लखनऊ। ‘मंचकृति’ संस्था की ओर से आयोजित तीन दिवसीय बाबू हरदयाल वास्तव हास्य नाट्य समारोह की दूसरी शाम शनिवार, 10 अक्टूबर को संगीतमय हास्य नाटक ‘माय स्वीट हार्ट’ का मंचन किया गया। भारतीयम् और शिवांजना एंटरटेनमेंट्स की प्रस्तुति का निर्देशन पुनीत अस्थाना और राजीव रंजन ने किया।
बाबू हरदयाल वास्तव हास्य नाट्य समारोह की दूसरी शाम हुआ मंचन
गोमतीनगर स्थित अंतरराष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान के ऑडिटोरियम में हुए इस मंचन में कलाकारों ने हास्यपूर्ण घटनाक्रम और उलझते रिश्तों के जरिए दर्शकों का मनोरंजन किया।
नाटक का कथानक दिलफेंक स्वभाव के दीनानाथ के इर्द-गिर्द घूमता है, जो पति से अलग रह रही प्रिया के प्रेम में पड़ जाता है। कहानी में नया मोड़ तब आता है, जब दीनानाथ की पत्नी और बच्चे भी प्रिया के साथ रहने पहुंच जाते हैं। इसके बाद रिश्तों की उलझनें और हास्यास्पद परिस्थितियां लगातार बढ़ती जाती हैं।
कहानी उस समय और दिलचस्प हो जाती है, जब दीनानाथ का दिल अपने बेटे की महिला मित्र पर आ जाता है। वहीं, बेटे प्रकाश को अपने ही पिता की प्रेमिका प्रिया से प्रेम हो जाता है।
इसी बीच दीनानाथ की बेटी भी अपने प्रेमी के साथ वहां पहुंच जाती है। बाद में पता चलता है कि बेटी का प्रेमी प्रिया का पति है। इस खुलासे के बाद सभी किरदारों के रिश्तों की गुत्थी और उलझ जाती है।
आखिरकार बेटे की दोस्त, जो वास्तव में बेटी की सहपाठी होती है, पूरे घटनाक्रम की सच्चाई सामने लाती है। पता चलता है कि यह पूरा नाटक प्रिया को उसके पति से मिलाने और दीनानाथ को उसके परिवार के पास वापस लाने के लिए रचा गया था। कहानी के अप्रत्याशित मोड़ों और हास्यपूर्ण स्थितियों ने मंचन को रोचक बनाए रखा।
कलाकारों के अभिनय ने जीता दिल
नाटक में दीनानाथ यानी पापा की भूमिका राजीव रंजन सिंह ने निभाई, जबकि प्रिया के किरदार में पूजा सिंह प्रियदर्शिनी नजर आईं। पिंकी की भूमिका प्रभाती पांडेय ने अदा की।
प्रकाश के रूप में सोम गांगुली, शोभा के रूप में पारुल कांत, जोहरा के रूप में जारा हयात, सखाराम के रूप में लखन केसवानी और आगंतुक दर्शक की भूमिका में अरुणा पांडेय ने अभिनय किया।
मंच परिकल्पना एवं संचालन गोपाल सिन्हा और मनीष सैनी ने किया। मंच सज्जा की जिम्मेदारी आशुतोष ने संभाली। रूपसज्जा शहीर ने की, जबकि संगीत संचालन रामेन्द्र लाल का रहा। वेशभूषा की परिकल्पना पूजा सिंह ने की। कार्यक्रम का मंच संचालन वरिष्ठ रंगकर्मी गोपाल सिन्हा ने किया।
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