लखनऊ। 10 मई 1857 स्वतंत्रता संग्राम के प्रथम सशस्त्र विद्रोह की 169वीं वर्षगांठ की पूर्व संध्या पर व्याख्यान का आयोजन डाॅ0 राॅबिन वर्मा द्वारा किया गया।
व्याख्यान में छात्र/छात्राओं को डाॅ0 वर्मा बताया कि कैसे मेरठ शहर की सैन्य छावनी में मातादीन भंगी और गंगू मेहतर ने विद्रोही सेना के सैनिकों को बताया था कि बंदूकों में प्रयोग होने वाले कारतूसों में गाय और सूअर की चर्बी का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिसकी जानकारी होने पर सैनिकों ने अंग्रेजी हुकूमत के विरूद्ध विद्रोह कर दिया और विद्रोह की चिंगारी पूरे देश में फैल उठी।

उन्होंने आगे बताया कि कैसे अवध में बेगम हजरत महल, राजा जय लाल सिंह, उदा देवी पासी आदि के नेतृत्व में अवध की विद्रोही सेना ने आठ महीने तक लखनऊ में अंग्रेजी सेना से लोहा लिया। जंग-ए-आजादी के निशान आज भी हमें रेजीडेन्सी, मूसा बाग और चिनहट आदि स्थानों पर देखें जा सकते हैं।
इस मौके पर डाॅ0 मीसम मुबारक, निदेशक एससीडीआरसी डाॅ0 प्रदीप शर्मा, प्राक्टर प्रो0 सै0 मेहदी अब्बास जैदी, डाॅ0 तरून कांत त्रिपाठी, डाॅ0 हुज्जत रजा, डाॅ0 मेनका गिरी, डाॅ0 अली मेंहदी, डाॅ0 जेबा मेंहदी, अभिषेक श्रीवास्तव, राजकुमार सैनी, धर्मेन्द्र कुमार, विकास कश्यप, इल्तेमाश हुसैन, शबाब हुसैन सहित प्रतिभागी छात्र/छात्रायें उपस्थित रहे।













