नई पीढ़ी को सनातन मूल्यों से जोड़ना समय की जरुरत: रामभद्राचार्य

0
59

लखनऊ। प्रख्यात विद्वान, शिक्षाविद, महाकवि, दार्शनिक एवं रामानंद संप्रदाय के जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी रामभद्राचार्य के सम्मान में शनिवार को अभिनंदन समारोह का आयोजन किया गया।

समारोह में देशभर के विद्वानों, संस्कृत प्रेमियों और गणमान्य व्यक्तियों ने भाग लिया तथा भारतीय संस्कृति, सनातन धर्म और वैदिक परंपरा के संरक्षण पर व्यापक चर्चा हुई।

ज्ञानपीठ, पद्म विभूषण सहित अनेक प्रतिष्ठित सम्मानों से अलंकृत जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने अपने संबोधन में कहा कि सनातन धर्म और भारतीय वैदिक संस्कृति देश की अमूल्य धरोहर हैं। नई पीढ़ी को इनके मूल्यों से परिचित कराना समय की आवश्यकता है, ताकि भारतीय संस्कृति की गौरवशाली परंपरा का संरक्षण और संवर्धन सुनिश्चित हो सके।

उन्होंने कहा कि भारतीय वैदिक संस्कृति मानव जीवन को धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष के संतुलित मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है।

सनातन धर्म के मूल सिद्धांत सत्य, अहिंसा, करुणा, सहिष्णुता और प्रकृति के प्रति सम्मान की भावना को प्रोत्साहित करते हैं। वर्तमान समय में पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकता पहले से अधिक बढ़ गई है। प्रकृति सुरक्षित रहेगी तभी मानव जीवन का अस्तित्व भी सुरक्षित रहेगा।

जगद्गुरु ने कहा कि भारतीय वैदिक संस्कृति और सनातन धर्म का सामंजस्य समाज में नैतिकता, सद्भाव और आध्यात्मिक चेतना का विकास करता है।

वेद, उपनिषद, पुराण और अन्य धर्मग्रंथ मानव जीवन को उत्कृष्ट बनाने का मार्ग प्रशस्त करते हैं तथा आज भी उनकी प्रासंगिकता बनी हुई है। उन्होंने कहा कि यही मूल्य भारत को विश्वगुरु बनने की दिशा में आगे बढ़ाते हैं।

समारोह में जगद्गुरु रामभद्राचार्य के परम शिष्य श्रीरामचंद्राचार्य ने भी अपने विचार व्यक्त किए। राजस्थान संस्कृत विश्वविद्यालय, जयपुर के पूर्व कुलपति प्रो. रामसेवक दुबे ने जगद्गुरु रामभद्राचार्य द्वारा रचित भाष्यों और ग्रंथों के विशिष्ट योगदान पर प्रकाश डाला।

कार्यक्रम में विधायक नीरज बोरा की विशेष उपस्थिति रही। उन्होंने अखिल भारतीय संस्कृत परिषद के पुस्तकालय एवं अन्य विकास कार्यों के लिए विधायक निधि से पांच लाख रुपये देने की घोषणा की। वहीं जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने भी परिषद के विकास हेतु एक लाख रुपये का योगदान देने की घोषणा की।

इस अवसर पर जगद्गुरु रामभद्राचार्य दिव्यांग राज्य विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. शिशिर कुमार पाण्डेय, परिषद के अध्यक्ष डॉ. चन्द्रभूषण त्रिपाठी, उपाध्यक्ष डॉ. रवि किशोर त्रिवेदी, कोषाध्यक्ष डॉ. युग्गीलाल दीक्षित सहित अनेक शिक्षाविद, विद्वान और संस्कृत प्रेमी उपस्थित रहे।

अखिल भारतीय संस्कृत परिषद के मंत्री प्रो. प्रयाग नारायण मिश्र ने संस्था का परिचय प्रस्तुत किया, जबकि परिषद के अध्यक्ष डॉ. चन्द्रभूषण त्रिपाठी ने अभिनंदन पत्र का वाचन किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता भी उन्होंने ही की। संचालन प्रो. अशोक कुमार शतपथी ने किया तथा वैदिक मंगलाचरण एवं शांति पाठ के साथ समारोह का समापन हुआ।

समारोह में लखनऊ विश्वविद्यालय, केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, विभिन्न शिक्षण संस्थानों के शिक्षकों, शोधार्थियों तथा संस्कृत प्रेमियों सहित बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे।

ये भी पढ़ें : आम की मिठास, संस्कृति की खुशबू और पारिवारिक उत्साह का अनूठा संगम

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here