संवैधानिक तरीकों से ही सामाजिक और आर्थिक बदलाव संभव: राजनाथ

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लखनऊ। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने युवाओं से ज्ञान, संवैधानिक मूल्यों और सामूहिक प्रयासों के जरिए देश के विकास में योगदान देने का आह्वान करते हुए कहा कि डॉ. बी.आर. अंबेडकर का मंत्र ‘शिक्षित हो, आंदोलन करो और संगठित हो’

केवल शिक्षा प्राप्त करने का संदेश नहीं है, बल्कि अन्याय के खिलाफ संवैधानिक तरीके से आवाज उठाने और लोकतांत्रिक बदलाव के लिए एकजुट होने की प्रेरणा भी देता है।

राजनाथ सिंह शनिवार को लखनऊ स्थित बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि डॉ. अंबेडकर ने संविधान सभा में अपने अंतिम भाषण में स्पष्ट किया था कि सामाजिक और आर्थिक उद्देश्यों को हासिल करने के लिए संवैधानिक साधनों का ही इस्तेमाल किया जाना चाहिए।

जब लोकतांत्रिक और संवैधानिक रास्ते उपलब्ध हों, तब हिंसा, अराजकता या असंवैधानिक तरीकों का सहारा लेना उचित नहीं है। डॉ. अंबेडकर ने ऐसे तरीकों को ‘अराजकता का व्याकरण’ बताते हुए उन्हें त्यागने की बात कही थी।

रक्षा मंत्री ने कहा कि विश्वविद्यालयों का दायित्व केवल डिग्री प्रदान करना नहीं, बल्कि ऐसे युवाओं को तैयार करना है जो न्याय, समानता, स्वतंत्रता और बंधुत्व जैसे संवैधानिक आदर्शों से प्रेरित होकर राष्ट्र निर्माण में सार्थक योगदान दें।

उन्होंने कहा कि सच्ची शिक्षा व्यक्ति में सोचने-समझने की क्षमता विकसित करने के साथ व्यावहारिक और समस्या-समाधान के कौशल को भी मजबूत करती है। इसका सबसे महत्वपूर्ण उद्देश्य यह होना चाहिए कि व्यक्ति अपने ज्ञान और क्षमताओं का इस्तेमाल समाज के हित में करे और उसके भीतर मानवीय संवेदनशीलता एवं नैतिक मूल्यों का विकास हो।

उन्होंने डॉ. अंबेडकर के चरित्र और विनम्रता पर दिए गए जोर का उल्लेख करते हुए कहा कि ज्ञान और उपलब्धियां तभी सार्थक हैं, जब उनके साथ अच्छे आचरण और नैतिक मूल्यों का समावेश हो।

स्वामी विवेकानंद के विचारों का उल्लेख करते हुए उन्होंने युवाओं से केवल नौकरी पाने की दिशा में आगे बढ़ने के बजाय रोजगार सृजनकर्ता, समस्या समाधानकर्ता और सकारात्मक परिवर्तन के उत्प्रेरक बनने का आह्वान किया।

‘टीम इंडिया’ के रूप में विकसित भारत के लक्ष्य में योगदान दें युवा

राजनाथ सिंह ने कहा कि दुनिया तेजी से बदल रही है और नई तकनीकें तथा नवाचार लगातार नए अवसर पैदा कर रहे हैं। ऐसे में युवाओं के लिए निरंतर सीखते रहना और बदलती परिस्थितियों के अनुरूप खुद को तैयार करना जरूरी है।

उन्होंने कहा कि जो युवा नए कौशल सीखने और अपने ज्ञान को लगातार अपडेट करने के लिए तैयार हैं, वे भविष्य की चुनौतियों का बेहतर ढंग से सामना कर सकेंगे।

राष्ट्र निर्माण में सामूहिक प्रयासों को महत्वपूर्ण बताते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि व्यक्तिगत प्रयास विकास में योगदान देते हैं, लेकिन जब पूरा देश एकजुट संकल्प के साथ आगे बढ़ता है तो विकास की गति कई गुना बढ़ जाती है।

उन्होंने युवाओं से ‘टीम इंडिया’ की भावना के साथ काम करने और वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने में अपनी भूमिका निभाने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा कि सफलता हमेशा अनुकूल परिस्थितियों में ही नहीं मिलती। कई बार विपरीत परिस्थितियां ही व्यक्ति और राष्ट्र की क्षमता को सामने लाती हैं। दृढ़ संकल्प, धैर्य और कड़ी मेहनत के जरिए चुनौतियों को अवसरों में बदला जा सकता है।

आत्मनिर्भर भारत और तकनीकी विकास का उल्लेख

रक्षा मंत्री ने कहा कि पिछले एक दशक में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने चुनौतियों को अवसरों में बदलने के लिए कई क्षेत्रों में काम किया है। आत्मनिर्भर भारत के अभियान के तहत सेमीकंडक्टर विनिर्माण, डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना, स्टार्टअप और विनिर्माण क्षेत्र को बढ़ावा दिया गया है।

अंतरिक्ष क्षेत्र में भारत की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि देश सीमित संसाधनों के साथ अंतरिक्ष मिशन शुरू करने के दौर से आगे बढ़कर मानव अंतरिक्ष उड़ान और भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन जैसे महत्वाकांक्षी कार्यक्रमों की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

उन्होंने अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी कंपनियों और स्टार्टअप की बढ़ती भूमिका का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार भारतीय अंतरिक्ष स्टार्टअप प्रक्षेपण यान और उपग्रह प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्रगति कर रहे हैं।

शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्र में हुई प्रगति का उल्लेख करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि अनुसंधान एवं विकास पर देश का खर्च बढ़ा है और 34 वर्षों के बाद नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति लागू की गई है।

उन्होंने कहा कि भारतीय युवा अंतरराष्ट्रीय ओलंपियाड में बेहतर प्रदर्शन करने के साथ स्टार्टअप शुरू कर रहे हैं, यूनिकॉर्न कंपनियां बना रहे हैं और उन्नत तकनीकों के विकास में योगदान दे रहे हैं।

उन्होंने कहा कि भारत वैश्विक नवाचार सूचकांक में लगातार ऊपर बढ़ रहा है और दुनिया के तीसरे सबसे बड़े स्टार्टअप इकोसिस्टम के रूप में अपनी स्थिति मजबूत कर चुका है।

सरकार ऐसा इकोसिस्टम विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है, जिसमें युवा समाज की समस्याओं के समाधान खोजने, नए प्रयोग करने, नवाचार करने और अपने विचारों को विकसित करने के लिए स्वतंत्र वातावरण पा सकें।

‘आर्थिक शक्ति देश को समृद्ध बनाती है, सांस्कृतिक आत्मविश्वास महान’

राजनाथ सिंह ने कहा कि विकसित भारत और आत्मनिर्भर भारत का लक्ष्य केवल आर्थिक विकास तक सीमित नहीं है। किसी राष्ट्र की वास्तविक शक्ति उसकी संस्कृति, सभ्यता और विरासत के प्रति उसके आत्मविश्वास से भी तय होती है।

उन्होंने कहा कि आर्थिक शक्ति किसी राष्ट्र को समृद्ध बनाती है, जबकि सांस्कृतिक आत्मविश्वास उसे महान बनाता है। उन्होंने भारतीय भाषाओं, भारतीय ज्ञान परंपरा और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण एवं प्रोत्साहन की आवश्यकता पर जोर दिया।

रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत आज केवल एक प्रमुख अर्थव्यवस्था के रूप में ही नहीं, बल्कि अपनी सभ्यता, संस्कृति और क्षमताओं में विश्वास रखने वाले राष्ट्र के रूप में भी आगे बढ़ रहा है।

उन्होंने कहा कि आज दुनिया भारत की बात को गंभीरता से सुनती है और देश केवल वैश्विक नियमों का पालन करने वाला नहीं, बल्कि नियमों को आकार देने वाला देश भी बन रहा है। उन्होंने कहा कि आज की पीढ़ी को अपनी राष्ट्रीय पहचान पर गर्व है, अपनी सभ्यता पर विश्वास है और भविष्य को लेकर आत्मविश्वास है।

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यही बदलाव नए भारत की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धियों में से एक है। उन्होंने कहा कि ‘भारत में विश्वास’ की भावना ही ‘मेक इन इंडिया’ जैसे अभियानों की सफलता का आधार है।

इस अवसर पर उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर राज कुमार मित्तल तथा विश्वविद्यालय के संकाय सदस्य एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

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