लखनऊ : आयुर्वेद आधारित सहयोगात्मक अनुसंधान को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शुक्रवार को अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान, नई दिल्ली, आयुष मंत्रालय तथा केंद्रीय औषधीय एवं सगंध पौधा संस्थान, लखनऊ के बीच प्रस्तावित समझौता ज्ञापन को अंतिम रूप देने हेतु सीमैप, लखनऊ में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई।
यह पहल आयुर्वेद के वैज्ञानिक प्रमाणीकरण और वैश्विक स्वीकार्यता की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है। बैठक में अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान के निदेशक प्रो. वैद्य प्रदीप कुमार प्रजापति, सह आचार्य वैद्य विवेक अग्रवाल तथा सीमैप के निदेशक डॉ. प्रबोध कुमार त्रिवेदी सहित दोनों संस्थानों के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अधिकारी उपस्थित रहे।
प्रस्तावित समझौता ज्ञापन के अंतर्गत आयुर्वेद के “समग्र दृष्टिकोण” को आधुनिक वैज्ञानिक प्रमाणों के साथ जोड़ते हुए संयुक्त अनुसंधान एवं विकास कार्य किए जाएंगे। इसके तहत सीमैप द्वारा विकसित आयुर्वेदिक योगों का वैज्ञानिक प्रमाणीकरण तथा चिकित्सीय उपयोग के लिए जल एवं मद्य मिश्रित अर्कों पर संयुक्त अध्ययन किए जाने का प्रस्ताव है।
बैठक में यह भी तय किया गया कि पूर्व-नैदानिक परीक्षण सीमैप द्वारा किए जाएंगे, जबकि औषधीय योगों के नैदानिक परीक्षण अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान, नई दिल्ली द्वारा संचालित किए जाएंगे।
अनुसंधान का मुख्य केंद्र वसायुक्त यकृत रोग, उपापचयी विकारों से संबंधित यकृत रोग, आंत-यकृत विकार तथा आमवात जैसे रोग रहेंगे। प्रस्तावित अध्ययनों में प्रतिरक्षा नियंत्रक मानकों एवं यकृत रोग से संबंधित संकेतकों का मूल्यांकन भी शामिल होगा। बैठक में क्षमता निर्माण और प्रौद्योगिकी विकास को भी सहयोग का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया गया।
समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर के बाद संयुक्त परीक्षणों की निगरानी के लिए एक संयुक्त समिति गठित की जाएगी। साथ ही उन्नत ऊतक संवर्धन तकनीकों एवं नियंत्रित कृषि पद्धतियों के माध्यम से दुर्लभ, संकटग्रस्त एवं विलुप्तप्राय औषधीय पौधों के संरक्षण और संवर्धन पर कार्य किया जाएगा।
इसके अतिरिक्त, सीमैप द्वारा विकसित भारतीय मूल की प्रमाणित संदर्भ सामग्रियों — जैसे अश्वगंधा एवं कालमेघ — के व्यावसायिक उपयोग की दिशा में भी सहयोग किया जाएगा। विंध्याचल क्षेत्र के औषधीय पौधों के संरक्षण पर विशेष ध्यान देने के साथ छात्र विनिमय एवं प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से क्षमता निर्माण की योजनाएं भी प्रस्तावित की गई हैं।
बैठक में वक्ताओं ने कहा कि यह सहयोग अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान की नैदानिक विशेषज्ञता और सीमैप की वनस्पति रसायन एवं पूर्व-नैदानिक अनुसंधान क्षमताओं के समन्वय का महत्वपूर्ण उदाहरण होगा।
इससे आयुर्वेदिक औषधीय योगों के लिए वैज्ञानिक प्रमाण विकसित करने, औषधीय पौधों की खेती को बढ़ावा देने तथा आयुर्वेद के लिए वैश्विक गुणवत्ता मानक स्थापित करने में सहायता मिलेगी।
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