लखनऊ। भारतीय वायु सेना की प्रसिद्ध हेलीकॉप्टर प्रदर्शन टीम ‘सारंग’ 13 से 17 अक्टूबर 2026 तक बरेली में अपने हैरतअंगेज हवाई करतब दिखाएगी। वर्ष 2018 के बाद टीम एक बार फिर बरेली पहुंच रही है।
इस दौरान स्कूल-कॉलेज के विद्यार्थियों और आमंत्रित लोगों को भारतीय वायु सेना की पेशेवर दक्षता, पायलटों के असाधारण कौशल और स्वदेशी विमानन तकनीक की क्षमता देखने का अवसर मिलेगा। पांच हेलीकॉप्टरों के साथ होने वाला यह प्रदर्शन आसमान में सटीक तालमेल, अनुशासन और रोमांच का अनूठा संगम प्रस्तुत करेगा।
2018 के बाद फिर बरेली पहुंचेंगे स्वदेशी ‘ध्रुव’ हेलीकॉप्टर
सारंग भारतीय वायु सेना की विशिष्ट एरोबेटिक हेलीकॉप्टर टीम है। इसकी खासियत यह है कि टीम के पायलट भारत में निर्मित एडवांस्ड लाइट हेलीकॉप्टर (एएलएच) ‘ध्रुव’ के जरिए हवा में कठिन और सटीक करतब दिखाते हैं।
उड़ान के दौरान हेलीकॉप्टरों के बीच बेहद कम दूरी बनाए रखना, एक साथ दिशा और गति बदलना तथा निर्धारित तालमेल के साथ विभिन्न आकृतियां बनाना उच्च स्तर के प्रशिक्षण और समन्वय की मांग करता है। इन करतबों के दौरान पायलटों की एकाग्रता, तकनीकी समझ, अनुशासन और टीम के अन्य सदस्यों के साथ आपसी भरोसे की अहम भूमिका होती है।
विद्यार्थियों और आमंत्रित लोगों को देखने को मिलेगा रोमांचक हवाई प्रदर्शन
सारंग टीम की स्थापना वर्ष 2003 में की गई थी। तब से यह भारतीय वायु सेना की पहचान बनकर देश-विदेश के विभिन्न प्रमुख एयर शो और हवाई प्रदर्शनों में हिस्सा लेती रही है।
टीम ने अपने प्रदर्शन के माध्यम से भारतीय सैन्य विमानन की क्षमताओं और देश में विकसित हेलीकॉप्टर तकनीक को प्रदर्शित किया है। इसका नाम संस्कृत के शब्द ‘सारंग’ से लिया गया है, जिसका अर्थ मोर होता है। मोर के रंगों से प्रेरित हेलीकॉप्टरों की आकर्षक बनावट और हवा में उनके शानदार करतब टीम को विशिष्ट पहचान देते हैं।
2003 में हुई थी सारंग टीम की स्थापना
सारंग का प्रदर्शन केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सैन्य विमानन में आवश्यक तकनीकी दक्षता, प्रशिक्षण और अनुशासन को भी सामने लाता है।
हवा में एक साथ उड़ान भरते हेलीकॉप्टरों का संतुलन और उनके बीच सटीक तालमेल इस बात का उदाहरण है कि ऐसे प्रदर्शन के लिए कितनी तैयारी और अभ्यास की आवश्यकता होती है। प्रत्येक करतब के पीछे पायलटों की मेहनत, तकनीकी टीम का सहयोग और निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन महत्वपूर्ण होता है।
विद्यार्थियों और युवाओं के लिए होगा खास आकर्षण
बरेली में होने वाला यह आयोजन विद्यार्थियों और युवाओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बन सकता है। हेलीकॉप्टरों को करीब से देखने और उनके हवाई करतबों का अनुभव करने से उन्हें विमानन क्षेत्र, विज्ञान, तकनीक और इंजीनियरिंग के प्रति जिज्ञासा विकसित करने का अवसर मिलेगा।
साथ ही, सैन्य विमानन में करियर बनाने के इच्छुक युवाओं को भारतीय वायु सेना के कार्यों और पायलटों की भूमिका को समझने का मौका मिलेगा।
ऐसे हवाई प्रदर्शन युवाओं को यह समझने में भी मदद करते हैं कि किसी कठिन लक्ष्य को हासिल करने के लिए निरंतर अभ्यास, अनुशासन, आत्मविश्वास और टीम भावना कितनी जरूरी है।
सारंग के पायलटों का समन्वित प्रदर्शन इन गुणों का प्रत्यक्ष उदाहरण प्रस्तुत करता है। यह आयोजन युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बनने के साथ उन्हें देश की रक्षा सेवाओं में उपलब्ध अवसरों के प्रति जागरूक करने में भी उपयोगी हो सकता है।
स्वदेशी तकनीक और वायुसेना की क्षमता का प्रदर्शन
सारंग टीम के प्रदर्शन का एक महत्वपूर्ण पहलू स्वदेशी ‘ध्रुव’ हेलीकॉप्टर है। भारत में निर्मित इस हेलीकॉप्टर का उपयोग करते हुए टीम कठिन हवाई करतबों का प्रदर्शन करती है। इससे भारतीय विमानन क्षेत्र में विकसित तकनीकी क्षमताओं और सैन्य प्रशिक्षण के उच्च स्तर को प्रदर्शित करने का अवसर मिलता है।
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13 से 17 अक्टूबर तक प्रस्तावित बरेली कार्यक्रम के जरिए स्थानीय विद्यार्थियों और आमंत्रित दर्शकों को भारतीय वायु सेना की इस विशिष्ट टीम को देखने का अवसर मिलेगा।
वर्ष 2018 के बाद सारंग की वापसी से इस प्रदर्शन को लेकर विशेष उत्सुकता रहने की उम्मीद है। रंगीन हेलीकॉप्टरों की सटीक उड़ान, रोमांचक करतब और पायलटों का अनुशासित तालमेल इस आयोजन को यादगार बना सकता है।













