लखनऊ। उत्तर प्रदेश में खेल प्रतिभाओं को बेहतर प्रशिक्षण के साथ अत्याधुनिक चिकित्सा और खेल विज्ञान की सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में योगी सरकार एक महत्वपूर्ण कदम बढ़ा रही है। राजधानी के गुरु गोविंद सिंह स्पोर्ट्स कॉलेज में प्रदेश के पहले स्पोर्ट्स साइंस एंड इंजरी मैनेजमेंट सेंटर की स्थापना की जा रही है।
करीब 7.17 करोड़ रुपये की लागत से तैयार होगा प्रदेश का पहला सेंटर
करीब 7.17 करोड़ रुपये की लागत से तैयार होने वाले इस सेंटर में खिलाड़ियों की फिटनेस, खेल संबंधी चोटों के उपचार, फिजियोथेरेपी, पुनर्वास, पोषण, मानसिक स्वास्थ्य और प्रदर्शन सुधार से जुड़ी सुविधाएं एक ही छत के नीचे उपलब्ध होंगी।
सेंटर के तैयार होने के बाद प्रदेश के खिलाड़ियों को खेल संबंधी चोटों के इलाज और आधुनिक पुनर्वास के लिए दूसरे राज्यों का रुख नहीं करना पड़ेगा।
यहां राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की अत्याधुनिक चिकित्सा एवं खेल विज्ञान सुविधाएं उपलब्ध कराने की योजना है। इससे खिलाड़ियों को समय पर उपचार मिलने के साथ चोट से उबरने और मैदान पर वापसी की प्रक्रिया भी अधिक प्रभावी हो सकेगी।
एक ही छत के नीचे चोटों के उपचार, पुनर्वास, फिटनेस और खेल विज्ञान की आधुनिक सुविधाएं
स्पोर्ट्स साइंस एंड इंजरी मैनेजमेंट सेंटर का उद्देश्य केवल घायल खिलाड़ियों का उपचार करना नहीं है, बल्कि उनकी शारीरिक क्षमता का वैज्ञानिक मूल्यांकन कर प्रदर्शन में लगातार सुधार करना भी है। सेंटर में फिजियोथेरेपी, स्पोर्ट्स साइंस आधारित प्रशिक्षण, पोषण संबंधी परामर्श और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े मार्गदर्शन की सुविधा उपलब्ध होगी।
खिलाड़ियों की फिटनेस का वैज्ञानिक आकलन कर उनकी जरूरत के अनुसार प्रशिक्षण और रिकवरी की रणनीति तैयार की जाएगी। चोट लगने के बाद उपचार और पुनर्वास से लेकर मैदान पर वापसी तक खिलाड़ियों को विशेषज्ञों की निगरानी में सहायता मिलेगी।
7.17 करोड़ रुपये की स्वीकृति, निर्माण कार्य प्रगति पर
स्पोर्ट्स साइंस एंड इंजरी मैनेजमेंट सेंटर की स्थापना के लिए शासन की ओर से 716.77 लाख रुपये यानी करीब 7.17 करोड़ रुपये** की स्वीकृति प्रदान की गई है। परियोजना के तहत खिलाड़ियों के लिए आधुनिक चिकित्सा, पुनर्वास और खेल विज्ञान से जुड़ा मजबूत सपोर्ट सिस्टम तैयार किया जा रहा है।
उत्तर प्रदेश में अभी तक इस तरह की एकीकृत सुविधा उपलब्ध नहीं थी। खास बात यह है कि सेंटर में खिलाड़ियों के साथ आम लोगों को भी उपचार और पुनर्वास की सुविधा दिए जाने का प्रस्ताव है। निर्धारित शुल्क देकर आमजन भी यहां अपनी चोटों का इलाज और पुनर्वास करा सकेंगे।
सात अत्याधुनिक उपकरणों से लैस होगा सेंटर
सेंटर में उपचार, रिकवरी और पुनर्वास के लिए सात प्रमुख अत्याधुनिक उपकरण लगाए जाएंगे। इनमें होल बॉडी क्रायोथेरेपी चैंबर, रेडियल शॉकवेव थेरेपी डिवाइस, टीईसीएआर चिकित्सा उपकरण, प्न्यूमैटिक कंप्रेशन थेरेपी यूनिट, कॉम्बो पेन मैनेजमेंट इलेक्ट्रोथेरेपी यूनिट, क्लास-4 चिकित्सीय लेजर प्रणाली, फोकस्ड शॉकवेव थेरेपी यूनिट शामिल हैं।
होल बॉडी क्रायोथेरेपी चैंबर में तरल नाइट्रोजन के बजाय बिजली से संचालित क्रायोथेरेपी कक्ष की सुविधा होगी। इसमें -120 से -140 डिग्री सेल्सियस तक तापमान उपलब्ध होगा। वहीं रेडियल शॉकवेव थेरेपी डिवाइस दो एकीकृत कंप्रेसर के माध्यम से 20 हर्ट्ज तक के इम्पल्स देने में सक्षम होगा।
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टीईसीएआर चिकित्सा उपकरण के जरिए उच्च आवृत्ति इलेक्ट्रोथेरेपी से गहरे ऊतकों के उपचार की सुविधा मिलेगी। इसका उपयोग धाव, टेंडन, लिगामेंट, जोड़ और मांसपेशियों से जुड़ी समस्याओं के उपचार में किया जा सकेगा।
प्न्यूमैटिक कंप्रेशन थेरेपी यूनिट के जरिए दोनों पैरों, भुजाओं, कमर और शरीर के विभिन्न हिस्सों का एक साथ उपचार किया जा सकेगा। खिलाड़ियों की रिकवरी और पुनर्वास में यह सुविधा विशेष रूप से उपयोगी होगी।
कॉम्बो पेन मैनेजमेंट इलेक्ट्रोथेरेपी यूनिट में समकालिक, वैकल्पिक, पृथक और क्रमिक चैनल मोड में इलेक्ट्रोस्टिमुलेशन की सुविधा होगी। इसके माध्यम से गैल्वैनिक, फैराडिक, ट्रेबर्ट, अल्ट्रा राइज, हाई वोल्ट, माइक्रो करंट और टीईएनएस जैसी विभिन्न करंट थेरेपी उपलब्ध होगी।
क्लास-4 चिकित्सीय लेजर प्रणाली में बैकलिट टच स्क्रीन डिस्प्ले और क्लास-4 जीएएआईएएस डायोड लेजर स्रोत होगा। इसकी आउटपुट क्षमता न्यूनतम 10 वाट या उससे अधिक होगी।
फोकस्ड शॉकवेव थेरेपी यूनिट का उपयोग मायोफेशियल ट्रिगर प्वाइंट, पीठ और गर्दन के दर्द जैसी समस्याओं के उपचार में किया जा सकेगा। इसके अलावा कैल्सिफिक टेंडिनोपैथी जैसी समस्याओं के उपचार में भी यह उपयोगी होगी।
सिविल कार्य जारी, उपकरणों की खरीद जल्द
सेंटर का सिविल निर्माण कार्य वर्तमान में प्रगति पर है। वहीं अत्याधुनिक चिकित्सा एवं खेल विज्ञान उपकरणों की खरीद के लिए कार्यदायी संस्था की ओर से टेंडर प्रक्रिया पूरी की जा चुकी है। टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद उपकरणों की खरीद की कार्रवाई शुरू की जाएगी।
परियोजना को कार्य शुरू होने की तिथि से एक वर्ष की समय सीमा में पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। सेंटर के तैयार होने के बाद खिलाड़ियों को उपचार, रिकवरी और प्रदर्शन सुधार के लिए एकीकृत सुविधा उपलब्ध हो सकेगी।
प्रशिक्षकों और खेल विशेषज्ञों को भी मिलेगा प्रशिक्षण
सेंटर को केवल खिलाड़ियों के उपचार तक सीमित नहीं रखा जाएगा। इसे प्रशिक्षकों, खेल अधिकारियों और खेल विज्ञान से जुड़े विशेषज्ञों के क्षमता विकास के मंच के रूप में भी विकसित किया जाएगा।
यहां प्रशिक्षण और क्षमता विकास से जुड़ी सुविधाएं उपलब्ध होंगी, जिससे खेल से जुड़े मानव संसाधन को आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों और चोट प्रबंधन की बेहतर जानकारी मिल सकेगी।
खिलाड़ियों के लिए मजबूत होगा सपोर्ट सिस्टम
उत्तर प्रदेश सरकार खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण के साथ अत्याधुनिक चिकित्सा और खेल विज्ञान की सुविधाएं उपलब्ध कराने पर जोर दे रही है। स्पोर्ट्स साइंस एंड इंजरी मैनेजमेंट सेंटर इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
सेंटर के शुरू होने के बाद खिलाड़ियों को फिटनेस आकलन, चोटों के उपचार, फिजियोथेरेपी, पुनर्वास, पोषण, मानसिक स्वास्थ्य और प्रदर्शन सुधार से जुड़ी सुविधाएं एक ही स्थान पर मिल सकेंगी। इससे प्रदेश के खिलाड़ियों को चोट के बाद जल्द और वैज्ञानिक तरीके से रिकवरी करने तथा उच्च स्तर की प्रतियोगिताओं में प्रभावी वापसी करने में मदद मिलेगी।













