नीट विवाद के बीच बड़ा फैसला, धर्मेंद्र प्रधान ने छोड़ा शिक्षा मंत्री पद

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साभार : गूगल

धर्मेंद्र प्रधान ने शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपना त्यागपत्र प्रधानमंत्री मोदी को भेजा है। नीट-यूजी परीक्षा में गड़बड़ी को लेकर देशभर में जारी विवाद और जंतर-मंतर पर छात्र आंदोलन के बीच उन्होंने यह फैसला लिया।

धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफे का ऐलान करते हुए कहा कि पिछले कुछ दिनों की घटनाओं ने उन्हें बेहद व्यथित किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह व्यक्तिगत सम्मान का मुद्दा नहीं, बल्कि देश के युवाओं के भविष्य से जुड़ा विषय है।

उन्होंने बताया कि 3 मई 2026 को आयोजित नीट-यूजी परीक्षा में अनियमितताओं की शिकायत मिलते ही सरकार ने त्वरित कदम उठाए। मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गई, परीक्षा रद्द कर दोबारा कराने का निर्णय लिया गया और अगले वर्ष से परीक्षा को पूरी तरह कंप्यूटर आधारित मोड में आयोजित करने की घोषणा की गई।

@dpradhanbjp

प्रधान ने कहा कि 20 लाख से अधिक छात्रों की परीक्षा निष्पक्ष ढंग से कराना उनकी प्राथमिकता थी। केंद्र व राज्य सरकारों के सहयोग से 21 जून 2026 को दोबारा परीक्षा सफलतापूर्वक कराई गई और 16 जुलाई को परिणाम घोषित हुए, जिनमें वंचित वर्ग के कई छात्रों ने सफलता हासिल की।

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उन्होंने कहा कि कुछ जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों ने छात्रों को गुमराह करने की कोशिश की, जिससे उन्हें गहरा दुख हुआ।इस्तीफे पर प्रधान ने कहा कि वह नहीं चाहते कि छात्रों का भविष्य कानूनी विवादों और राजनीतिक टकराव में उलझे या उनका ध्यान पढ़ाई से भटके।

इसी भावना के साथ उन्होंने पद छोड़ने का निर्णय लिया।अपने पत्र के अंत में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मंत्रिपरिषद के सहयोगियों और शिक्षा मंत्रालय के अधिकारियों-कर्मचारियों का आभार व्यक्त किया। साथ ही कहा कि वह आगे भी देश के युवाओं और समाज के लिए पूरी निष्ठा के साथ काम करते रहेंगे।

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