ग्रासरूट से गोल्ड तक, पंजाब एफसी ने रचा सफलता का नया फॉर्मूला

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मोहाली : कागज़ पर पंजाब एफसी की एआईएफएफ एलीट यूथ लीग फाइनल में जिंक फुटबॉल अकादमी पर 3-0 की जीत एक प्रभावशाली प्रदर्शन लग सकती है। लेकिन वास्तविकता में यह उससे कहीं अधिक था—यह उस दीर्घकालिक प्रक्रिया का प्रतिबिंब था, जो पिछले कुछ वर्षों से पंजाब के फुटबॉल परिदृश्य में विकसित हो रही है।

गढ़शंकर में मिली ट्रॉफी इस यात्रा का परिणाम थी, जिसकी नींव राज्यभर में फैले प्रशिक्षण मैदानों, छोटे शहरों और लगातार बढ़ते डेवलपमेंट सेंटर नेटवर्क में रखी गई थी।

संरचना के साथ विस्तार

अप्रैल 2026 में पंजाब एफसी ने अपने ग्रासरूट नेटवर्क का विस्तार करते हुए बटाला, बिलगा, खोथरा, पनम, मोगा और पटियाला में छह नए डेवलपमेंट सेंटर शुरू किए। प्रत्येक सेंटर में 75 खिलाड़ियों (50 लड़के और 25 लड़कियां) का संरचित चयन किया गया है, जो क्लब की समावेशी और व्यापक दृष्टि को दर्शाता है।

इन नए केंद्रों के साथ क्लब का नेटवर्क पंजाब भर में 32 केंद्रों तक पहुंच गया है, जो भारतीय फुटबॉल में सबसे व्यापक ग्रासरूट संरचनाओं में से एक है। महत्वपूर्ण यह है कि यह विस्तार केवल संख्या बढ़ाने तक सीमित नहीं है—हर केंद्र एक निर्धारित ढांचे के तहत काम करता है, जिससे कोचिंग, विकास और खिलाड़ी प्रगति में निरंतरता बनी रहती है।

फुटबॉल डेवलपमेंट सेंटर के डिप्टी लीड बिक्रमजीत सिंह ने कहा, “डेवलपमेंट सेंटर स्तर पर हमारा उद्देश्य युवा खिलाड़ियों के लिए सही माहौल तैयार करना है, जहां वे खेल को सीख सकें और उसका आनंद ले सकें। नए केंद्रों के साथ हम अधिक बच्चों तक पहुंच बना पा रहे हैं और उन्हें शुरुआती स्तर से संरचित कोचिंग दे पा रहे हैं।”

एकीकृत विकास मॉडल

पंजाब एफसी की रणनीति का केंद्र एक ऐसा सिस्टम है, जो विखंडन के बजाय एक रूपता पर आधारित है। ग्रासरूट से लेकर एलीट अकादमी तक, खिलाड़ी एक स्पष्ट संरचना के तहत आगे बढ़ते हैं, जिसमें तकनीकी प्रशिक्षण के साथ-साथ फिटनेस, पोषण, शिक्षा और मानसिक सहयोग शामिल है।

ऑल इंडिया फुटबॉल फेडरेशन (एआईएफएफ) द्वारा फाइव-स्टार मान्यता प्राप्त अकादमी इस सोच का उदाहरण है। यहां खिलाड़ियों को सिर्फ फुटबॉल ही नहीं, बल्कि शिक्षा, मेडिकल सपोर्ट और उच्चस्तरीय इंफ्रा स्ट्रक्चर भी उपलब्ध कराया जाताहै , ताकि वे मैदान के अंदर और बाहर दोनों जगह दीर्घकालिक सफलता हासिल कर सकें।

यूथ प्रोग्राम के टेक्निकल डायरेक्टर ज्यूसेप्पे क्रिस्टाल्डी ने कहा, “हमारा फोकस हमेशा एक संपूर्ण विकास इको सिस्टम तैयार करने पर रहा है। ग्रासरूट विस्तार और एलीट यूथ लीग में सफलता, दोनों एक ही दर्शन के परिणाम हैं—सतत कोचिंग, स्पष्ट मार्ग और युवाओं में दीर्घकालिक निवेश।”

परिणाम देने वाला मार्ग

इस संरचना का प्रभाव अब स्पष्टरूप से दिखाई देने लगा है। पंजाब एफसी की अकादमी अबतक सीनियर और आयु वर्ग स्तर पर 15 भारतीय अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी तैयार कर चुकी है, और राष्ट्रीय टीमों  में इसकी उपस्थिति लगातार बढ़ रही है।

हाल ही में सैफ अंडर-20 चैंपियनशिप में भारत की टीम में पंजाब एफसी के छह खिलाड़ी शामिल थे। पाकिस्तान के खिलाफ 3-0 की जीत में तीनों गोल अकादमी के खिलाड़ियों ने किए—विशाल यादव ने शुरुआत की, जबकि ओमांग डोडुम ने दो गोल दागे।

यह केवल गोल तक सीमित नहीं था, बल्कि खिलाड़ियों के बीच तालमेल और समझ भी उसी प्रणाली का परिणाम थी, जिसमें वे एक साथ विकसित हुए हैं। क्रिस्टाल्डी ने आगे कहा, “हमारे सिस्टम में हर खिलाड़ी को अपने आगे का रास्ता स्पष्ट होता है। ग्रासरूट से अकादमी और उससे आगे तक निरंतरता है। हालिया नतीजे इसी तालमेल को दर्शाते हैं।”

प्रदर्शन में प्रमाण

एलीट यूथ लीग फाइनल में भी यही तालमेल देखने को मिला। पहले हाफ में नियंत्रण बनाए रखने के बाद पंजाब एफसी ने 69वें मिनट में करिश सोराम के गोल से बढ़त हासिल की। इसके बाद कप्तान विशाल यादव ने तुरंत दूसरा गोल किया और थोंग्राम ऋषिकांता सिंह ने तीसरा गोलकर दस मिनट के भीतर मैच का रुख तय कर दिया।

3-0 की इस जीत के साथ पंजाब एफसी ने अंडर-17 स्तर पर लगातार दूसरा राष्ट्रीय खिताब जीता। इससे भी अधिक महत्वपूर्ण यह था कि यह एक टीम की सफलता नहीं, बल्कि एक प्रणाली की निरंतरता का परिणाम था।

बदलती फुटबॉल संस्कृति

पंजाब की खेल पहचान लंबे समय तक हॉकी और कबड्डी से जुड़ी रही है, लेकिन अब यह बदल रही है। राज्यभर में ट्रेनिंग ग्राउंड्स अब नियमित रूप से सक्रिय हैं, संरचित कोचिंग ने अनौपचारिक खेल की जगह ले ली है, और लड़कियों की भागीदारी भी लगातार बढ़ रही है।

फुटबॉल अब केवल एक खेल नहीं रह गया है—यह एक संभावित करियर मार्ग बनता जा रहा है, जहां अनुशासन, शिक्षा और सामुदायिक जुड़ाव भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं जितना मैदान पर प्रदर्शन।

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