पहाड़ों की शांत वादियों और रामनगर रेलवे स्टेशन के करीब बसी तंग गलियों से निकलकर क्रिकेट के मैदान पर इतिहास रचने वाली नीलम भारद्वाज आज भारतीय घरेलू क्रिकेट की सबसे बड़ी उम्मीद बनकर उभरी हैं। आर्थिक तंगी, सीमित संसाधन और एक मजदूर पिता का पसीना, नीलम की शुरुआती जिंदगी के कठोर सच थे। इसके बावजूद, बचपन से ही उनके भीतर क्रिकेट के प्रति असाधारण जुनून था।
दोहरा शतक जड़ने के बाद अब उत्तराखंड प्रीमियर लीग 2026 चैंपियन बनीं नीलम भारद्वाज: रामनगर की गलियों से देहादून वॉरियर्स की ट्रॉफी तक की कहानी
महज 8 साल की उम्र से लकड़ी का बल्ला थामने वाली नीलम के हुनर को उनके कोच मोहम्मद इसरार अंसारी ने पहचाना। अंसारी सर ने न केवल उन्हें तकनीकी रूप से निखारा, बल्कि एक पिता की तरह हर मोड़ पर उनका हाथ थामे रखा।
2020 की महामारी के कठिन दौर में भी जब सब कुछ ठप था, तब स्पेशल परमिशन और लड़कों की अकादमियों के बीच नीलम की ट्रेनिंग जारी रही, जिसकी बदौलत सिर्फ 12 साल की उम्र में उन्होंने उत्तराखंड की अंडर-19 टीम में जगह बना ली।

नीलम का नाम क्रिकेट जगत में तब छा गया जब दिसंबर 2024 में सीनियर विमेंस वन डे ट्रॉफी के दौरान उन्होंने नागालैंड के खिलाफ नाबाद 202 रनों की ऐतिहासिक पारी खेली। मात्र 137 गेंदों में 27 चौकों और 2 छक्कों से सजी इस शानदार पारी की बदौलत 18 साल की नीलम भारत की सबसे कम उम्र में लिस्ट-ए क्रिकेट में दोहरा शतक जड़ने वाली महिला क्रिकेटर बनीं।
इस उपलब्धि को याद करते हुए नीलम बताती हैं कि 150 रन बनाने के बाद वे शारीरिक रूप से काफी थक चुकी थीं, लेकिन कोच एडी मैम का प्रेरणादायक संदेश और मैदान पर साथी खिलाड़ी कंचन परियार के बेहतरीन एथलेटिक सहयोग ने उन्हें 200 के आंकड़े तक पहुंचाया। उन्होंने यह ऐतिहासिक पारी बिना कोई मौका दिए, पूरे संयम और सही माइंडसेट के साथ खेली थी।
इस पूरी यात्रा में उत्तराखंड प्रीमियर लीग राज्य में क्रिकेट की एक नई क्रांति बनकर उभरा है, जिसने विशेष रूप से महिला खिलाड़ियों के लिए एक भव्य और मजबूत मंच तैयार किया है। पहाड़ों और छोटे शहरों की प्रतिभावान बेटियों के लिए उत्तराखंड प्रीमियर लीग एक ऐसा जरिया बन चुका है जहाँ वे अपनी काबिलियत को दुनिया के सामने बड़े पैमाने पर प्रदर्शित कर सकती हैं।
इस लीग की वजह से खिलाड़ियों को न केवल पेशेवर माहौल, शानदार इंफ्रास्ट्रक्चर और लाइव मीडिया कवरेज मिल रही है, बल्कि यह मंच महिला और पुरुष क्रिकेट के अंतर को मिटाकर बराबरी का सम्मान और पहचान दे रहा है। उत्तराखंड प्रीमियर लीग ने उत्तराखंड की युवा लड़कियों के लिए एक ऐसा पारिस्थितिकी तंत्र तैयार किया है जो उनके भीतर आत्मविश्वास भरता है और विमेंस प्रीमियर लीग तथा भारतीय राष्ट्रीय टीम तक पहुँचने के रास्ते को आसान बनाता है।
इसी उत्तराखंड प्रीमियर लीग 2026 में नीलम भारद्वाज ने एक बार फिर अपनी आक्रामक बल्लेबाजी और ऑलराउंड प्रदर्शन से देहरादून वॉरियर्स को चैंपियन बनाया। पूरे टूर्नामेंट में उनका बल्ला जमकर बोला, जहां उन्होंने बागेश्वर एरियल के खिलाफ 39 गेंदों में नाबाद 48 रन और मसूरी थंडर्स के खिलाफ 46 गेंदों में 48 रनों की बेहद महत्वपूर्ण पारियां खेलीं।
इसके बाद उत्तराखंड प्रीमियर लीग 2026 के फाइनल मुकाबले में भी उनके शानदार खेल और संयम के लिए उन्हें ‘प्लेयर ऑफ द मैच’ चुना गया, जिसने उनकी टीम की खिताबी जीत पर मुहर लगा दी। इतनी कम उम्र में मिली अपार सफलता के बाद भी नीलम बेहद जमीन से जुड़ी हुई हैं।
दोहरा शतक बनाने के बाद जब पूरा सोशल मीडिया उनके नाम से भरा पड़ा था, तब भी उन्होंने फोन बंद रखकर सबसे पहले अपनी मां और अपनी खास सहेली नंदिनी को फोन किया। महेंद्र सिंह धोनी के धैर्य, केएल राहुल के टेम्परामेंट और राधा यादव के मैदानी रुख से प्रभावित नीलम का मुख्य लक्ष्य अब अंडर-19 विश्व कप और भारतीय राष्ट्रीय टीम में जगह बनाना है।
अपनी कोच अनघा देशपांडे की इस सीख को याद रखते हुए कि ‘भारत की जर्सी पहनना आसान है लेकिन 10 साल तक वहां टिकना असली चुनौती है’, नीलम खुद को लंबे समय तक देश के लिए खेलने के लिए लगातार तैयार कर रही हैं।












