा फहराने के कार्यक्रमों की शुरुआत की।
इसके पश्चात उन्होंने सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज इंदिरा नगर, योगा पार्क सेक्टर–A, गौतम बुद्ध पार्क सेक्टर–10 एवं सेक्टर–12, खुशबू पार्क विराट खंड–4 गोमती नगर तथा HAL मार्केट सी–ब्लॉक इंदिरा नगर में तिरंगा फहराकर राष्ट्र के प्रति श्रद्धा व समर्पण व्यक्त किया।
विधायक ओपी श्रीवास्तव ने विभिन्न जगहों पर आयोजित गणतंत्र दिवस समारोह में लिया भाग
योगा पार्क सेक्टर–A में आवासीय समिति के सदस्य, प्रसिद्ध कवि–लेखक एवं व्यंग्यकार सर्वेश अस्थाना तथा एस.के. त्यागी उपस्थित रहे। गौतम बुद्ध पार्क सेक्टर–12 में सुभाष शर्मा, पीएन सिंह तथा सेक्टर–10 में अध्यक्ष राम विलास सिंह यादव, महासचिब तीर्थराम सहित बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक मौजूद रहे।
खुशबू पार्क विराट खंड–4 गोमती नगर में पार्षद संजय सिंह राठौड़, आवासीय समिति के वरिष्ठजन, महिलाएं एवं बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे, जहाँ विधायक द्वारा विभिन्न प्रतियोगिताओं में प्रतिभाग करने वाले बच्चों को सम्मानित किया गया।
Hal मार्केट सी–ब्लॉक स्थित सब्जी मंडी में व्यापारियों ने विधायक का गर्मजोशी से स्वागत किया तथा उन्होंने उपस्थित जनसमूह को संबोधित भी किया।
इस अवसर पर भाजपा मंडल महामंत्री डैनिस सोनकर, संदीप पाठक, शशांक शेखर ‘गोल्डी’, बृजमोहन अवस्थी, मनोज श्रीवास्तव, प्रदीप शर्मा सहित भाजपा के वरिष्ठ पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
विधायक ओ. पी. श्रीवास्तव ने स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान को नमन करते हुए कहा कि आज हमें भारत माता के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ अर्पित करने का अवसर मिला है।
उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार की जनकल्याणकारी नीतियों के माध्यम से समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक विकास पहुँचा है जहाँ कभी अंधेरा था वहाँ आज रोशनी पहुँची है, जहाँ रास्ते नहीं थे वहाँ सड़कें बनी हैं और जहाँ आवाज़ नहीं थी वहाँ सरकार पहुँची है।
उन्होंने कहा कि बीते दशक में भारत ने आत्मविश्वास, परिवर्तन और पुनर्जागरण का नया अध्याय लिखा है। गरीबों को आवास, बिजली, पानी व स्वास्थ्य सुविधाएँ मिल रही हैं, युवाओं को रोजगार के अवसर, महिलाओं को सम्मान और सुरक्षा तथा व्यापारियों को प्रगति के नए द्वार खुले हैं।
विधायक ने कहा कि आज पूरा विश्व भारत को आशा और भरोसे की दृष्टि से देख रहा है और यह दशक भारत के अभ्युदय का दशक सिद्ध हो रहा है।
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