संस्कृति और रचनात्मकता का मेल, ‘मास्करेड ऑफ आर्ट’ में दिखी नई सोच

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लखनऊ: सेठ आनंदराम जयपुरिया स्कूल, लखनऊ का परिसर इन दिनों कल्पना और रचनात्मकता के रंगों से सजा हुआ है, क्योंकि विद्यालय की वार्षिक कला प्रदर्शनी ‘मास्करेड ऑफ आर्ट’ अब आम जनता के लिए खुल गई है।

24 मार्च से शुरू हुई इस प्रदर्शनी में शहर भर से अभिभावकों, विद्यार्थियों और कला प्रेमियों की उत्साहपूर्ण भागीदारी देखने को मिल रही है। यह प्रदर्शनी केवल एक प्रदर्शन नहीं, बल्कि एक अनोखा कलात्मक अनुभव है। यहाँ हर कलाकृति भावनाओं को छूती है और हर रचना बच्चों की असीम कल्पनाशक्ति को दर्शाती है।

प्रदर्शनी में कला की विभिन्न शैलियों का सुंदर संगम देखने को मिलता है। इसमें बारीकी से बनाए गए कथकली मास्क, जनजातीय कला से प्रेरित कृतियाँ, और आधुनिक पाश्चात्य डिज़ाइन शामिल हैं, जो पहचान और संस्कृति के विषयों को दर्शाते हैं।

जयपुरिया स्कूल में कला के उत्सव को आम लोगों ने सराहा

दर्शक वारली कला की सादगी, प्राकृतिक दृश्यों की शांति, अमूर्त चित्रों की गहराई और भावनात्मक पोर्ट्रेट्स की अभिव्यक्ति का भी आनंद ले सकते हैं। इस प्रदर्शनी का एक मुख्य आकर्षण एक विशाल भित्ति चित्र (म्यूरल) है, जिसमें सिरेमिक और पेंटिंग का अनोखा मेल देखने को मिलता है।

इस अवसर पर विद्यालय की प्रधानाचार्या पूनम कोचित्ती ने कहा: “जयपुरिया में हम मानते हैं कि शिक्षा केवल पढ़ाई तक सीमित नहीं है।

यह प्रदर्शनी हमारे विद्यार्थियों में रचनात्मकता, आत्मविश्वास और संस्कृति के प्रति सम्मान को बढ़ावा देने की हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाती है। यहाँ की हर कलाकृति प्रतिभा के साथ-साथ अभिव्यक्ति के साहस और अलग सोच को भी दिखाती है।”

विद्यार्थियों ने भी अपने कार्य को लोगों के सामने प्रस्तुत करने पर गर्व व्यक्त किया। एक विद्यार्थी ने कहा: “लोगों को हमारी बनाई हुई चीज़ों को देखते और सराहते हुए देखना बहुत अच्छा लगता है। हमारी कला के माध्यम से हम अपनी सोच और भावनाएँ भी साझा कर रहे हैं।”

‘मास्करेड ऑफ आर्ट’ प्रदर्शनी 27 मार्च तक प्रतिदिन सुबह 9:00 बजे से दोपहर 1:00 बजे तक विद्यालय परिसर में खुली रहेगी। प्रवेश निःशुल्क है और सभी कला प्रेमियों एवं आम जनता के लिए यह प्रदर्शनी खुली है।

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