विज्ञान, समाज और शासन में महिलाओं की भागीदारी पर सीमैप में हुई चर्चा

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लखनऊ: कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि प्रो. मनुका खन्ना (पूर्व कुलपति, लखनऊ विश्वविद्यालय), विशिष्ट अतिथि पूजा गर्ग (प्रेसिडेंट-इलेक्ट, फिक्की फ्लो) तथा अन्य आमंत्रित गणमान्य अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ किया गया। इस अवसर पर डॉ. अरविंद सिंह नेगी ने सभी गणमान्य अतिथियों का स्वागत करते हुए उनका सम्मान किया।

कार्यक्रम में “विकसित भारत की दिशा में विज्ञान, समाज और शासन को आकार देती महिलाएँ: चुनौतियाँ और आगे की राह” विषय पर एक पैनल चर्चा आयोजित की गई।

इस चर्चा में राष्ट्रीय विकास को आगे बढ़ाने में महिलाओं की बदलती भूमिका तथा विभिन्न प्रमुख क्षेत्रों में उनकी भागीदारी को प्रभावित करने वाली चुनौतियों पर विचार-विमर्श किया गया।

इस कार्यक्रम में महिलाओं और बालिकाओं के अधिकार, न्याय और सार्थक कार्रवाई के समर्थन में विभिन्न क्षेत्रों की आवाज़ों को एक मंच पर लाया गया। वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि विज्ञान, सामाजिक विकास और शासन में महिलाओं को नेता, नवप्रवर्तक और निर्णयकर्ता के रूप में सशक्त बनाना अत्यंत आवश्यक है।

चर्चा के दौरान यह भी रेखांकित किया गया कि विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए महिलाओं की सक्रिय भागीदारी को मजबूत करना अनिवार्य है। साथ ही भविष्य की पीढ़ियों के लिए समावेशी अवसरों का निर्माण करने और चुनौतियों को दूर करने की रणनीतियों पर भी प्रकाश डाला गया।

डॉ. प्रेमा जी. वासुदेव ने अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के इतिहास और इसके महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह दिवस विश्वभर में महिलाओं की उपलब्धियों और उनके संघर्षों को सम्मान देने का प्रतीक है।

कार्यक्रम के दौरान मुख्य अतिथि और विशिष्ट अतिथि ने सीमैप की दो लाभार्थी महिला उद्यमियों—डॉ. पल्लवी सिंह और विनीता वर्मा—को सम्मानित किया। इस अवसर पर डॉ. संजय कुमार यादव ने अरोमा मिशन के माध्यम से महिला उद्यमिता और आर्थिक सशक्तिकरण को बढ़ावा देने में इसके प्रभाव पर प्रकाश डाला।

अपने संदेश में सीएसआईआर–सीमैप, लखनऊ, निदेशक डॉ. ज़बीर अहमद ने विज्ञान, नवाचार और उद्यमिता के क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी को मजबूत करने के प्रति संस्थान की प्रतिबद्धता को रेखांकित किया।

उन्होंने कहा कि सीएसआईआर अरोमा मिशन जैसी पहल औषधीय एवं सगंध पौधों की खेती के माध्यम से महिला-नेतृत्व वाले उद्यमों और सतत आजीविका को बढ़ावा दे रही हैं, जो विकसित भारत की परिकल्पना को साकार करने में सहायक हैं। पैनल चर्चा का संचालन डॉ. सुम्या पाठक ने किया।

उन्होंने सत्र की शुरुआत करते हुए प्रतिष्ठित पैनलिस्टों—प्रो. मनुका खन्ना (पूर्व कुलपति, लखनऊ विश्वविद्यालय), डॉ. पूजा गर्ग (प्रेसिडेंट-इलेक्ट, फिक्की फ्लो), डॉ. विद्यु साने (वैज्ञानिक, सीएसआईआर– एनबीआरआई), डॉ. नीति कुमार (वैज्ञानिक-ई, सीएसआईआर– सीडीआरआई) और डॉ. पूजा खरे (वैज्ञानिक-एफ, सीएसआईआर–सीमैप)—का स्वागत किया।

पैनलिस्टों ने विभिन्न क्षेत्रों में महिलाओं के उत्कृष्ट प्रदर्शन और नेतृत्व की संभावनाओं से जुड़े कई प्रश्नों पर अपने विचार साझा किए। यह सत्र अत्यंत प्रेरणादायक और सहभागितापूर्ण रहा, जिसमें वक्ताओं ने अपने पेशेवर जीवन के अनुभवों और प्रेरक कहानियों को साझा किया।

चर्चा के प्रमुख निष्कर्षों में समान अवसर, स्वामित्व की भावना, नेतृत्व क्षमता, जोखिम उठाने का साहस, दृढ़ता, लैंगिक पूर्वाग्रहों का सामना और आत्मविश्वास जैसे विषय शामिल रहे। इस दौरान श्रोताओं, विशेषकर छात्रों द्वारा भी प्रश्न पूछे गए।

कार्यक्रम में पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय, अलीगंज, कनोसा स्कूल, फरीदी नगर, लखनऊ तथा एआईएमएस फाउंडेशन, लखनऊ (एनजीओ) के छात्र-छात्राओं ने भी भाग लिया। इसके बाद वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद, साइंस क्लब, सीएसआईआर–सीमैप द्वारा आयोजित प्रतियोगिताओं के विजेताओं को पुरस्कार वितरित किए गए।

इस अवसर पर संस्थान की महिला कर्मचारियों—प्रशासनिक स्टाफ, वैज्ञानिकों, तकनीकी स्टाफ तथा महिला पोस्ट-डॉक्टोरल फेलो—को भी उनके महत्वपूर्ण योगदान के लिए गणमान्य अतिथियों द्वारा सम्मानित किया गया।

मुख्य अतिथि प्रो. मनुका खन्ना ने अपने संबोधन में समाज, विज्ञान और शासन के निर्माण में महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला और महिलाओं को आत्मविश्वास तथा दृढ़ संकल्प के साथ नेतृत्व की भूमिकाएँ निभाने के लिए प्रेरित किया।

उन्होंने यह भी कहा कि वास्तविक महिला सशक्तिकरण तभी संभव है जब सभी क्षेत्रों में महिलाओं को समान अवसर, सहयोगात्मक कार्य वातावरण और समावेशी नीतियाँ उपलब्ध हों।

कार्यक्रम का समापन डॉ. प्रेमा जी. वासुदेव द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ, जिसमें उन्होंने कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए सभी गणमान्य अतिथियों, प्रतिभागियों और आयोजन टीम के प्रति आभार व्यक्त किया।

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