हाईलाइट्स
- डॉ. राजेश्वर सिंह का संकल्प- अब तक 8600 से अधिक श्रद्धालुओं ने किए श्रीरामलला के दर्शन
- पहल — रामरथ यात्रा के माध्यम से संस्कार, संस्कृति और राष्ट्रधर्म का संदेश
- सरोजनीनगर में निरंतर प्रज्ज्वलित रहे रामभक्ति और सामाजिक समरसता की ज्योति
लखनऊ। “राम केवल आस्था नहीं, भारत की आत्मा हैं और सेवा ही वह मार्ग है, जो समाज को संस्कारों से जोड़ता है।” इन्हीं भावनाओं के साथ सरोजनीनगर विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह द्वारा आयोजित 59वीं रामरथ श्रवण अयोध्या यात्रा उसरी तिराहा, बंगला बाज़ार, सरोजनीनगर से सफलतापूर्वक संपन्न हुई।
यह पावन यात्रा श्रद्धालुओं को प्रभु श्रीरामलला के दर्शन कराने के साथ-साथ समाज को धर्म, संस्कृति, सेवा और सामाजिक समरसता के सूत्र में जोड़ने का एक प्रेरणादायी अभियान बन चुकी है।
रामरथ श्रवण अयोध्या यात्रा का शुभारंभ 27 सितंबर 2022 को डॉ. राजेश्वर सिंह द्वारा अपनी स्वर्गीय माताजी श्रीमती तारा सिंह की पुण्य स्मृति में किया गया था।
आधुनिक श्रवण कुमार की भावना से प्रेरित यह पहल वरिष्ठ नागरिकों, महिलाओं एवं आर्थिक रूप से कमजोर श्रद्धालुओं को निःशुल्क अयोध्या धाम ले जाकर श्रीरामलला, हनुमानगढ़ी एवं अन्य पवित्र स्थलों के दर्शन कराने का माध्यम बनी है।
इस अभियान का उद्देश्य केवल तीर्थ दर्शन कराना नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, संस्कारों और बुजुर्गों के सम्मान की परंपरा को सशक्त बनाना भी है।
डॉ. राजेश्वर सिंह की प्रेरणा और मार्गदर्शन में संचालित इस पुण्य यात्रा के माध्यम से अब तक 150 बसों द्वारा 8600 से अधिक श्रद्धालु अयोध्या धाम पहुंचकर प्रभु श्रीरामलला के दर्शन कर चुके हैं।
यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं ने पवित्र सरयू स्नान किया, हनुमानगढ़ी में दर्शन-पूजन किया तथा प्रभु श्रीरामलला का आशीर्वाद प्राप्त किया। सरोजनीनगर परिवार के बुजुर्गों एवं श्रद्धालुओं की उत्साहपूर्ण सहभागिता ने पूरी यात्रा को भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक चेतना के महोत्सव का स्वरूप प्रदान किया।
यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की सुविधा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए भोजन, जलपान, चिकित्सा सहायता एवं अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं का विशेष प्रबंध किया गया।
श्रद्धालुओं को गीता एवं प्रसाद भी वितरित किया गया। सेवा भाव, अनुशासन और समर्पण का अद्भुत समन्वय पूरी यात्रा में देखने को मिला, जिसने श्रद्धालुओं के अनुभव को और अधिक दिव्य एवं स्मरणीय बना दिया।
डॉ. राजेश्वर सिंह के विचारों के अनुरूप रामरथ यात्रा का उद्देश्य केवल दर्शन कराना नहीं, बल्कि प्रभु श्रीराम के आदर्शों, मर्यादा, त्याग, सेवा और राष्ट्रधर्म के संदेश को जन-जन तक पहुंचाना भी है।
यह यात्रा नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति, परंपरा और संस्कारों से जोड़ने का एक सशक्त माध्यम बन रही है। उनके सांस्कृतिक एवं सामाजिक सरोकारों के संकल्प के तहत यह अभियान समाज में आध्यात्मिक जागरण, सामाजिक समरसता और सेवा भाव को निरंतर सशक्त कर रहा है।
सरोजनीनगर परिवार के लिए यह यात्रा अब केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक एकता, बुजुर्ग सम्मान, सेवा और आध्यात्मिक जागरण का जनआंदोलन बन चुकी है। प्रभु श्रीराम की कृपा सभी श्रद्धालुओं पर बनी रहे तथा आने वाले वर्षों में भी यह यात्रा आस्था, संस्कार और सेवा की अखंड ज्योति को निरंतर प्रज्ज्वलित करती रहे।
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