अमेरिका के मतदाताओं ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रिपब्लिकन पार्टी को बड़ा झटका दिया है। डेमोक्रेटिक पार्टी ने हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स और सीनेट दोनों में शानदार प्रदर्शन करते हुए नियंत्रण हासिल कर लिया।
डोनाल्ड ट्रंप ने 2024 के चुनाव अभियान के दौरान महंगाई कम करने और लोगों की जिंदगी को ज्यादा सस्ती और आसान बनाने का वादा किया था, लेकिन सत्ता में लौटने के बाद उनका ध्यान दूसरी बड़ी योजनाओं पर चला गया।
उन्होंने ‘मेक अमेरिका ग्रेट अगेन’ के नाम पर टैरिफ बढ़ाने, ईरान में सत्ता परिवर्तन की कोशिशों और व्हाइट हाउस तथा वॉशिंगटन को नया रूप देने जैसे मुद्दों पर ज्यादा जोर दिया। आलोचकों का कहना है कि ये कदम उन वादों से अलग थे जो उन्होंने जनता से किए थे।
हार की खबरें आने के बीच ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर लिखा, “मैं बैलेट पर नहीं था और अगर होता तो हम भारी बहुमत से जीतते।”
रिपब्लिकन पार्टी पर उनकी मजबूत पकड़ और प्रभाव को इस चुनाव नतीजे ने कमजोर कर दिया है। खास बात यह रही कि पार्टी को उन राज्यों में भी नुकसान हुआ जो लंबे समय से रिपब्लिकनों के गढ़ माने जाते थे, जैसे टेक्सास, कंसास और साउथ कैरोलाइना।
कंसास में एडम हैमिल्टन ने लगभग 95 साल पुराने रिपब्लिकन दबदबे को खत्म करते हुए सीनेट सीट जीती। वह 95 साल बाद वहां से चुने जाने वाले पहले डेमोक्रेट बने। वहीं, हीना हिनोजोसा के टेक्सास की गवर्नर चुने जाने से राज्य में 36 साल पुराना रिपब्लिकन दौर खत्म हो गया।
ट्रंप के लिए यह हार इसलिए भी ज्यादा व्यक्तिगत मानी जा रही है, क्योंकि उनके समर्थन वाले कई उम्मीदवार भी चुनाव हार गए। इनमें टेक्सास के केन पैक्सटन शामिल हैं, जिन पर रिश्वतखोरी के आरोप लगे थे और जिन पर महाभियोग भी चला था। इसके अलावा दिवंगत सीनेटर लिंडसे ग्राहम की बहन सुसान ग्राहम भी चुनाव हार गईं।
अब यह सवाल उठ रहा है कि क्या रिपब्लिकन पार्टी के नेता ट्रंप से अलग राय रखने की हिम्मत दिखाएंगे और स्वतंत्र तरीके से काम करेंगे। पहले जो नेता थोड़ी भी स्वतंत्र सोच दिखाते थे, उन्हें राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ता था। उदाहरण के तौर पर टेक्सास के सीनेटर जॉन कॉर्निन को भी ऐसे हालात का सामना करना पड़ा था।
अब माना जा रहा है कि पार्टी के कुछ नेता ट्रंप की नीतियों, जैसे टैरिफ युद्ध, ईरान से जुड़े विवाद और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ उनके रिश्तों पर खुलकर सवाल उठा सकते हैं।
मंगलवार को मतदान के दौरान दिए गए एक इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा था कि यदि डेमोक्रेट्स कोई कानून लाते हैं तो वह ‘मिस्टर वीटो’ बनकर उसे रोक देंगे और अंत में उन्हें समझौता करना पड़ेगा।
हार की खबरें आने के बाद उनका रुख कुछ नरम दिखा। उन्होंने पॉलिटिको से कहा, “मैं अगले दो साल सिर्फ हर चीज पर वीटो लगाकर नहीं बैठना चाहता।” उन्होंने कहा, “हम डेमोक्रेट्स के साथ मिलकर काम करेंगे ताकि देश के लिए अच्छे नतीजे मिल सकें।” कुछ को डर है कि ट्रंप अपने विरोधियों के खिलाफ और ज्यादा आक्रामक रुख अपना सकते हैं।
लेकिन चुनाव में मिली बड़ी हार और डेमोक्रेट्स को मिला मजबूत बहुमत उनकी संभावित कार्रवाइयों पर कुछ हद तक रोक लगा सकता है। आने वाले समय में सबसे बड़ा सवाल यह होगा कि ट्रंप अब ईरान को लेकर क्या रुख अपनाते हैं, क्योंकि यही मुद्दा उनकी राजनीतिक मुश्किलों का एक बड़ा कारण माना जा रहा है।
ट्रंप ने दावा किया कि डेमोक्रेट्स पहले ही उनसे संपर्क कर चुके हैं और उनके साथ काम करना चाहते हैं, लेकिन प्रतिनिधि सभा में डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता और संभावित स्पीकर हकीम जेफ्रीज ने साफ कहा कि उनकी पार्टी बड़े बदलाव लाने के लिए तैयार है।
उन्होंने कहा, “हमें समझ है कि हाउस डेमोक्रेट्स के तौर पर हमें बड़े बदलाव देने होंगे।” जेफ्रीज ने आगे कहा, “कई चीजें टूटी हुई हैं। हमें ऐसी कांग्रेस चाहिए जो सबसे पहले अमेरिकी जनता के हितों को प्राथमिकता दे।”
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