हैदराबाद। आर्चरी प्रीमियर लीग (एपीएल) के दूसरे सत्र के साथ तीरंदाजी के एक अनूठे और रोमांचक आयोजन का आगाज हो गया है।
इसमें एशियाई खेलों के पदक विजेता भारतीय तीरंदाजों के साथ अनुभवी खिलाड़ियों और दुनिया के दिग्गज तीरंदाजों का जमावड़ा देखने को मिल रहा है। एपीएल का दूसरा सत्र 8 से 18 अक्टूबर तक हैदराबाद के नेकलेस रोड स्थित पीपुल्स प्लाजा में खेला जा रहा है।
हर तीर के लिए औसतन 15 सेकंड का समय और टाई होने पर हिट या मिस शूटऑफ
एशियाई खेलों और विश्व कप जैसी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं से आर्चरी प्रीमियर लीग का प्रारूप किस तरह अलग है? लीग में मुकाबलों को रोमांचक बनाने के लिए 15 सेकंड की शॉट क्लॉक और बराबरी की स्थिति में हिट या मिस शूटऑफ जैसे खास नियम शामिल किए गए हैं। आइए, जानते हैं एपीएल के नियमों और इसके अनूठे प्रारूप के बारे में।
एपीएल की सबसे बड़ी खासियत रिकर्व और कंपाउंड तीरंदाजों का एक ही मिश्रित टीम प्रारूप में मुकाबला करना है। अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में रिकर्व और कंपाउंड वर्गों में पुरुषों और महिलाओं के अलग-अलग टीम मुकाबले होते हैं।
रिकर्व और कंपाउंड तीरंदाज एक ही टीम में उतरकर मुकाबलों को बनाएंगे रोमांचक
इसके अलावा दोनों वर्गों में मिश्रित टीम स्पर्धाएं भी आयोजित की जाती हैं। हालांकि, एपीएल में दुनिया के शीर्ष रिकर्व और कंपाउंड तीरंदाज एक ही टीम के लिए साथ-साथ निशाना साधते नजर आते हैं।
इस लीग का सबसे रोमांचक पहलू है हर तीर के लिए लगभग 15 सेकंड का समय। खिलाड़ियों को निर्धारित समय के भीतर निशाना साधना होता है, जिससे मुकाबलों की रफ्तार और रोमांच दोनों बढ़ जाते हैं।
इसके अलावा, मुकाबला बराबरी पर समाप्त होने की स्थिति में हिट या मिस शूटऑफ का नियम भी इसे खास बनाता है। निशाने की दूरी और लक्ष्य का आकार अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के अनुरूप ही रखा गया है।
रिकर्व वर्ग में लक्ष्य 70 मीटर की दूरी पर होता है और उसका व्यास 122 सेंटीमीटर है। वहीं, कंपाउंड वर्ग में तीरंदाज 50 मीटर की दूरी से 80 सेंटीमीटर व्यास वाले लक्ष्य पर निशाना साधते हैं।
टीमों की संरचना
लीग की प्रत्येक फ्रेंचाइजी में आठ तीरंदाजों की टीम है। इसमें चार पुरुष और चार महिला खिलाड़ी शामिल हैं। प्रत्येक टीम में छह भारतीय और दो विदेशी तीरंदाज हैं।
टीम में रिकर्व वर्ग के दो पुरुष और दो महिला तीरंदाजों के साथ कंपाउंड वर्ग के दो पुरुष और दो महिला तीरंदाज शामिल हैं। लीग में छह फ्रेंचाइजी टीमें हिस्सा ले रही हैं। इनमें माइटी मराठाज, राजपूताना रॉयल्स, पृथ्वीराज योद्धाज, काकतीय नाइट्स, चेरो आर्चर्स और चोला चीफ्स शामिल हैं। इन टीमों में कुल 36 भारतीय और 12 अंतरराष्ट्रीय तीरंदाज हैं।
लीग का प्रारूप
छहों टीमें डबल राउंड रॉबिन प्रारूप में खेलेंगी। इस दौरान प्रत्येक टीम दूसरी पांचों टीमों से दो-दो बार भिड़ेगी। इस तरह हर टीम लीग चरण में 10 मुकाबले खेलेगी और कुल 30 मैच होंगे।
लीग चरण के बाद अंक तालिका में शीर्ष चार स्थान हासिल करने वाली टीमें सेमीफाइनल में पहुंचेंगी। सेमीफाइनल के विजेता खिताबी मुकाबले में आमने-सामने होंगे। प्रत्येक शाम तीन मुकाबले खेले जाएंगे।
लीग चरण में जीतने वाली टीम को दो अंक मिलेंगे, जबकि हारने वाली टीम को कोई अंक नहीं मिलेगा। यदि अंक तालिका में किसी स्थान पर दो या अधिक टीमें बराबरी पर रहती हैं,
तो पहले सेट अंकों के अंतर यानी हासिल किए गए कुल सेट अंकों में से गंवाए गए सेट अंकों को घटाकर स्थिति तय की जाएगी। इसके बाद आमने-सामने के मुकाबले के परिणाम और फिर औसत तीर स्कोर को आधार बनाया जाएगा।
ऐसे होगा मुकाबला
प्रत्येक मुकाबले की शुरुआत में हर टीम के चार तीरंदाज निशाना साधेंगे। इनमें रिकर्व वर्ग का एक पुरुष और एक महिला तथा कंपाउंड वर्ग का एक पुरुष और एक महिला तीरंदाज शामिल होंगे। मुकाबले के दौरान टीम में कम से कम एक विदेशी तीरंदाज का शामिल रहना अनिवार्य है।
टॉस के जरिए यह तय होगा कि कौन सी टीम पहले निशाना साधेगी या किस टीम को लक्ष्य के किस तरफ से निशाना साधना है। एक सेट में प्रत्येक टीम के चारों तीरंदाज दो-दो तीर चलाएंगे।
इस तरह एक टीम को कुल आठ तीर चलाने के लिए 120 सेकंड मिलेंगे। दोनों टीमें बारी-बारी से तीर चलाएंगी और प्रत्येक तीरंदाज को अपनी बारी में निर्धारित समय के भीतर निशाना साधना होगा।
एक सेट में दोनों टीमों के कुल स्कोर में जो टीम आगे रहेगी, उसे दो सेट अंक मिलेंगे। यदि दोनों टीमों का स्कोर बराबर रहता है, तो प्रत्येक टीम को एक-एक सेट अंक मिलेगा। हारने वाली टीम को कोई सेट अंक नहीं मिलेगा।
जो टीम सबसे पहले पांच या उससे अधिक सेट अंक हासिल कर लेगी, उसे विजेता घोषित कर दिया जाएगा। अधिकतम चार सेट के बाद यदि स्कोर 4-4 से बराबर रहता है, तो मुकाबले का फैसला एपीएल के विशेष हिट या मिस शूटऑफ से होगा।
अंतरराष्ट्रीय प्रारूप और एपीएल में समय का अंतर
- विश्व तीरंदाजी की मानक टीम स्पर्धा: छह तीर चलाने के लिए कुल 120 सेकंड यानी औसतन 20 सेकंड प्रति तीर।
- विश्व तीरंदाजी की मिश्रित टीम स्पर्धा: चार तीर चलाने के लिए कुल 80 सेकंड यानी औसतन 20 सेकंड प्रति तीर।
- आर्चरी प्रीमियर लीग: चार सदस्यीय मिश्रित टीम के आठ तीरों के लिए कुल 120 सेकंड यानी औसतन 15 सेकंड प्रति तीर।
- इस तरह एपीएल में तीरंदाजों को कम समय में सटीक निशाना साधने की चुनौती का सामना करना पड़ता है।
शॉट क्लॉक का नियम
एक सेट में आठ तीर चलाने के लिए प्रत्येक टीम को 120 सेकंड दिए जाते हैं। यानी औसतन प्रत्येक तीरंदाज को एक तीर चलाने के लिए 15 सेकंड मिलते हैं। हालांकि, यह समय प्रत्येक तीर के लिए अलग-अलग निर्धारित नहीं है, बल्कि पूरी टीम के आठ तीरों के लिए कुल 120 सेकंड की समय सीमा है।
दोनों टीमें बारी-बारी से तीर चलाती हैं। एक टीम के तीर चलाने के बाद अगली बारी दूसरी टीम की होती है। इस तरह दोनों टीमों के आठ-आठ तीर चलने तक यह क्रम जारी रहता है।
जब पहली टीम की घड़ी में 120 सेकंड की उलटी गिनती शुरू होती है, तो उसका एक तीरंदाज शूटिंग क्षेत्र में प्रवेश कर एक मीटर की रेखा पार करता है और तीर चलाता है। तीर चलाने के बाद वह वापस एक मीटर की रेखा के पीछे आ जाता है। उसके रेखा के पीछे लौटते ही उस टीम की घड़ी रोक दी जाती है।
इसके तुरंत बाद दूसरी टीम की घड़ी शुरू हो जाती है। दूसरी टीम का एक तीरंदाज शूटिंग क्षेत्र में प्रवेश कर एक मीटर की रेखा पार करता है और अपना तीर चलाता है। उसके वापस रेखा के पीछे लौटने पर दूसरी टीम की घड़ी रोक दी जाती है और फिर पहली टीम की बारी आती है।
इस प्रकार प्रत्येक टीम को अपने आठ तीर चलाने के लिए 120 सेकंड मिलते हैं। एक सेट में दोनों टीमों को मिलाकर कुल 240 सेकंड का समय निर्धारित है।
मुकाबले के दौरान खिलाड़ी बदले जा सकते हैं
मुकाबले की शुरुआत में चार तीरंदाजों को उतारने वाली प्रत्येक टीम को मैच के दौरान अधिकतम दो बदलाव करने की अनुमति होगी। इससे टीमें अपने पूरे दल के खिलाड़ियों का उपयोग कर सकेंगी।
हालांकि, एक बार टीम से बाहर होने के बाद कोई तीरंदाज उसी मुकाबले में दोबारा वापसी नहीं कर सकेगा। इसके अलावा, टीम में कम से कम एक विदेशी तीरंदाज का बने रहना अनिवार्य होगा।
हिट या मिस शूटऑफ से बराबरी का फैसला
यदि निर्धारित सेटों के बाद मुकाबला 4-4 से बराबर रहता है, तो विजेता का फैसला हिट या मिस शूटऑफ से होगा। इसमें प्रत्येक टीम के चार तीरंदाज हिस्सा लेंगे।
अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में शूटऑफ के दौरान तीरंदाज सामान्य सेट की तरह निशाना साधते हैं और अधिक स्कोर करने वाली टीम जीत जाती है। यदि दोनों टीमों का स्कोर बराबर रहता है, तो लक्ष्य के केंद्र के सबसे करीब तीर लगाने वाली टीम को विजेता घोषित किया जाता है।
हालांकि, एपीएल का शूटऑफ इससे अलग होगा। इसमें लक्ष्य पर स्कोर के अलग-अलग रिंग नहीं होंगे। लक्ष्य के बीच में केवल पीला आंतरिक घेरा होगा और बाकी हिस्सा लाल रंग का होगा। पीले घेरे में तीर लगने पर उसे हिट माना जाएगा, जबकि लाल हिस्से में तीर लगने पर वह मिस होगा।
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इस शूटऑफ में निशाने का आकार भी बेहद छोटा होगा। कंपाउंड वर्ग में 50 मीटर की दूरी से चार सेंटीमीटर चौड़े पीले घेरे पर निशाना साधना होगा, जबकि रिकर्व वर्ग में 70 मीटर की दूरी से आठ सेंटीमीटर चौड़े घेरे को भेदना होगा। ये आकार मानक 80 सेंटीमीटर और 122 सेंटीमीटर के लक्ष्यों पर बने एक्स-रिंग के बराबर हैं।
प्रत्येक तीरंदाज एक-एक तीर चलाएगा और उसे पीले घेरे पर निशाना साधना होगा। जिस टीम के तीरंदाज अधिक हिट दर्ज करेंगे, उसे विजेता घोषित किया जाएगा। इस प्रारूप में सटीक निशाने के साथ दबाव में बेहतर प्रदर्शन करना भी बेहद अहम होगा।
सडन डेथ में आखिरी फैसला
यदि नियमित शूटऑफ के बाद भी दोनों टीमें बराबरी पर रहती हैं, तो मुकाबला सडन डेथ में चला जाएगा। इसमें दोनों टीमें अपने एक-एक तीरंदाज का चयन करेंगी, जो एक-एक तीर चलाएंगे। यदि एक टीम का तीर हिट होता है और दूसरी टीम का तीर मिस, तो मुकाबला समाप्त हो जाएगा और हिट करने वाली टीम विजेता बनेगी।
यदि दोनों टीमें हिट करती हैं या दोनों के तीर मिस होते हैं, तो सडन डेथ का अगला दौर खेला जाएगा। इसमें दोनों टीमें अपने बचे हुए तीन तीरंदाजों में से एक-एक खिलाड़ी का चयन करेंगी। यह प्रक्रिया तब तक जारी रहेगी, जब तक मुकाबले का विजेता तय नहीं हो जाता।
लीग की छह टीमें :
- झारखंड की चेरो आर्चर्स
- तमिलनाडु की चोला चीफ्स
- तेलंगाना की काकतीय नाइट्स
- महाराष्ट्र की माइटी मराठाज
- दिल्ली की पृथ्वीराज योद्धाज
- राजस्थान की राजपूताना रॉयल्स














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